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Monday, 12 January, 2026
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खेती-बाड़ी में ड्रोन को बढ़ावा देने के लिए आयोटेकवर्ल्ड का महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ से करार

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नयी दिल्ली, 18 जनवरी (भाषा) देश में खेती-बाड़ी में उपयोग को लेकर ड्रोन बनाने वाली आयोटेकवर्ल्ड एविगेशन ने महाराष्ट्र के महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ के साथ एक समझौता किया है। इस समझौते का मकसद खेती के काम में ड्रोन के इस्तेमाल को बढ़ावा देकर कृषि उत्पादकता बढ़ाना है।

कंपनी ने बुधवार को बयान में कहा कि दोनों पक्षों की कृषि ड्रोन के लिए पायलट प्रशिक्षण संगठन बनाने की भी योजना है।

बयान के अनुसार आयोटेकवर्ल्ड एविगेशन ने महाराष्ट्र के राहुरी स्थित महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ के साथ एक समझौता किया है। इस समझौते का मकसद विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक साथ मिलकर काम करना तथा खेती के काम में ड्रोन के इस्तेमाल को बढ़ावा देकर कृषि उत्पादकता बढ़ाना है।

समझौता ज्ञापन पर विद्यापीठ की तरफ से विश्वविद्यालय के डीन (कृषि विभाग) डॉ. पी एन रसल और आयोटेकवर्ल्ड एविगेशन के सह-संस्थापक और निदेशक अनूप कुमार उपाध्याय ने हस्ताक्षर किये।

आयोटेकवर्ल्ड के निदेशक उपाध्याय ने कहा, ‘‘महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ और उनकी कंपनी आधुनिक और टिकाऊ स्मार्ट कृषि प्रणाली बनाने के लिए संयुक्त शैक्षणिक तथा अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं पर भी काम करेंगी। दोनों पक्ष ड्रोन का उपयोग कर फसल छिड़काव के लिए मानक परिचालन प्रक्रिया (एसओपी) को भी विकसित करेंगे।’’

उपाध्याय ने कहा कि देश में ड्रोन पायलटों की कमी को दूर करने के उद्देश्य से दोनों संस्थान विश्वविद्यालय में ‘रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन’ (आरपीटीओ) की स्थापना भी करेंगे।

कंपनी की एक विज्ञप्ति के अनुसार, सरकार का अनुमान है कि भारत को अगले साल तक कम से कम एक लाख ड्रोन पायलटों की जरूरत होगी।

आयोटेकवर्ल्ड के निदेशक दीपक उपाध्याय ने कहा, ‘‘ड्रोन की उपयोग से न केवल समय की, बल्कि उर्वरकों, कीटनाशकों एवं पानी की भी बचत होती है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलती है। एक किसान उर्वरकों के प्रयोग और कीटनाशकों के छिड़काव के लिए ड्रोन का उपयोग करके काफी बचत कर सकता है।’’

भाषा राजेश रमण अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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