नयी दिल्ली, सात मार्च (भाषा) बिजली मंत्रालय ने कोयला या लिग्नाइट आधारित नए ताप-विद्युत संयंत्रों को अपनी क्षमता का न्यूनतम 40 प्रतिशत हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा इकाई लगाकर पूरा करने या उतनी ही मात्रा में हरित ऊर्जा की खरीद करने को कहा है।
बिजली मंत्रालय ने बिजली अधिनियम, 2003 के तहत बिजली शुल्क नीति 2016 को महीने की शुरुआत में संशोधित किया है। इस बदलाव के जरिये कोयला या लिग्नाइट आधारित नए बिजली उत्पादन संयंत्रों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है कि उनकी 40 प्रतिशत बिजली हरित ऊर्जा वाली हो।
अधिसूचना के मुताबिक, यह प्रावधान एक अप्रैल, 2023 के बाद परिचालन शुरू करने वाले कोयला एवं लिग्नाइट आधारित संयंत्रों पर ही लागू होगा। इसके मुताबिक, इन संयंत्रों को अपनी कुल क्षमता के कम-से-कम 40 प्रतिशत हिस्से की पूर्ति नवीकरणीय ऊर्जा इकाई लगाकर करनी होगी या फिर उन्हें समान क्षमता की हरित ऊर्जा की खरीद करनी होगी।
अप्रैल, 2023 से मार्च, 2025 तक परिचालन शुरू करने वाली नई ताप-विद्युत परियोजनाओं को एक अप्रैल, 2025 तक 40 प्रतिशत बिजली नवीकरणीय स्रोतों से पैदा करनी होगी।
वहीं एक अप्रैल, 2025 के बाद परिचालन शुरू करने वाली परियोजनाओं को परिचालन शुरू होने तक 40 प्रतिशत बिजली नवीकरणीय स्रोतों से जुटानी होगी।
सरकार का यह कदम वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य का दिशा में उठाया गया है। जनवरी अंत तक भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 1,21,549.52 मेगावॉट थी।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय
अजय
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
