scorecardresearch
Friday, 6 March, 2026
होमदेशअर्थजगतआर्थिक संकट में घिरे श्रीलंका ने पहली बार कर्ज भुगतान में चूक की

आर्थिक संकट में घिरे श्रीलंका ने पहली बार कर्ज भुगतान में चूक की

Text Size:

कोलंबो, 20 मई (भाषा) श्रीलंका ने अपने इतिहास में पहली बार कर्ज के भुगतान में चूक की है। कोविड-19 महामारी और यूक्रेन में युद्ध के चलते वैश्विक हालात बिगड़ने के बीच श्रीलंका भीषण वित्तीय संकट से जूझ रहा है।

श्रीलंकाई केंद्रीय बैंक के गवर्नर पी नंदलाल वीरसिंघे ने बृहस्पतिवार को कहा कि देश अपने दो सॉवरेन बांड पर ब्याज भुगतान के लिए 30 दिनों की छूट अवधि खत्म होने के बाद कर्ज पर ‘एहतियाती चूक’ की स्थिति में पहुंच गया।

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज के अनुसार इस सदी में पहली बार एशिया-प्रशांत क्षेत्र के किसी देश ने कर्ज भुगतान में चूक की है। श्रीलंका 30 दिन की रियायत अवधि के बाद भी अंतरराष्ट्रीय सॉवरेन बांड का भुगतान करने में विफल रहा है।

बांड का भुगतान 18 अप्रैल तक करना था और इनकी राशि 7.8 करोड़ डॉलर है। इसके भुगतान के लिए 30 दिन की रियायत अवधि भी बुधवार को समाप्त हो गई।

बीबीसी ने बताया कि बृहस्पतिवार को दुनिया की दो सबसे बड़ी क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने भी कहा कि श्रीलंका ने कर्ज भुगतान में चूक की है।

चूक की स्थिति तब बनती है जब सरकारें कर्ज देने वालों को बकाया लौटाने में पूरी तरह असमर्थ हो जाती हैं। यह निवेशकों के साथ किसी देश की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकता है, और उस देश के लिए आगे उधार पाना कठिन हो जाता है।

वीरसिंघे से बृहस्पतिवार को जब पूछा गया कि क्या देश डिफॉल्ट की स्थिति में है तो उन्होंने कहा, ‘‘हमारी स्थिति बहुत स्पष्ट है। हमने कहा है कि जब तक वे हमारे कर्ज का पुनर्गठन नहीं करते, हम भुगतान नहीं कर पाएंगे। इसे ही आप एहतियाती चूक (प्री-इम्पटिव डिफॉल्ट) कहते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘तकनीकी परिभाषाएं हो सकती हैं… उनकी तरफ से वे इसे एक चूक मान सकते हैं। हमारी स्थिति बहुत स्पष्ट है जब तक ऋण का पुनर्गठन नहीं होता है, हम चुका नहीं सकते हैं।’’

इससे पहले फिच ने कहा था, ‘‘श्रीलंका की विदेशी मुद्रा से संबंधित रेटिंग को ‘सी’ से घटाकर ‘डी’ कर दिया है। ऐसा असुरक्षित विदेशी मुद्रा बांड के मामले में चूक को देखते हुए किया गया।’’

श्रीलंका ने अंतरराष्ट्रीय सॉवरेन बांड, वाणिज्यिक बैंक ऋण, एग्जिम बैंक कर्ज और द्विपक्षीय कर्ज का भुगतान पहले ही निलंबित कर दिया है। देश को इस वर्ष 10.634 करोड़ डॉलर का भुगतान करना है लेकिन अप्रैल तक वह केवल 1.24 करोड़ डॉलर का ही भुगतान कर पाया।

भाषा पाण्डेय प्रेम

प्रेम

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments