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Thursday, 15 January, 2026
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भारत में विदेशी विश्वविद्यालयों के प्रवेश की अनुमति देने के लिए मसौदा मानदंडों का शिक्षक संघ ने किया विरोध

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नयी दिल्ली, नौ जनवरी (भाषा) देश में विदेशी विश्वविद्यालयों को ‘कैंपस’ स्थापित करने की अनुमति देने वाले केंद्र के नए मसौदा नियमन का विरोध करते हुए यहां शिक्षक संघों ने कहा है कि इससे शैक्षणिक संस्थानों को व्यावसायिक उद्यमों में परिवर्तित किया जाएगा।

संघों ने छात्रों, शिक्षकों, माता-पिता और नागरिकों से हमारी संप्रभुता को कमजोर करने का विरोध करने और इसे हराने’ का आग्रह किया है।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने पिछले सप्ताह ‘‘भारत में विदेशी उच्च शिक्षण संस्थानों के परिसरों की स्थापना और संचालन’’ के लिए मसौदा नियमन की घोषणा की थी।

मसौदा नियमन के मुताबिक विदेशी विश्वविद्यालय पहली बार भारत में अपना कैंपस स्थापित कर सकेंगे। उन्हें प्रवेश प्रक्रिया, शुल्क संरचना पर निर्णय करने और धन को अपने देश वापस भेजने की भी अनुमति होगी।

‘आप’ की शिक्षक शाखा, एकेडेमिक फॉर एक्शन एंड डेवलपमेंट दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन (एएडीटीए) ने एक बयान में आरोप लगाया कि यूजीसी ने छात्रों के लिए नहीं बल्कि कोचिंग संस्थानों के कल्याण के लिए विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए दरवाजे खोले हैं।

एएडीटीए ने एक बयान में कहा, “सामाजिक न्याय की चिंताओं को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है जो हमारे संदर्भ में बहुत महत्वपूर्ण है जहां उच्च शिक्षा सामाजिक परिवर्तन के लिए बहुत प्रभावी साधन है।”

संघ ने सवाल किया कि अगर कोई विदेशी संस्थान अपने संचालन में विफल रहता है, तो यूजीसी इन संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों की देखभाल कैसे करेगा।

इस बीच, डेमोक्रेटिक टीचर्स फेडरेशन (डीटीएफ) ने एक बयान में जोर देकर कहा कि इस कदम का विरोध किया जाना चाहिए क्योंकि ऐसी किसी भी नीति का अगला तार्किक कदम उच्च शिक्षा में स्पष्ट लाभ कमाने की अनुमति देना होगा।

भाषा जितेंद्र रंजन

रंजन

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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