सीकर/जयपुर, 10 जून (भाषा) जिले के खंडेला कस्बे में उपखंड अधिकारी (एसडीएम) कार्यालय में एक वकील द्वारा आत्मदाह किए जाने के मामले में वकीलों, राजनेताओं और परिजनों ने शुक्रवार को वकील के शव के साथ प्रदर्शन किया।
पुलिस ने बताया कि वकील के परिजनों, वकीलों, राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने दोषी अधिकारियों को गिरफ्तार करने, परिजनों को आर्थिक सहायता और परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी की मांग को लेकर शुक्रवार को खंडेला एसडीएम कार्यालय के बाहर शव के साथ प्रदर्शन किया।
वहीं राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग ने शुक्रवार को मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, सीकर के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर 15 दिन में तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
सीकर पुलिस अधीक्षक कुंवर राष्ट्रदीप ने ‘पीटीआई भाषा’ को बताया, ‘‘हम परिजनों की मांगों को लेकर बैठक में चर्चा कर रहे हैं। चर्चा के बाद इसपर कोई निर्णय लिया जायेगा।’’
प्रदर्शनकारी वकील द्वारा आत्मदाह जैसा कदम उठाने के लिये जिम्मेदार अधिकारी एसडीएम और थानाधिकारी को गिरफ्तार करने, परिजनों को दो करोड़ रुपये का मुआवजा देने और मृतक के परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी की मांग कर रहे हैं।
माकपा नेता अमराराम ने ‘पीटीआई/भाषा’ को बताया, ‘‘मांगों का एक पत्र प्रशासन को दिया गया है। हम खंडेला एसडीएम कार्यालय के बाहर शव को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। मांगें पूरी होने तक वकील का अंतिम संस्कार नहीं किया जायेगा।’’
उन्होंने कहा कि वकील मौत का मामला संवेदनशील होने के कारण प्रशासन पोस्टमार्टम बृहस्पतिवार रात को करवाना चाहता था लेकिन सीकर जिला कलेक्टर से बातचीत के बाद पोस्टमार्टम शुक्रवार सुबह किया गया।
माकपा नेता ने बताया कि वकील के परिजनों को न्याय दिलाने के लिए राज्यभर के अधिवक्ताओं ने जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया है।
उल्लेखनीय है कि वकील हंसराज मवालिया (40) के बृहस्पतिवार को खंडेला एसडीएम कार्यालय में पेट्रोल छिड़ककर कर आत्मदाह का प्रयास किया था। उन्हें तुरंत स्थानीय अस्पताल ले जाया गया जहां से डॉक्टरों ने गंभीर झुलसे वकील को जयपुर के सवाई मानसिंह चिकित्सालय भेजा गया जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
मृतक वकील ने अपने सुसाइड नोट में सीकर के खंडेला उपखंड मजिस्ट्रेट राकेश कुमार और खंडेला थानाधिकारी को आत्महत्या जैसे कदम उठाने के लिये जिम्मेदार बताया था।
वकील ने आरोप लगाया था कि कुमार ने उन्हें हर सुनवाई के लिये रिश्वत की मांग कर परेशान किया जा रहा था और रिश्वत नहीं देने नोटिस जारी किया जाता था। मृतक वकील ने थानाधिकारी पर उपखंड मजिस्ट्रेट के विरोध में कुछ भी बोलने पर धमकाने का आरोप लगाया था।
भाषा सं कुंज पृथ्वी अर्पणा
अर्पणा
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