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Saturday, 28 March, 2026
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भारत के आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता को चुनौती देने वालों के खिलाफ युद्ध तेज करना है: मोदी

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नयी दिल्ली, 18 जुलाई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के आत्मविश्वास, उसकी आत्मनिर्भरता और देश के हितों को चुनौती देने वाली अंदरूनी या बाहरी ताकतों के खिलाफ युद्ध तेज करने का आह्वान करते हुए सोमवार को कहा कि ऐसी हर कोशिश को नाकाम करना जरूरी है।

राजधानी स्थित आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में नौसेना नवाचार और स्वदेशीकरण संगठन (एनआईआईओ) की ओर से आयोजित सेमिनार ‘‘स्वावलंबन’’ को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि जैसे-जैसे भारत वैश्विक मंच पर खुद को स्थापित कर रहा है, वैसे-वैसे दुष्प्रचार के माध्यम से लगातार हमले हो रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘सूचना को भी हथियार बना दिया गया है। खुद पर भरोसा रखते हुए भारत के हितों को हानि पहुंचाने वाली ताकतें चाहे देश में हों या फिर विदेश में, उनकी हर कोशिश को नाकाम करना है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘देश की रक्षा के लिए हमें एक और अहम पक्ष पर ध्यान देना चाहिए। हमें भारत के आत्मविश्वास को, हमारी आत्मनिर्भरता को चुनौती देने वाले ताकतों के विरुद्ध युद्ध तेज करना है।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र की रक्षा अब सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि बहुत व्यापक है इसलिए हर नागरिक को इसके लिए जागरूक करना भी उतना ही आवश्यक है।

उन्होंने कहा, ‘‘जैसे आत्मनिर्भर भारत के लिए ‘होल ऑफ द गवर्नमेंट एप्रोच’ के साथ आगे बढ़ रहे हैं, वैसे ही राष्ट्र रक्षा के लिए भी ‘होल ऑफ द नेशन अप्रोच’ समय की मांग है। भारत के कोटि-कोटि जनों की यही सामूहिक राष्ट्र चेतना ही सुरक्षा और समृद्धि का सशक्त आधार है।’’

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि रक्षा क्षेत्र से जुड़ी हर छोटी-छोटी जरूरत के लिए विदेशों पर निर्भरता देश के स्वाभिमान, आर्थिक नुकसान के साथ ही रणनीतिक रूप से बहुत ज्यादा गंभीर खतरा है।

भावी खतरों के प्रति आगाह करते हुए उन्होंने कहा कि अब राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे भी व्यापक हो गए हैं और युद्ध के तौर-तरीके भी बदल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पहले सिर्फ भूमि, समुद्र और आकाश तक ही रक्षा की कल्पना की जाती थी, लेकिन अब इसका दायरा अंतरिक्ष, साइबर स्पेस और आर्थिक व सामाजिक स्पेस की तरफ बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि अब आमने-सामने की लड़ाई से अधिक, लड़ाई अदृश्य हो रही है और अधिक घातक हो रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘अब हम अपनी रक्षा की नीति और रणनीति सिर्फ अपने अतीत को ध्यान में रखते हुए नहीं बना सकते। अब हमें भावी चुनौतियों का अनुमान लगाते हुए ही आगे कदम बढ़ाने हैं।’’

मोदी ने कहा, ‘‘इस स्थिति से देश को बाहर निकालने के लिए 2014 के बाद हमने मिशन मोड पर काम शुरू किया है। बीते दशकों के अनुभवों से सीखते हुए आज हम नए डिफेंस इकोसिस्टम का विकास कर रहे हैं।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते 8 वर्षों में केंद्र सरकार ने न सिर्फ रक्षा का बजट बढ़ाया है बल्कि ये बजट देश में ही रक्षा निर्माण इकोसिस्टम के विकास में भी काम आए, यह भी सुनिश्चित किया है।

