नागपुर(महाराष्ट्र), 31 मार्च (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि जांचे-परखे बगैर किसी भी आस्था या विश्वास को खारिज नहीं किया जाना चाहिए।
भागवत ने वेदों से ज्ञान प्राप्त करने और उनके प्रसार के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि न तो विज्ञान और न ही आस्था को सिरे से खारिज किया जाना चाहिए।
उन्होंने बृहस्पतिवार को यहां डॉ चेन्नाकेशव शास्त्री की पुस्तक ‘वैदिक फिलॉसॉफिकल रेमेडीज’ के विमोचन के अवसर पर यह बात कही।
आरएसएस प्रमुख ने कहा, ‘किसी भी आस्था (श्रद्धा) को बिना जांचे परखे अंधविश्वास कहना सही नहीं है। इसकी जांच होनी चाहिए। कुछ लोग वेदों को खारिज करते हैं और कुछ विज्ञान को खारिज करते हैं। दोनों अतिवादी दृष्टिकोण हैं।’
भागवत ने कहा कि इस तरह की अतिवादी सोच के कारण हमारे कुछ पारंपरिक ज्ञान को खारिज कर दिया गया और वह लुप्त हो गया।
भाषा रवि कांत सुभाष
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