नयी दिल्ली, 15 दिसंबर (भाषा) मेडेन फार्मा की खांसी (कफ) की दवा के नमूने गुणवत्ता पर खरे पाए गए हैं। सरकार ने बृहस्पतिवार को संसद में यह जानकारी दी।
इससे कुछ सप्ताह पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चेतावनी देते हुए कहा था कि इस बात की आशंका है कि कंपनी के कफ सिरप को गाम्बिया में बच्चों की मौत से जोड़ा जा सकता है।
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने राज्य औषधि नियंत्रक, हरियाणा के सहयोग से सोनीपत के कुंडली में मेडेन फार्मास्युटिकल्स की एक संयुक्त जांच की थी। जांच का मकसद उन तथ्यों का पता लगाना था, जिनके कारण पश्चिम अफ्रीकी देश में कथित तौर पर 66 बच्चों की मौत हुई थी।
रसायन और उर्वरक राज्यमंत्री भगवंत खुबा ने 13 दिसंबर को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में कहा कि जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि हरियाणा के राज्य दवा नियंत्रक ने कंपनी को केवल निर्यात के लिए चार दवाओं के निर्माण का लाइसेंस दिया था। इन दवाओं की भारत में बिक्री या विपणन नहीं किया गया।
मंत्री ने कहा, ‘‘इन दवाओं के नमूने लिए गए और जांच दल ने परीक्षण और विश्लेषण के लिए उन्हें चंडीगढ़ स्थित क्षेत्रीय औषधि परीक्षण प्रयोगशाला में भेजा। सरकारी विश्लेषक की रिपोर्ट के अनुसार नमूनों को मानक गुणवत्ता वाला पाया गया।’’
भाषा पाण्डेय अजय
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