नयी दिल्ली, 15 मार्च (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने जनता दल (यूनाइटिड) के पूर्व प्रमुख शरद यादव को मंगलवार को निर्देश दिया कि वह 15 दिन के अंदर राष्ट्रीय राजधानी स्थित सरकारी बंगला खाली करें, क्योंकि उन्हें 2017 में राज्यसभा से अयोग्य ठहरा दिया गया था।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति नवीन चावला की पीठ ने यादव को निर्देश दिया कि वह 15 दिन के अंदर सात तुगलक रोड बंगले को सरकार को सौंप दें। पीठ ने कहा कि यादव को संसद की सदस्यता से अयोग्य ठहराए चार साल से ज्यादा का समय हो गया है और सरकारी आवास में रहने के लिए उनके लिए स्पष्टीकरण नहीं है।
उच्च न्यायालय ने कहा कि वह 15 दिसंबर 2017 को एकल पीठ द्वारा पारित अंतरिम आदेश को जारी रखने की इच्छुक नहीं है। इस आदेश के तहत याचिका पर फैसला होने तक यादव को सांसद के तौर पर आधिकारिक सुविधाएं और सरकारी आवास का इस्तेमाल करने की इजाजत दी गई थी।
उच्चतम न्यायालय ने जून 2018 को उच्च न्यायालय के आदेश में आंशिक तौर पर संशोधन किया था और कहा था कि वह सरकारी आवास में रह सकते हैं लेकिन सांसद के तौर पर वेतन और अन्य सुविधाओं के हकदार नहीं हैं।
मंगलवार को उच्च न्यायालय ने केंद्र के उस आवेदन का निपटान कर दिया जिसमें उनके द्वारा बंगला खाली करने को लेकर लगी रोक को हटाने का आग्रह किया गया था।
पीठ ने कहा कि 15 दिसंबर 2017 का आदेश रद्द किया जाता है। पीठ ने मुख्य याचिका पर सुनवाई 21 अप्रैल को सूचीबद्ध की है।
पीठ ने कहा कि जबतक यादव को अयोग्य ठहराए जाने का फैसला रद्द नहीं किया जाता है तबतक उनके पास सरकारी आवास में रहने का कोई हक नहीं है।
इसमें कहा गया है कि ये सुविधाएं किसी भी व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से दी जाती हैं और ये जीवन भर के लिए नहीं दी जाती हैं।
पीठ ने यादव के वकील से कहा, “ ये (सुविधाएं) आपको तब तक दी गई हैं जबतक आप संसद के सदस्य हैं। यह इसलिए दी जाती हैं ताकि सदस्य संसद के पास रहकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन प्रभावी करके से कर सके। चूंकी आप अयोग्य ठहराए गए हैं तो आपके लिए संसद में शामिल होना जरूरी नहीं है।”
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल संजय जैन और केंद्र सरकार के स्थायी अधिवक्ता अजय दिगपॉल ने कहा कि मंत्रिपरिषद का विस्तार हुआ है और सरकार को नव नियुक्त मंत्रियों को आवास मुहैया कराने के लिए इसकी जरूरत है।
सरकारी अधिवक्ता ने कहा कि बंगला एक मंत्री को आवंटित किया जाना है जो कई महीनों से इसका इंतजार कर रहे हैं।
जुलाई 2017 में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राजद और कांग्रेस के गठबंधन से अलग होने और फिर भाजपा के साथ जाने के बाद यादव ने विपक्षी खेमे से हाथ मिला लिया था जिसके बाद उनकी पार्टी ने उन्हें राज्यसभा से अयोग्य ठहराए जाने का आग्रह किया था जिन्हें चार दिसंबर 2017 को अयोग्य ठहरा दिया गया था।
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नोमान उमा
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