नयी दिल्ली, एक मार्च (भाषा) दिल्ली के मास्टर प्लान -2041 के मसौदे में बुनियादी ढांचे को बढ़ाए जाने के अलावा राष्ट्रीय राजधानी के समृद्ध इतिहास और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए विरासत भवनों के संरक्षण में सुधार लाने पर जोर दिया गया है।
इसके अलावा इसमें विरासत क्षेत्रों, पुरातात्विक उद्यानों और सांस्कृतिक परिसीमा के लिए नियमों के साथ ही पुरानी इमारतों के पुन: इस्तेमाल और विरासत प्रकोष्ठ बनाए जाने का भी प्रावधान है जिससे इस ऐतिहासिक शहर के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा मिलेगा।
उपराज्यपाल वी के सक्सेना ने दिल्ली के लिए मास्टर प्लान -2041 (एमपीडी) के मसौदे को मंगलवार को स्वीकृति दे दी और कहा कि इसका ध्यान समावेशी विकास, स्थिरता और नवोन्मेषी हस्तक्षेप जैसे कि ट्रांजिट उन्मुख विकास हब, भूमि पूलिंग, विरासत और यमुना कायाकल्प तथा शहर के पुनरुद्धार पर केंद्रित है।
दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने मंगलवार को जारी किए एक बयान में कहा कि इसमें ‘‘सांस्कृतिक परिसीमा, धरोहर इमारतों के पुन: इस्तेमाल के लिए संरक्षण तथा पुनरुद्धार प्रबंधन योजनाएं’’ बनायी गयी है।
अधिकारियों ने बताया कि मास्टर प्लान में विरासत प्रकोष्ठ के गठन का भी संकेत दिया गया है। इसमें सांस्कृतिक और मनोरंजन हब के विकास को बढ़ावा देने तथा प्लाजा और नाइट-टाइम सर्किट के विकास पर भी जोर दिया गया है।
दिल्ली की ‘नाइट लाइफ’ अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए विशेष गलियारों और मार्गों की पहचान की जाएगी।
मास्टर प्लान में यमुना नदी के लिए व्यापक विकास योजना तैयार करके यमुना और उसके मैदानी हिस्सों के पुनरुद्धार का भी प्रावधान है। साथ ही इसमें जलवायु परिवर्तन के असर और प्रदूषण से निपटने की तैयारियों पर भी जोर दिया गया है।
दिल्ली विकास अधिनियम, 1957 के तहत 1962 में पहला मास्टर प्लान लागू किया गया था। ये योजनाएं 20 साल की अवधि के लिए तैयार की जाती है।
डीडीए ने इस बार के मास्टर प्लान में व्यापक परिवहन बुनियादी ढांचा बनाने, सभी के लिए किफायती आवास, स्वस्थ वातावरण और शहर को चौबीस घंटे जीवंत रखने के लिए नाइट-टाइम अर्थव्यवस्था तथा अवैध कॉलोनियों पर लगाम और प्रदूषण पर भी ध्यान केंद्रित किया है।
अधिकारियों ने बताया कि इस मास्टर प्लान को अब अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय आवासीय एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के पास भेजा जाएगा, जिसके बाद अधिसूचना जारी की जाएगी।
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गोला माधव
माधव
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