चेन्नई, 15 जून (भाषा) तमिलनाडु के जल संसाधन मंत्री दुरईमुरुगन ने मेकेदातु बांध मुद्दे को लेकर कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी ने मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र की अहमियत को कम कर दिया।
स्टालिन के पत्र को ”राजनीतिक स्टंट” करार देने के लिए कर्नाटक के मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए, दुरईमुरुगन ने कहा कि प्रस्तावित मेकेदातु संतुलन जलाशय परियोजना तमिलनाडु के किसानों की बुनियादी आजीविका समस्या से संबंधित है।
दुरईमुरुगन ने यहां एक बयान में कहा, ”तमिलनाडु सरकार का मेकेदातु मुद्दे का राजनीतिकरण करने का कोई इरादा या मजबूरी नहीं है और मोदी को लिखे स्टालिन के पत्र को राजनीतिक स्टंट बताकर खारिज किया जाना अस्वीकार्य है।”
बोम्मई ने तमिलनाडु सरकार द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे गए पत्र को मंगलवार को ”राजनीतिक स्टंट” करार दिया था। स्टालिन के पत्र में कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) को 17 जून को उसकी बैठक में मेकेदातु परियोजना पर चर्चा करने से रोकने के लिए प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप करने की मांग की गयी है।
बोम्मई ने इसे ”अवैध” और ”संघीय व्यवस्था के खिलाफ” बताते हुए कहा कि पड़ोसी राज्य की मांग का कोई ”आधार” नहीं है और केंद्र इस पर विचार नहीं करेगा।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने सोमवार को प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में सीडब्ल्यूएमए को उसकी बैठक में कर्नाटक के मेकेदातु परियोजना प्रस्ताव पर चर्चा करने से रोकने की मांग की।
स्टालिन ने पत्र में कहा कि सीडब्ल्यूएमए के कामकाज का दायरा कावेरी मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय के फैसले को लागू करने तक सीमित है और वह किसी अन्य मामले पर विचार नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही यह मामला अभी विचाराधीन है और इस संबंध में तमिलनाडु की याचिकाएं उच्चतम न्यायालय के समक्ष लंबित हैं।
मेकेदातु कर्नाटक द्वारा प्रस्तावित एक बहुउद्देश्यीय (पीने का पानी और बिजली) परियोजना है जिसमें रामनगर जिले में कनकपुरा के पास एक जलाशय का निर्माण शामिल है।
पड़ोसी तमिलनाडु इस परियोजना का विरोध कर रहा है और आशंका जता रहा है कि अगर यह परियोजना पूरी हो जाती है तो राज्य प्रभावित होगा।
परियोजना का उद्देश्य बेंगलुरु और पड़ोसी क्षेत्रों में पेयजल सुनिश्चित करना तथा 400 मेगावाट बिजली पैदा करना है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 9,000 करोड़ रुपये है।
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जोहेब नरेश
नरेश
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