नयी दिल्ली, 28 दिसंबर (भाषा) वैश्विक स्तर पर प्राकृतिक गैस की कीमतों में बढ़ोतरी और इलेक्ट्रिक वाहनों का चलन बढ़ने की धीमी रफ्तार के बीच भारत में ऑटो एलपीजी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उद्योग निकाय आईएसी ने बुधवार को कहा कि ईंधन मिश्रण और कम कार्बन उत्सर्जन वाले ऊर्जा साधनों में ऑटो एलपीजी योगदान दे सकती है।
भारत आने वाले वर्षों में 5,000 अरब अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है और ऐसे में ऊर्जा या ईंधन सुरक्षा अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
ऑटो एलपीजी पेट्रोल और डीजल के बाद दुनिया में तीसरा सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला परिवहन ईंधन है। वैश्विक तापवृद्धि में इसका योगदान शून्य है, जबकि भारत में 60 प्रतिशत से अधिक बिजली अब भी कोयले से तैयार की जाती है।
आईएसी ने बयान में कहा कि सरकार ने ऊर्जा उपयोग में विविधता लाने के लिए कई उपाय किए हैं, लेकिन कार्बन आधारित पेट्रोल और डीजल के विकल्प के रूप में ईवी प्रणाली पर अधिक जोर दिया गया है।
आईएसी ने सवाल किया, ‘‘क्या सरकार को आवागमन के लिए अन्य वैकल्पिक ईंधन पर विचार नहीं करना चाहिए, जैसे कि ऑटो एलपीजी?’’
इंडियन ऑटो एलपीजी कोलेशन (आईएसी) के महानिदेशक सुयश गुप्ता ने कहा, ‘‘ऑटो एलपीजी जैसे अन्य वैकल्पिक ईंधन विकल्पों को स्वीकार नहीं करना चिंताजनक है, जो स्वच्छ गतिशीलता के लक्ष्य को ईवी के मुकाबले अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा सकता है।’’
भाषा पाण्डेय अजय
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