तिरुवनंतपुरम, 28 जून (भाषा) केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने मंगलवार को सोने की तस्करी मामले में अपने ऊपर लगे आरोपों को ‘‘राजनीति से प्रेरित’’ करार दिया और आरोप लगाया कि इस मुद्दे को फिर से उठाने में कांग्रेस तथा भाजपा के बीच सांठगांठ है।
कांग्रेस विधायक शफी परम्बिल द्वारा लाए गए स्थगन प्रस्ताव पर राज्य विधानसभा में अपने लगभग एक घंटे के जवाब में विजयन ने आरोप लगाया कि राजनयिक सामान के माध्यम से सोने की तस्करी में मुख्य आरोपी स्वप्ना सुरेश को आरएसएस समर्थित संगठन का समर्थन प्राप्त था और कांग्रेस को मामले में कथित संघ परिवार संबंध का पता लगाने में कोई दिलचस्पी नहीं है।
तीन घंटे की लंबी चर्चा के बाद, सदन ने स्थगन प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिसको लेकर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया। विपक्ष ने दावा किया कि मुख्यमंत्री ने अपने जवाब में कई बार संघ परिवार और भाजपा का उल्लेख किया, लेकिन उन्होंने उनके सवालों का जवाब नहीं दिया, जिसमें यह भी शामिल है कि क्या वह मामले में सीबीआई जांच के लिए तैयार हैं।
मुख्यमंत्री ने अपने जवाब में कहा कि मामले के संबंध में उन पर आरोप 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले 2020 में लगाए गए थे और तीन प्रमुख केंद्रीय एजेंसियों की कड़ी जांच के बावजूद, उनके खिलाफ या उनकी सरकार के खिलाफ कुछ भी नहीं निकला।
उन्होंने दावा किया कि इसके बाद, इस साल फिर से इस मुद्दे को एक महिला ने उठाया, जो न केवल मामले की मुख्य आरोपी है, बल्कि आरएसएस से जुड़े एक संगठन द्वारा समर्थित भी है। उन्होंने कहा कि इसलिए, ऐसी स्थिति में उन आरोपों की जांच आवश्यक है जो सरकारी नेतृत्व और अन्य प्रमुख व्यक्तियों पर संदेह उत्पन्न करते हैं। उन्होंने कहा कि एक पारदर्शी जांच की जाएगी और विपक्ष को इसके बारे में आशंकित होने का कोई कारण नहीं है।
विजयन ने आरोप लगाया कि आरोपों का ‘राजनीतिक लाभ के अवसर’ के रूप में उपयोग करके ‘कांग्रेस और भाजपा दोनों एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं।’’
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘वे वहां धुएं की उपस्थिति स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं, जहां आग नहीं है।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सदन में भाजपा के प्रतिनिधित्व की कमी को पूरा करने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह इस तथ्य से स्पष्ट है कि कांग्रेस यह सवाल नहीं पूछ रही कि सुरेश को नौकरी, कार, सुरक्षा के साथ-साथ आरएसएस से जुड़े एक संगठन द्वारा कानूनी मदद क्यों दी जा रही है। उन्होंने दलील दी कि इस तरह के सवाल भाजपा और केंद्र सरकार को असहज कर देंगे तथा इसलिए कांग्रेस ने कभी उनसे नहीं पूछा।
विजयन ने यह भी कहा कि यदि सोने और मुद्रा की तस्करी होती है, तो यह सीमा शुल्क जैसी केंद्रीय एजेंसियों की विफलता का संकेत देता है, क्योंकि वे केंद्र के नियंत्रण में हैं न कि राज्य सरकार के। उन्होंने कहा कि हालांकि, इस पहलू को भी कांग्रेस द्वारा नजरअंदाज किया जा रहा है जो केंद्र के लिए एक ढाल के रूप में काम कर रही है।
विजयन ने उनकी बेटी और उसकी कंपनी को विपक्ष के एक सदस्य द्वारा चर्चा में घसीटे जाने पर भी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि तस्करी के मामले के मुद्दों को राजनीतिक रूप से हल किया जाना चाहिए, न कि परिवार के सदस्यों के खिलाफ आरोप लगाकर।
