तेजपुर (असम), पांच जून (भाषा) असम के सोनितपुर जिले में एक सरकारी कॉलेज ने अपने गरीब छात्रों को खाली समय में कॉलेज के परिसर में स्थित चाय के बागान में काम करने की अनुमति दी है ताकि उन छात्रों की आर्थिक रूप से मदद हो सके और वे अपनी शिक्षा का खर्च उठा सकें।
जामगुरिहत के पास नंदुआर इलाके में स्थित करचनटोला में 33 एकड़ भूमि पर बने त्यागबीर हेम बरुआ कॉलेज में मत्स्यपालन, केले और नींबू की खेती के साथ ही चाय के बागान भी हैं।
कॉलेज के प्रधानाध्यापक अजित हजारिका ने पीटीआई-भाषा से कहा, “पास के क्षेत्रों के कई गरीब छात्र कक्षा के पीरियड नहीं होने पर चाय के बागान में काम करते हैं और 35-40 रुपये प्रति घंटा कमा लेते हैं। यह कौशल विकास की पहल के अंतर्गत है लेकिन हमने इसके लिए सरकार से कोई मदद नहीं ली है।”
कॉलेज के परिसर में चाय की खेती 2015 में 14 बीघे में शुरू की गई थी और 2019 में यह और आठ बीघे तक फैल गई। उन्होंने कहा कि कॉलेज चाय के बागान से नजदीकी फैक्टरियों में हरी पत्तियां बेचता है जिससे सालाना 1.85 लाख रुपये की कमाई होती है।
भाषा यश रंजन
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