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Monday, 12 January, 2026
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खाद्य तेल-तिलहनों में रहा मिला-जुला रुख

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नयी दिल्ली, 18 जनवरी (भाषा) विदेशी बाजारों में तेजी के रुख के बावजूद दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में बुधवार को सरसों, मूंगफली, बिनौला तेल जैसे देशी तेल-तिलहनों के भाव में गिरावट आई जबकि मलेशिया एक्सचेंज के मजबूत होने से कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल कीमतों में मामूली तेजी देखने को मिली। बाकी तेल-तिलहनों के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे।

बाजार सूत्रों ने कहा कि मलेशिया एक्सचेंज में 1.6 प्रतिशत की तेजी थी जबकि शिकॉगो एक्सचेंज भी मजबूत चल रहा है।

सूत्रों ने कहा कि देश में विदेश के सस्ते आयातित तेलों का भारी भंडार है और सरसों एवं बिनौला जैसे तेल बिल्कुल भी खप नहीं रहे। शुल्कमुक्त आयातित तेल से देश को कोई फायदा नहीं हो रहा और उपभोक्ताओं को शुल्कमुक्त आयात वाले सूरजमुखी और सोयाबीन तेल थोक में प्रीमियम अदा कर खरीदना पड़ रहा है। दूसरी ओर शुल्कमुक्त आयात की छूट देने से सरकार को भी राजस्व की हानि हो रही है और इससे खाद्य तेल अपेक्षा के अनुरूप सस्ता भी नहीं हो पा रहा है।

सूत्रों ने कहा कि सूरजमुखी तेल के भी शुल्कमुक्त आयात को पूरी तरह से रोक देना चाहिये क्योंकि थोक में यह तेल 15-18 रुपये के प्रीमियम के साथ ऊंचे दाम पर बिक रहा है जबकि सोयाबीन पर आठ रुपये किलो की दर से प्रीमियम वसूला जा रहा है।

सूत्रों ने कहा कि जिस तरह से सरकार ने रैपसीड तेल पर 38.5 प्रतिशत का आयात शुल्क लगा रखा है, कम से इसी के बराबर आयातित तेलों पर और विशेष तौर पर नरम तेलों (सॉफ्ट आयल) पर आयात शुल्क लगाने की जरूरत है, नहीं तो देशी तेल-तिलहन खपेंगे नहीं। इसका तिलहन की आगे होने वाली बिजाई पर भी असर होगा।

सूत्रों ने कहा कि मौजूदा वक्त बहुत कुछ आगे के लिए भी महत्वपूर्ण है कि हम मौजूदा स्थिति से कैसे निपटें कि किसानों का तिलहन उत्पादन बढ़ाने का विश्वास और मजबूत हो।

सूत्रों ने कहा कि खल के दाम निरंतर महंगे हो रहे हैं और इसके कारण किसानों की लागत में लगभग 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। लागत बढ़ने की वजह से किसानों को दूध के पूरे दाम निकालने में दिक्कत आ रही है।

सूत्रों ने कहा कि सरकारी पोर्टल पर तेल कंपनियों के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) की सूचना नियमित तौर पर डालने से खाद्य तेलों की महंगाई कम होगी और अनुमानत: खाद्य तेल 30-70 रुपये लीटर तक सस्ते होंगे क्योंकि इससे छोटे पैकरों और तेल कंपनियों की मनमानी पर रोक लगेगी।

सूत्रों ने कहा कि सरकार को ये कदम तत्काल उठाने की जरूरत है और देर होने से स्थिति बिगड़ जायेगी।

बुधवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन – 6,620-6,670 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली – 6,605-6,665 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 15,620 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,465-2,730 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 13,140 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 1,195-2,125 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,055-2,180 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी – 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 13,050 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 12,900 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 11,450 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 8,450 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 11,600 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,000 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 9,100 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना – 5,530-5,630 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 5,275-5,295 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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