उन्होंने कहा कि रक्षा उपकरणों की खरीद के लिए तय बजट का बहुत बड़ा हिस्सा आज भारतीय कंपनियों से खरीद में ही लग रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘बीते चार-पांच सालों में हमारा रक्षा आयात लगभग 21 प्रतिशत कम हुआ है। आज हम सबसे बड़े रक्षा आयातक के बजाय एक बड़े निर्यातक की तरफ तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि देशवासियों को भारत में निर्मित हर चीज के प्रति गर्व करना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले आठ वर्षों में देश का रक्षा निर्यात सात गुणा बढ़ा है और कुछ समय पहले ही 13 हज़ार करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात किया गया और इसमें भी 70 प्रतिशत हिस्सेदारी निजी क्षेत्र की रही।

उन्होंने समंदर से सटी तटीय सीमाओं को देश की आर्थिक आत्मनिर्भरता का बहुत बड़ा संरक्षक और संवर्धक करार दिया औेर कहा कि इसलिए भारतीय नौसेना की भूमिका निरंतर बढ़ती जा रही है।

उन्होंने कहा कि इसलिए नौसेना के साथ ही देश की बढ़ती जरूरतों के लिए भी नौसेना का स्वावलंबी होना बहुत आवश्यक है।

प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध में हुए विनाश का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उस वक्त अनेक प्रकार के संकटों में दुनिया के बड़े-बड़े देश फंसे हुए थे लेकिन उस संकट को भी आपदा को अवसर में पलटने का उन्होंने प्रयास किया।

उन्होंने कहा कि इन देशों ने आयुध के निर्माण के अंदर और दुनिया के बड़े बाजार को कब्जे में करने की दिशा में लड़ाई में से वो रास्ता खोजा और स्‍वंय रक्षा क्षेत्र में एक बहुत बड़े निर्माणकर्ता व बहुत बड़े आपूर्तिकर्ता बन गए।

उन्होंने कहा, ‘‘जैसे प्रथम विश्व युद्ध और द्वितीय विश्व युद्ध में से दुनिया के उन देशों ने बहुत बड़ी शस्त्र शक्ति बनने की दिशा में रास्ता खोज लिया, भारत ने इस कोरोना कालखंड में इसी बुद्धिमता से, वैज्ञानिक धरा पर वैक्‍सीन खोजना हो, बाकी एक्‍यूपमेंट बनाना हो, हर चीज में पहले कभी नहीं हुआ, वो सारे काम कर दिये।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज़ादी के बाद के पहले डेढ़ दशक में भारत ने नये आयुध कारखाने तो बनाए नहीं, बल्कि पुराने कारखाने भी अपनी क्षमताएं खोते गए।

उन्होंने कहा कि 1962 के युद्ध के बाद मजबूरी में नीतियों में कुछ बदलाव हुआ और अपनी आयुध फैक्ट्रियों को बढ़ाने पर काम शुरू हुआ लेकिन इसमें भी शोध, नवोन्मेष और विकास पर बल नहीं दिया गया।

उन्होंने कहा कि इसका परिणाम ये हुआ कि कभी दुनिया की अग्रणी सैन्य ताकत रही भारतीय सेना को राइफल जैसे सामान्य अस्त्र तक के लिए विदेशों पर निर्भर रहना पड़ा और फिर यह एक आदत बन गई।

इस सम्मेलन का उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए भारतीय उद्योग और शिक्षा जगत को जोड़ना है।

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर भारतीय नौसेना में स्वदेशी प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर केंद्रित ‘स्प्रिंट चैलेंजेज’ नामक पहल का सोमवार को अनावरण भी किया।

उन्होंने आयातित वस्तुओं के प्रति आकर्षण की मानसिकता में बदलाव की जरूरत पर बल देते हुए कहा, ‘‘ नवोन्मेष बहुत महत्वपूर्ण है । आयातित वस्तुएं नवोन्मेष का स्रोत नहीं हो सकती हैं। ’’

रक्षा नवोन्मेष संगठन (डीआईओ) के सहयोग से एनआईआईओ का लक्ष्य आजादी के अमृत महोत्सव पर भारतीय नौसेना में कम से कम 75 नयी स्वदेशी प्रौद्योगिकियों/ उत्पादों को शामिल करना है। इस परस्पर सहयोगकारी परियोजना का नाम स्प्रिंट रखा गया है।

भाषा ब्रजेन्द्र

ब्रजेन्द्र नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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