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Wednesday, 18 March, 2026
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जितिन प्रसाद को कांग्रेस ने मान-सम्मान सब कुछ दिया पर उन्होंने विश्वासघात किया : अजय कुमार लल्लू

लल्लू ने आगे कहा, 'मैं समझता हूं किसी के आने-जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता. कांग्रेस पार्टी एक विचारधारा की पार्टी है. एक मजबूत स्तम्भ है.'

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नई दिल्ली : कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद के बुधवार को भाजपा ज्वाइन करने के बात कांग्रेस ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने जहां उन पर विश्वासघात करने का आरोप लगाया है तो वहीं पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता पर सवाल खड़ा किया है और कोविड का कुप्रबंधन करने वालों के साथ जाने की बात कही है.

अजय कुमार लल्लू ने बताया विश्वासघात

यूपी कांग्रेस चीफ अजय कुमार लल्लू ने एक बयान में कहा, ‘जितिन प्रसाद को मान-सम्मान कांग्रेस पार्टी ने दिया, उनकी पहचान बनाई. उनको सांसद बनाया, दो बार केंद्रीय मंत्री बनाया, 2017 में उनको विधानसभा का प्रत्याशी भी बनाया. 2019 में भी कांग्रेस ने उनको टिकट दिया. अभी बंगाल का प्रभारी बनाया. इतना मान-सम्मान देने के बाद भी अगर कोई भी पार्टी का नेता वफादारी न करे तो विश्वासघात नहीं तो और क्या है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘मैं समझता हूं किसी के आने-जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता. कांग्रेस पार्टी एक विचारधारा की पार्टी है. एक मजबूत स्तम्भ है. निश्चित तौर पर कांग्रेस पार्टी गांव-किसान, गरीब, नौजवाान और खेत-खलिहान की आवाज को मजबूती के साथ उठाती रहेगी.’

वैचारिक प्रतिबद्धता पर उठाया सवाल

पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद के भाजपा में शामिल होने के बाद उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि प्रसाद ‘विचारविहीन, सिद्धांतविहीन एवं सहूलियत की राजनीति’ करते हुए उन लोगों के साथ चले गए जो देश और उत्तर प्रदेश में कोरोना महामारी के दौरान कुप्रबंधन के जिम्मेदार हैं.

श्रीनेत ने कुछ खबरों के आधार पर पूछे गए एक सवाल को लेकर यह भी कहा कि राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने अगर कोई मुद्दा उठाया है तो पार्टी नेतृत्व उस पर जरूर विचार करेगा.

उन्होंने प्रसाद के कांग्रेस छोड़ने के मुद्दे पर संवाददाताओं से कहा, ‘जब सोनिया गांधी ने कांग्रेस की कमान संभाली थी तो जितिन प्रसाद के पिता जितेंद्र प्रसाद ने विरोध किया था तथा विरोध में चुनाव लड़ा था और इसके बाद भी उन्हें पद दिया गया. बाद में जितिन प्रसाद को भी पार्टी में मौका दिया गया. वह युवा कांग्रेस के महासचिव, सांसद और फिर कांग्रेस की सरकार में मंत्री रहे.’

सुप्रिया ने कहा, ‘जितिन प्रसाद कहते हैं कि वे 8-10 साल से विचार कर रहे थे. मेरा सवाल है कि क्या आप यह उस वक्त सोच रहे थे जब आप मंत्री थे? आपने जो किया है वह दुख देता है. जब देश कोरोना महामारी से घिरा है और केंद्र और उप्र सरकार के कुप्रबंधन से ये हालात पैदा हुए हैं, ऐसे में क्या आपने इनके साथ जाने की भूल नहीं की? क्या आप इनके साथ खड़े होकर सहज महसूस करेंगे?’

उन्होंने इस बात पर जोर दिया, ‘यह लड़ाई सत्ता की लोलुपता की नहीं है. यह लड़ाई विचारधारा और भारत को लेकर विचार के बारे में है. अगर आप (प्रसाद) यू-टर्न लेते हैं तो लगता है कि आपकी वैचारिक प्रतिबद्धता में दिक्कत हमेशा से थी.’

सुप्रिया ने सवाल किया, ‘दुर्भाग्य है कि कांग्रेस में इनको बढ़ावा दिया गया और पद भी दिया गया, इसके बावजूद …. जिसको कांग्रेस ने इतना कुछ दिया, वह गए हैं. क्या यह सहूलियत की राजनीति नहीं है?’

उन्होंने आरोप लगाया, ‘आप भाजपा में जाकर अपने सिद्धांतों और विचारधारा पर सवाल खड़े करते हैं. विचारविहीन और सिद्धांतविहीन राजनीति यही होती है.’

सचिन पायलट से जुड़े सवाल पर सुप्रिया ने कहा, ‘अगर पायलट को कोई दिक्कत है और उन्होंने कुछ कहा है तो मुझे लगता है कि कांग्रेस नेतृत्व जरूर सुनेगा और उचित कदम उठाएगा.’

कांग्रेस में अब भी ऐसे नेता हैं जो सही इस्तेमाल किए जाने पर नतीजे दे सकते हैं: मिलिंद देवड़ा

वहीं कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मिलिंद देवड़ा ने जितिन प्रसाद के भाजपा में शामिल होने के बाद बुधवार को कहा कि कांग्रेस को अपनी पुरानी स्थिति पाने के लिए प्रयास करना चाहिए और पार्टी के भीतर अब भी ऐसे नेता हैं जिन्हें सशक्त बनाने और सही ढंग से इस्तेमाल किए जाने पर उम्मीद के मुताबिक नतीजे मिल सकते हैं.

उन्होंने ट्वीट किया, ‘मेरा मानना है कि कांग्रेस एक पार्टी के तौर पर यह कर सकती है और करना ही चाहिए कि वह एक विशाल पार्टी वाली अपनी पुरानी स्थिति फिर से हासिल करे. हमारे पास अब भी ऐसे नेता हैं जिन्हें अगर सशक्त किया जाए और बेहतरीन ढंग से इस्तेमाल किया जाए तो वे नतीजे दे सकते हैं.’

देवड़ा ने कहा, ‘मैं सिर्फ यह कहता हूं कि काश, मेरे कई मित्रों, सम्मानित साथियों और मूल्यवान सहयोगियों ने हमारा साथ नहीं छोड़ा होता.’

गौरतलब है कि जितिन प्रसाद ने बुधवार को भाजपा का दामन थाम लिया. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए इसे एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है.

 

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