(विजय कुमार सिंह)
नयी दिल्ली, दो फरवरी (भाषा) नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने बृहस्पतिवार को कहा कि एक दिन पहले पेश किए गए बजट में सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें कोई हैरत न होते हुए भी राजकोषीय मजबूती की राह पर चलते हुए पूंजीगत व्यय पर नाटकीय दांव लगाया गया है।
बेरी ने पीटीआई-भाषा के साथ खास बातचीत में वित्त वर्ष 2023-24 के बजट को ‘जिम्मेदार’ बताते हुए कहा कि इसमें सामाजिक क्षेत्र खासकर महिलाओं एवं आदिवासी कल्याण की योजनाओं पर तवज्जो बरकरार रखी गई है।
उन्होंने कहा, ‘‘राजकोषीय सजगता को लेकर प्रधानमंत्री का जोर देना वित्त को राह दिखा रहा है। वित्त मंत्री का मानना है कि भारत के हित राजकोषीय मजबूती के रास्ते पर बने रहने से ही सधेंगे। इस वजह से हैरत में डालने वाली कोई चीज नहीं दिखी।’’
सीतारमण ने बजट में राजकोषीय घाटे का लक्ष्य सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 5.9 प्रतिशत रखने के साथ ही बुनियादी ढांचे पर सार्वजनिक निवेश को 33 प्रतिशत बढ़ाकर 10 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने राजकोषीय घाटे को वर्ष 2025-26 तक कम कर 4.5 प्रतिशत पर लाने की मंशा भी जताई।
इस संदर्भ में नीति आयोग उपाध्यक्ष ने कहा, ‘‘पूंजीगत व्यय पर केंद्र सरकार का नाटकीय दांव और राज्यों को पूंजीगत व्यय समर्थन रेवड़ियां बांटने और लोकलुभावन कदमों के ठीक उलट है।’’
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस बजट में नारी शक्ति और टिकाऊपन दो अन्य ऐसे विषयवस्तु हैं जो एक-दूसरे को काटते हैं।
उन्होंने कहा कि वैश्विक मंदी की गहराती आशंकाओं के बीच अर्थव्यवस्था के लिए प्रतिकूल स्थितियां मौजूद हैं लेकिन यह बजट उससे निपटने की कोशिश है।
हालांकि, बेरी ने कहा कि वैश्विक आर्थिक वृद्धि के नरम रहने और निर्यात के तेजी न पकड़ पाने की स्थिति में घरेलू मांग को तेज करने के प्रयासों की जरूरत पड़ेगी।
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