सोने की तस्करी मामले के संबंध में दोपहर के समय राज्य विधानसभा में हुई चर्चा के दौरान तीखी नोंकझोंक देखी गई। विपक्षी यूडीएफ ने राज्य के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन से सवाल किया कि उन्होंने सोने की तस्करी मामले की मुख्य आरोपी स्वप्ना सुरेश के खिलाफ मानहानि का मुकदमा क्यों नहीं दायर किया, यदि उनकी और उनके परिवार के सदस्यों की कथित भूमिका के बारे में उसका हालिया खुलासा निराधार है। विपक्षी यूडीएफ ने साथ ही विजयन से पद से इस्तीफा देने और मामले में जांच का सामना करने का आग्रह किया।
यूडीएफ ने इस मामले पर राज्य विधानसभा में एक स्थगन प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि विजयन ने आरोपी द्वारा किए गए चौंकाने वाले दावों को लेकर कानूनी नोटिस भेजने की भी जहमत नहीं उठाई। यूडीएफ ने दावा किया कि सच्चाई एक दिन किसी भी तरह सामने जरूरी आएगी।
हालांकि, सत्तारूढ़ एलडीएफ सदस्यों ने सदन में विपक्षी सदस्यों द्वारा विजयन के खिलाफ आरोप लगाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि आरोप मार्क्सवादी पार्टी और उसके मजबूत मुख्यमंत्री को क्षति पहुंचाने के लिए कांग्रेस और भाजपा के संयुक्त एजेंडे का हिस्सा हैं।
इससे पहले दिन में, मुख्यमंत्री विवादास्पद मुद्दे को चर्चा के लिए लेने को सहमत हुए जब यूडीएफ ने इस पर स्थगन प्रस्ताव के लिए एक नोटिस दिया और आरोप लगाया कि उनकी सरकार जांच को रोकने की कोशिश कर रही है।
प्रस्ताव पेश करने वाले परम्बिल ने मामले में विवादास्पद पत्रकार शाज किरण के हस्तक्षेप, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ उनके कथित करीबी संपर्क, मामले के संबंध में सतर्कता निदेशक को हटाने आदि के संबंध में भी कई सवाल किए।
कांग्रेस के एक अन्य विधायक मैथ्यू कुझलनादान ने कहा कि जब दो साल पहले पहली बार यह विवाद उठा था तब विजयन ने कहा था कि वह सुरेश को नहीं जानते।
उन्होंने सवाल किया, ‘‘आप दुबई पार्सल भेजने के लिए राजनयिक चैनल का विकल्प क्यों चुनना चाहते थे। क्या राज्य सरकार के पास इसे भेजने का कोई अन्य साधन नहीं है?’’ उनका इशारा आरोपी के इन आरोपों की ओर था कि 2016 में विजयन की ओर से यहां स्थित यूएई वाणिज्य दूतावास के माध्यम से दुबई एक पैकेज भेजा गया था और उसमें करंसी नोट पाए गए थे।
हालांकि, सत्तारूढ़ पक्ष के सदस्यों ने विजयन का बचाव करते हुए कहा कि राज्य में सोने की तस्करी का मामला फिर से विपक्षी दलों की ‘‘राजनीतिक साजिश’’ के तहत सामने आया है।
वी जॉय (माकपा) ने शाज किरण की कांग्रेस नेता रमेश चेन्नीथला और भाजपा के वरिष्ठ नेता के. राजशेखरन के साथ तस्वीरें दिखाईं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष हाल के विधानसभा चुनाव में लगातार दूसरी बार एलडीएफ की ऐतिहासिक जीत के खिलाफ अपनी ‘‘असहिष्णुता’’ के चलते यह मुद्दा उठा रहा है।
ए एन शमसीर ने आरोपों के पीछे ‘कांग्रेस-आरएसएस दुष्प्रचार’ का संदेह जताया और सौर धोखाधड़ी का मामला उठाकर विपक्ष को घेरने की कोशिश की, जिसने ओमन चांडी के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती यूडीएफ सरकार को हिलाकर रख दिया था।
विपक्ष के नेता वी डी सतीसन ने अपने भाषण के दौरान, सरकार पर निशाना साधा और सवालल किया कि मुख्यमंत्री अपने प्रमुख सचिव एम शिवशंकर के कदम को समझने में विफल क्यों रहे, जब वह सुरेश के साथ विदेश सहित कई जगह गए।
भाषा अमित नेत्रपाल
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