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Thursday, 5 February, 2026
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कैग के चार प्रतिवेदन विधानसभा में पेश, विभिन्न विभागों के कामकाज में कमियां रेखांकित कीं

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जयपुर, 28 फरवरी (भाषा) नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की चार ऑडिट रिपोर्ट मंगलवार को राजस्थान विधानसभा में पेश की गईं जिनमें राजस्थान सरकार के विभिन्न विभागों के कामकाज में कमियों को उजागर किया गया है।

आधिकारिक बयान के अनुसार, यह प्रतिवेदन राज्‍य में अवैध खनन, बिजली कंपनियों द्वारा दीनदयाल ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के कार्यान्वयन, शहरी निकायों एवं नगरीय विकास विभाग द्वारा अमृत योजना के कार्यान्वयन तथा सरकारी कंपनियों एवं निगमों के कामकाज पर कैग द्वारा की गई ऑडिट में पाई गई कमियों को उजागर करते हैं।

इसके अनुसार, राज्य में हो रहे अवैध खनन के संबंध में कैग द्वारा की गई लेखा परीक्षा में पाया गया कि अवैध खनन गतिविधियों को रोकने के लिए सरकारी तंत्र को मजबूत करने के लिए सुधार की जरूरत है। देश में सर्वाधिक संख्या में खनन पट्टे राजस्थान में हैं। कैग द्वारा यह देखा गया कि क्‍या राज्य सरकार अवैध खनन को रोकने के लिए पर्याप्त उपाय कर रही है।

रिपोर्ट में दर्शाया गया है कि विभाग ने अवैध खनन गतिविधियों की पहचान करने और उन पर रोक लगाने के लिए मुफ्त में उपलब्‍ध नई तकनीकों जैसे रिमोट सेंसिंग डाटा एवं जीआईएस का उपयोग नहीं किया। लेखा परीक्षा द्वारा रिमोट सेंसिंग डाटा एवं जीआईएस तकनीक के उपयोग से 122 प्रकरणों में 83.25 हेक्टेयर में अवैध खनन की पहचान की गई। इसके अनुसार यह परिणाम दर्शाते है कि 34 प्रतिशत खनन पट्टों के निकट अवैध खनन हो रहा था।

विभाग ने लेखा परीक्षा द्वारा बताये गये 14 खनन पट्टों का निरीक्षण किया और पाया कि 13.37 लाख मीट्रिक टन खनिजों का अवैध खनन हुआ है। इस खनिज की कीमत एक अरब 11 करोड़ रुपये है।

इसके अनुसार, विभागीय अधिकारियों द्वारा आधुनिक तकनीक का उपयोग नहीं करने तथा खनन पट्टों का निरीक्षण नहीं करने के कारण इस अवैध खनन का पता विभाग को नहीं चल सका। विभाग खनन गतिविधियों की निगरानी के लिए बनाई गई एप्लिकेशन ‘डीएमजीओएमएस‘ का भी सही से उपयोग नहीं कर पाया और 71 करोड़ रुपये की डिमांड और 14 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूल नहीं कर पाया।

इसी तरह एक प्रतिवेदन राज्य की तीन बिजली वितरण कंपनियों-डिस्‍कॉम्‍स द्वारा केन्‍द्र सरकार की दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के कार्यान्वयन पर भी जारी किया गया और इस योजना को लागू करने में पाई गई कमियों को बताया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार ने गांवों में बिजली के कनेक्शन जारी करने के लिए 2014 में यह योजना शुरू की थी परंतु कोई भी डिस्‍कॉम इस योजना के कार्य को तय समय में पूरा नहीं कर पाईं। कैग ने इस योजना के कार्यान्वयन में परियोजना निर्माण एवं निष्पादन, संविदा प्रबंधन, निगरानी एवं गुणवत्ता आश्वासन तंत्र एवं वित्त पोषण तंत्र में पाई गई कमियों को उजागर किया। डिस्‍कॉम्‍स इस योजना का पूरा लाभ राज्‍य की जनता का नहीं दे पाए और इस योजना के अंतर्गत होने वाले फीडर सेपरेशन के काम के लक्ष्‍य को भी पूरा नहीं कर सके।

इसके अनुसार, डिस्कॉम ने गलत तरीके से गांवों को विद्युतीकृत घोषित किया क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित 10,320 विद्यालय नवंबर 2020 तक अविद्युतीकृत थे जिनको इन गांवों को विद्युतीकृत घोषित करने से पहले विद्युत कनेक्‍शन दिये जाने थे।

वहीं ‘शहरी स्थानीय निकायों और नगरीय विकास एवं आवासन विभाग’ पर कैग के प्रतिवेदन में केंद्र सरकार की ‘अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत)’ योजना की लेखा परीक्षा में पाई गई कमियों को उजागर किया।

कैग ने लेखा-परीक्षा में पाया कि इस योजना के अंतर्गत स्वीकृत 3,142 करोड़ रुपये की 93 परियोजनाओं में से मात्र 685.38 करोड़ रुपये की 41 परियोजनाओं को पूरा किया जा सका। 41 में से 30 परियोजनाओं में एक से 37 माह का विलंब हुआ।

राज्‍य की कंपनियों एवं निगमों के वित्तीय प्रदर्शन पर जारी कैग की रिपोर्ट में राजकीय उपक्रमों की वित्तीय स्थिति एवं निष्पादन के अलावा, अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं जैसे कि सीएजी की निरीक्षण भूमिका, राजकीय उपक्रमों में कॉर्पोरेट गवर्नेन्‍स एवं सरकारी कंपनियों में भारतीय लेखांकन मानकों का कार्यान्वयन को भी शामिल किया गया है।

इस प्रतिवेदन में बताया गया है कि वर्ष 2020-21 के दौरान, 41 राजकीय उपक्रमों में से 25 राजकीय उपक्रमों ने लाभ अर्जित किया, जबकि 13 राजकीय उपक्रमों को हानि हुई। इन 41 राजकीय उपक्रमों में गत कई साल से हो रही हानि के कारण राजकीय उपक्रमों के पूँजी निवेश (51,787.33 करोड़ रुपये) के विपरीत भारी हानि (97,441.97 करोड़ रुपये) एकत्र हो गई।

भाषा पृथ्वी कुंज नेत्रपाल

नेत्रपाल

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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