हमीरपुर, 22 फरवरी (भाषा) हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के विभिन्न हिस्सों में गेहूं की फसल पर पीला रतुआ रोग पाया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि कृषि विभाग के एक दल ने मंगलवार को नादौन प्रखंड के पीला रतुआ प्रभावित गांवों का दौरा किया और फसल का सर्वेक्षण किया।
कृषि विभाग में उप-निदेशक अतुल डोगरा ने बताया कि अधिकारियों ने बहल, सधवां, लहार कोटलू, सेरा, जसई, खतरोद, बलदूहक, बड़ा, रंगस, रेल और फास्टे गांवों में किसानों के खेतों का निरीक्षण किया।
उन्होंने कहा कि गांव बहल, सधवां, लहार कोटलू और सेरा में फसल में पीला रतुआ के लक्षण पाए गए। कुछ जगहों पर ये लक्षण शुरूआती चरण में हैं जहां बीमारी का प्रकोप 2 से 3 प्रतिशत है।
पीला रतुआ रोग गेहूं की फसल की पत्तियों और बालियों के आवरण पर पाउडर या धूल की पीली धारियों के रूप में प्रकट होता है। यह पीला पाउडर छूने पर कपड़ों या उंगलियों पर निकल आता है। रोग जन्मजात परिस्थितियों में तेजी से फैल सकता है और फसल के विकास और अंततः उपज को प्रभावित करता है।
पीले रतुआ को जीवित रहने के लिए जीवित हरे पौधों की सामग्री की आवश्यकता होती है।
आम तौर पर, पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों में गेहूं की फसल धारी रतुआ या पीले रतुआ से प्रभावित होती है, जो वर्तमान में पक्कीनिया स्ट्राइफोर्मिस नामक कवक रोगजनक के कारण होता है।
बहल और सधवां गांवों में इस बीमारी का प्रसार 5 से 7 प्रतिशत पाया गया। जिले में मौसम के पूर्वानुमान के आधार पर आने वाले एक-दो सप्ताह में इस रोग के फैलने की संभावना अधिक है, किसानों को सलाह दी जाती है कि वे इस अवधि में समय-समय पर अपने खेतों की निगरानी करते रहें।
उप निदेशक ने बताया कि गेहूं के खेत में इस रोग के लक्षण दिखाई देने पर एक लीटर पानी में एक मिलीलीटर प्रोपिकोनाजोल कवकनाशी का घोल बनाकर प्रभावित क्षेत्र में छिड़काव करें।
उन्होंने कहा कि जिले में प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को 20 लीटर पानी में एक लीटर खट्टी लस्सी घोलकर 10 दिनों के अंतराल पर अपनी गेहूं की फसल पर छिड़कने की सलाह दी गई है।
इसके अलावा अधिक जानकारी के लिए किसान अपने नजदीकी कृषि विभाग कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।
भाषा राजेश राजेश रमण
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