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खाद्य तेल-तिलहन में रहा गिरावट का रुख

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नयी दिल्ली, 18 फरवरी (भाषा) शुक्रवार को शिकागो एक्सचेंज के 1.65 प्रतिशत गिरकर बंद होने के बाद दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में शनिवार को कारोबार में गिरावट का रुख दिखा और अधिकांश तेल तिलहनों के भाव गिरावट के साथ बंद हुए।

बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि विदेशी बाजारों में खाद्यतेलों के भाव टूटने और ब्राजील में सोयाबीन के बंपर उत्पादन की खबर के बाद यहां सरसों तेल तिलहन, सोयाबीन तेल, कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तथा बिनौला तेल के भाव हानि दर्शाते हुए बंद हुए। वहीं दूसरी ओर मूंगफली तेल तिलहन और सोयाबीन तिलहन सहित बाकी तेल तिलहनों के भाव पूर्वस्तर पर बंद हुए।

सूत्रों ने कहा कि मंडियों में नये फसल की आवक बढ़ने के बीच सरसों तेल तिलहन कीमतों में गिरावट रही। उन्होंने कहा कि सूरजमुखी तेल बेहद सस्ता होने के बावजूद बाजार में नहीं खप रहा है जिससे पता चलता है कि हल्के तेलों की ‘सॉफ्ट’ (नरम) तेलों की खपत मुश्किल से हो रही है।

सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2000 में सॉफ्ट तेलों पर आयात शुल्क 45 प्रतिशत था लेकिन खाद्यतेलों के दाम बढ़ने के बाद वर्ष 2007-08 में आयात शुल्क शून्य कर दिया गया। उसके अगले छह-सात साल तक किसी ने भी आयात शुल्क का कोई जिक्र नहीं किया। लेकिन वर्ष 2014-15 में खाद्यतेलों पर आयात शुल्क बढ़ाना शुरु किया गया और अंत में 38.5 प्रतिशत का शुल्क लागू हो गया। इन सब उपायों के बावजूद देश में तिलहन उत्पादन उतना नहीं बढ़ा जितना बढ़ना चाहिये था। इसके साथ ही मवेशी चारे के रूप में उपयोग आने वाले खल का उत्पादन भी नहीं बढ़ पाया।

सूत्रों ने कहा कि जिस अनुपात में खल के दाम में वृद्धि हुई है उतनी तेल कीमतों में नहीं हुई है। सूत्रों के मुताबिक, तेल तिलहन कारोबार में एक कहावत प्रचलित है कि खाद्य तेल के दाम सस्ते होंगे तो खल महंगा होगा क्योंकि तेल व्यापारी, तेल के दाम की गिरावट की कमी को खल के दाम महंगा कर पूरा करते हैं। आज सस्ता आयात बढ़ने से तेल के दाम उतने नहीं बढ़े जितना खल के बढ़े हैं।

सूत्रों ने कहा कि सस्ते आयातित तेलों की वजह से सरसों की आगामी बंपर पैदावार के खपने का खतरा हो सकता है। अगर सरसों की किसी कारणवश खपत नहीं हो पाई तो किसानों का विश्वास हिल जाएगा। देश में सूरजमुखी का उत्पादन पहले ही कम हो चुका है। कुछ लोगों का मानना है कि अगर आयातित तेल सस्ते बने रहे और सरसों के खपने में मुश्किल होने लगे तो सरकार की ओर से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सरसों की खरीद की जा सकती है।

लेकिन हमें याद रखना होगा कि इस साल सरसों की पैदावार बंपर (लगभग 125 लाख टन) होने की उम्मीद है। सरकार अधिक से अधिक 20-25 लाख टन की ही खरीद कर पाएगी, फिर बाकी सरसों का क्या होगा और उसकी खपत कहां होगी? किसान कम दाम पर अपनी फसल न बेचें तो देश के तेल प्रसंस्करण करने वाली तेल मिलों का क्या होगा? इसके अलावा खल कहां से मिलेगा जिसके दाम महंगा होने से पिछले कुछ महीनों में लगातार दूध के दाम बढ़े हैं।

सरकार के सामने स्थितियों को संभालने का एक विकल्प है कि वह सूरजमुखी और सोयाबीन तेल पर अधिकतम अनुमति-योग्य सीमा तक आयात शुल्क बढ़ा दे ताकि देशी तेल तिलहनों की बाजार में खपत हो जाये और किसान निधड़क आगे भी तिलहन उत्पादन बढ़ाने के अपने प्रयास को जारी रख पायें। सरकार ने पहले से ही रेपसीड पर 38.5 प्रतिशत का शुल्क लगाया हुआ है और कम से कम इस सीमा तक तो सोयाबीन, सूरजमुखी तेल पर भी आयात शुल्क लगा दिया जाना चाहिये।

सूत्रों के मुताबिक, कभी खाद्यतेल कीमतों की महंगाई बढ़े तो सरकार, निजी कंपनियों द्वारा आयात करवाकर उस तेल का प्रसंस्करण करने के बाद सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से उपभोक्ताओं विशेषकर कम आयवर्ग के ग्राहकों को खाद्यतेल उपलब्ध करा सकती है।

शनिवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन – 5,835-5,885 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली – 6,775-6,835 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 16,550 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,540-2,805 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 12,150 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 1,950-1,980 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 1,910-2,035 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी – 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 12,350 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 12,080 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 10,600 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 8,900 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 10,700 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,450 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 9,460 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना – 5,450-5,580 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 5,190-5,210 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।

भाषा राजेश राजेश प्रेम

प्रेम

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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