आइजोल, 17 नवंबर (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दक्षिणी मिजोरम के हनहथियाल जिले में पत्थर की एक खदान ढहने के हादसे का स्वत: संज्ञान लिया और संबंधित अधिकारियों को 28 नवंबर को उसके समक्ष पेश होने का निर्देश दिया है।
एनजीटी द्वारा बुधवार को जारी एक नोटिस के अनुसार, मिजोरम प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव और राज्य के आपदा प्रबंधन निदेशालय के निदेशक सहित सात अधिकारियों को दिल्ली में अधिकरण के फरीदकोट हाउस कार्यालय में पेश होने को कहा गया है।
जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) विनीत कुमार ने कहा कि मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए हनहथियाल थाने में इस संबंध में एक मामला दर्ज किया गया है।
इस बीच, एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को बताया कि हनहथियाल जिले में ढही पत्थर की खदान के मलबे से एक और शव बरामद होने के बाद हादसे में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 11 हो गई।
हनहथियाल के उपायुक्त (डीसी) आर. लालरेमसंगा ने बताया कि लुंगलेई जिले के 25 वर्षीय एक व्यक्ति का शव बुधवार सुबह मलबे के नीचे बरामद हुआ।
हनहथियाल जिले के मौदढ़ गांव में सोमवार को हुए इस हादसे के बाद 12 लोगों के मलबे में दबने की सूचना मिली थी। इनमे से 11 लोगों का पता चल चुका है।
हनहथियाल जिला प्रशासन की ओर से जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, जान गंवाने वालों में से पांच लोग पश्चिम बंगाल, झारखंड तथा असम से दो-दो और अन्य दो में से एक त्रिपुरा और एक मिजोरम का निवासी है।
उपायुक्त लालरेमसंगा ने बताया कि जान गंवाने वाले लोगों के शवों को उनके गृह राज्य भेज दिया गया है।
उन्होंने बताया कि असम के एक व्यक्ति का अभी तक पता नहीं चल पाया है और उसकी तलाश जारी है।
उप उपायुक्त लालरामदिंतलुआंगा ने बताया कि एक 49 वर्षीय व्यक्ति जिसे उसके आधार कार्ड पर मौजूद जानकारी के आधार पर मिजोरम के लुंगलेई जिले का निवासी बताया जा रहा था वह त्रिपुरा के ब्रू रिलीफ कैम्प से नाता रखता है।
प्रधामनंत्री नरेंद्र मोदी ने जान गंवाने वाले लोगों के परिजन को दो-दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की बुधवार को घोषणा की थी। घायल हुए लोगों को 50-50 हजार रुपये दिए जाएंगे।
केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय और मिजोरम के भूविज्ञान एवं खनन विभाग के अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लेने के लिए बुधवार को घटनास्थल का दौरा किया था।
हनहथियाल के पुलिस अधीक्षक ने पहले बताया था कि 14 नवंबर दोपहर को जब पत्थर की खदान में भूस्खलन हुआ तब वहां कुल 13 मजदूर काम कर रहे थे। इनमें से केवल एक मजदूर बाहर निकल पाने में कामयाब रहा था। खदान एबीसीआई इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड की है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया कि मजदूरों ने काफी गहरी खुदाई कर दी थी, जिससे पत्थर की खदान ढह गई।
लालरेमसंगा ने बताया कि हादसे में खुदाई करने वाली पांच मशीनें, एक स्टोन क्रशर और एक ड्रिलिंग मशीन भी मलबे में दब गई।
उन्होंने बताया कि भूस्खलन से करीब 5,000 वर्ग मीटर क्षेत्र प्रभावित हुआ है। भाषा निहारिका नरेश
नरेश
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