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Thursday, 15 January, 2026
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उत्तराखंड के मरचूला में मारी गयी बाघिन के मामले में वन आरक्षी के खिलाफ मुकदमा

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ऋषिकेश, 17 नवंबर (भाषा) उत्तराखंड के कॉर्बेट बाघ अभयारण्य में कालागढ़ वन प्रभाग के तहत मरचूला बाजार में घूम रही बाघिन की मौत उसकी दाई जांघ में छर्रे लगने से हुए रक्तस्राव के कारण होने की पुष्टि के बाद गोली चलाने वाले वन आरक्षी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है ।

उत्तराखंड के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक समीर सिन्हा ने बृहस्पतिवार को बताया कि वन आरक्षी धीरज सिंह पर वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

उन्होंने बताया कि आरोपी को फिलहाल कालागढ़ वन प्रभाग के उप प्रभाग सोना नदी की सेन्धी खाल स्थित पलेन रेंज से सम्बद्ध किया गया है ।

वन अधिकारियों के अनुसार, करीब 10-11 साल की बाघिन सोमवार देर रात मरचूला में आबादी वाले और बाजार क्षेत्र में घूम रही थी और वनकर्मी उस पर लगातार नजर रखे हुए थे । इस दौरान उसने कई बार वनकर्मियों एवं वहां मौजूद लोगों पर हमला भी किया ।

उन्होंने बताया कि पहले तो वन दारोगा मोहन चन्द भट्ट ने 312 बोर की सरकारी राइफल से हवा में गोलियां चलाकर बाघिन को खदेड़ने की कोशिश की लेकिन जब बाघिन रिहायशी इलाके में घरों में घुसने लगी, तो वन आरक्षी धीरज ने जन सुरक्षा को देखते हुए नीचे जमीन की ओर गोलीबारी की, जिसके कारण छर्रे बाघिन की दायीं जांघ में लग गए ।

बाघिन के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी उसके यकृत और गुर्दे के क्षतिग्रस्त होने का जिक्र है। उसके यकृत में सेही के कांटे भी मिले हैं जबकि उसका पेट बिल्कुल खाली था।

रिजर्व के निदेशक धीरज पांडेय ने बताया कि बाघिन के कैनाइन (मांस खाने में मदद करने वाले लंबे) दांत बिल्कुल घिस गए थे और संभवत: इसी वजह से वह अपने प्राकृतिक आवास में शिकार नहीं कर पा रही होगी और तभी उसने आबादी की तरफ रुख किया होगा ।

भाषा सं दीप्ति दीप्ति सिम्मी

सिम्मी

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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