मुंबई, सात नवंबर (भाषा) सूक्ष्म-वित्त मुहैया कराने वाली कंपनियों को कोविड-19 महामारी के व्यापक असर वाले दो वर्षों में 10 प्रतिशत तक का ऋण का नुकसान झेलना पड़ा था, लेकिन अब हालात सुधर रहे हैं। इस उद्योग के शीर्ष निकाय ने सोमवार को यह अनुमान जताया। ऋण नुकसान से तात्पर्य कर्ज की वापसी नहीं होना है।
माइक्रोफाइनेंस इंस्टिट्यूशंस नेटवर्क के मुख्य कार्यकारी आलोक मिश्रा ने संवाददाताओं से कहा कि सूक्ष्म इकाइयों का संचालन करने वाले उद्यमियों को बिना गारंटी वाला कर्ज मुहैया कराने वाले सूक्ष्म-वित्त संस्थानों को वित्त वर्ष 2020-21 और 2021-22 में पांच-दस प्रतिशत का ऋण नुकसान झेलना पड़ा था।
उन्होंने कहा कि महामारी के कारण वित्तीय परिचालन और कर्जदारों की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं होने से ऐसा हुआ। हालांकि, कोविड-19 महामारी का सूक्ष्म ऋण पर पड़ने वाला असर संस्थानों के स्तर पर अलग-अलग हो सकता है।
मिश्रा ने कहा कि महामारी की कई लहरों से गुजरने के बाद अब कर्ज फंसने की स्थितियों में सुधार होने लगा है। उन्होंने कहा कि 30 दिन से अधिक बकाया अवधि वाले कर्जों का अनुपात जुलाई में घटकर 10-11 प्रतिशत पर आ गया जबकि महामारी के चरम पर रहते समय यह अनुपात 22 प्रतिशत तक पहुंच गया था।
उन्होंने एक अध्ययन रिपोर्ट का हवाला देते हुए उम्मीद जताई कि वित्त वर्ष 2024-25 के अंत तक सूक्ष्म-वित्त का बाजार 17 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। वित्त वर्ष 2021-22 के अंत में यह आकार 2.85 लाख करोड़ रुपये था।
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प्रेम अजय
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