भद्रवाह (जम्मू कश्मीर),28 जून (भाषा) जम्मू कश्मीर के भद्रवाह में घुमंतू जनजाति परिवार के दस लोग घने जंगलों के बीच एक बड़ी चट्टान के नीचे रहने को मजबूर हैं। ये परिवार पिछले माह अपने मवेशियों के लिए चारे की तलाश में निकला था।
परिवार जब फुकलान वन में पहुंचा तो उसने पाया कि जाई और गुलदान्दा के ऊंचाई वाले इलाकों में रहने वाले कुछ अन्य परिवारों के घरों की तरह उनका कच्चा घर जल गया है। परिवार खराब मौसम से और जंगली जानवरों से बचने के लिए सरकार से मदद मिलने की आस लगा रहा है।
परिवार के मुखिया फिरोज दीन ने बताया कि वह खराब मौसम में भद्रवाह के फुकलान धार इलाके में अपने परिवार के साथ रह रहा है। उसने कहा कि इस स्थान पर जंगली जानवरों का खतरा है, साथ ही उस चट्टान के गिरने का भी खतरा है जिसके नीचे उसके परिवार ने पनाह ले रखी है।
फिरोज ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा,‘‘ मेरी उम्र 96वर्ष है और पूरी उम्र मैंने आत्मसम्मान और गरिमा के साथ जीवन जीने की कोशिश की है। लेकिन अब मेरी चिंता यह है कि अगर मेरी मौत हो जाती है तो मेरा परिवार इन परिस्थितियों में कैसे जी पाएगा।’’
उन्होंने कहा,‘‘ मैं केवल इतना चाहता हूं कि मेरे परिवार को टैंट में रहने के लिए मिल जाए,मेरी पत्नी बीमार है और खराब मौसम के हालात में इस तरह से रहना बेहद मुश्किल है।’’
इस बारे में पूछे जाने पर भद्रवाह के अतिरिक्त उपायुक्त दिल मीर चौधरी ने आश्वासन दिया कि प्रशासन उन्हें तत्काल सहायता प्रदान करेगा और उनके कच्चे घरों के रहस्यमय तरीके से जलने की घटनाओं की भी जांच करेगा।
भद्रवाह के संभागीय वन अधिकारी चंद्र शेखर ने भी प्रभावित परिवारों को मदद का आश्वासन दिया और कहा कि उनके स्थान के आसपास गिरे हुए पेड़ों की लकड़ियां उन्हें दी जाएंगी।
भाषा शोभना नरेश
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