नयी दिल्ली, 14 जुलाई (भाषा) गोवा पूरे देश में राज्य के इतिहास के अनछुये पहलुओं को लोकप्रिय बनाने के लिए हर साल 15 जुलाई को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मुखिया शहीद दिवस मनाएगा, जो पुर्तगाली शासन के खिलाफ पहला विद्रोह है।
गोवा के स्थानीय आयुक्त संजीव आहूजा ने पीटीआई-भाषा को बताया कि केंद्रीय मंत्री तथा उत्तरी गोवा के सांसद श्रीपद येसो नाइक स्वतंत्रता सेनानियों और गोवा सरकार के अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे, जो यहां राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि देंगे।
गोवा के इतिहास में ‘मुखिया शहीद दिवस’ एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है । 15 जुलाई 1583 को दक्षिण गोवा के कंकोलिम में ग्राम प्रमुखों ने पुर्तगाल शासन के खिलाफ विद्रोह कर दिया तथा पांच रोमन कैथोलिक पादरियों तथा 14 स्थानीय लोगों को मार डाला था । ये पांचों रोमन कैथोलिक पादरी यहां जबरन धर्म परिवर्तन करा कर लोगों को इसाई बनाने के लिये आये थे ।
स्थानीय पुर्तगाल छावनी ने इसका बदला लेते हुये विद्रोह में शामिल 15 मुखियों को फांसी पर लटका दिया । इनमें से एक वहां से भागने में कामयाब रहा और पुर्तगालियों की क्रूरता की कहानी बताने के लिए जीवित रहा।
पुर्तगालियों ने 16 मुखियों को शांति वार्ता के लिए असोलना के किले में निहत्था आमंत्रित किया था । उनके आने पर भारी दरवाजे बंद कर दिये गये और इसके बाद उन पर हमला किया गया था।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 15 मुखियों की हत्या करने के बाद पुर्तगालियों ने एक कनकोलिम में बने मंदिरों को तोड़ा और भूमि बंटवारे की पारंपरिक प्रणाली और ग्राम संस्था की व्यवस्था को नष्ट कर दिया।
बाद में ग्रामीणों ने उन मुखियों को कनकोलिम का वास्तविक शहीद मानते हुये उनकी याद में एक स्मारक का निर्माण करवाया था ।
भाषा रंजन माधव
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