Wednesday, 7 December, 2022
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क्या है कैलिनिनग्राद? वो रूसी क्षेत्र जिसने मॉस्को, यूरोपीय संघ के बीच तनाव को जन्म दिया

बुधवार को यूरोपीय संघ के सदस्य राज्य लिथुआनिया ने कहा कि वह रूस और रूसी एक्सक्लेव कैलिनिनग्राद के बीच ट्रेन के जरिए स्वीकृत माल की आवाजाही को अवरुद्ध नहीं करेगा.

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नई दिल्ली: पिछले कुछ महीनों से अद्वितीय रूसी क्षेत्र कैलिनिनग्राद मॉस्को और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच एक फ्लैशपॉइंट बन हुआ है.

कैलिनिनग्राद रूस का एक इलाका है जो पूरी तरह से अन्य देशों से घिरा हुआ है. यह बाल्टिक सागर के दक्षिणी तट पर पड़ता है और लिथुआनिया और पोलैंड के बीच स्थित है.

यह बुधवार रात को फिर से सुर्खियों में आ गया जब यूरोपीय संघ के सदस्य राज्य लिथुआनिया ने कहा कि वह कैलिनिनग्राद और मॉस्को के बीच यूरोपीय ब्लॉक द्वारा स्वीकृत माल की आवाजाही पर रोक नहीं लगाएगा.

रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते मौजूदा समय में मास्को पश्चिम से कई आर्थिक प्रतिबंधों का सामना कर रहा है.

जून के मध्य में लिथुआनिया ने भी यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों को देखते हुए कैलिनिनग्राद और मुख्य भूमि रूस के बीच 618 किलोमीटर की रेल लाइन के जरिए रूसी सामानों को लेकर जाने वाली ट्रेन का रास्ता रोक दिया था. यह रास्ता लिथुआनिया और बेलारूस से होकर गुजरता है.

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यह रेलवे लाइन रूस और कैलिनिनग्राद को जोड़ती है.

रूस और कैलिनिनग्राद को जोड़ने वाली रेलवे लाइन

जिन वस्तुओं की आवाजाही पर रोक लगाई गई उनमें कोयला, धातु, कंक्रीट, लकड़ी और अन्य सामान शामिल थे. उस दौरान जो वीडियो सामने आए, उनमें कलिनिनग्राद के कंस्ट्रक्शन सप्लाई स्टोर्स में कथित तौर पर घबराहट नजर आ रही थी.

रूस ने लिथुआनिया के प्रतिबंध को ‘अवैध नाकाबंदी’ करार दिया था और इसे नहीं हटाए जाने पर जवाबी कार्रवाई करने की धमकी दी थी. लिथुआनिया का उलटफेर यूरोपीय संघ के एक फैसले के बाद हुआ.

कैलिनिनग्राद रूस के लिए सैन्य रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका बंदरगाह शहर बाल्टिस्क मॉस्को का बाल्टिक सागर पर एकमात्र बंदरगाह है जहां पूरे साल बर्फ नहीं पड़ती है.

2013 में मास्को ने कैलिनिनग्राद के यूरोपीय पड़ोसियों को चिंता में डाल दिया था. उस समय कुछ रिपोर्टें सामने आईं थीं जिसमें रूस द्वारा परमाणु-सक्षम मिसाइलों को एक्सक्लेव में ले जाने की बात कही गई थी.


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कैलिनिनग्राद क्या है?

223 वर्ग किलोमीटर में फैला कैलिनिनग्राद मोटे तौर पर कोलकाता जितने आकार का है और यहां तकरीबन 10 लाख लोग रहते हैं.

यहां रहने वालों में अधिकांश लोग रूसी हैं, इसके बाद थोड़ी सी जनसंख्या यूक्रेनियन, बेलारुसियन, लिथुआनियाई और जर्मन की है.

यह दुनिया में मौजूद कुछ ऐसे शहरों में से है जो अपने देश में नहीं है. ऐसा ही एक शहर नखचिवन है, जो कहने को तो अजरबैजान का हिस्सा है लेकिन आर्मेनिया में स्थित है. इसके अलावा ऐसे शहरों के एक उदाहरण में हम अलास्का का नाम भी ले सकते हैं, जो अमेरिका का एक हिस्सा है लेकिन वहां सिर्फ कनाडा के सड़क मार्ग से ही पहुंचा जा सकता है.

कैलिनिनग्राद रूस का हिस्सा कैसे बना?

कैलिनिनग्राद का इतिहास जर्मनी और रूस से जुड़ा हुआ है.

इस क्षेत्र का नाम बोल्शेविक क्रांतिकारी मिखाइल कलिनिन के नाम पर पड़ा, जिन्होंने 1919 से 1946 तक सोवियत संघ के राज्य प्रमुख के रूप में कार्य किया था.

कलिनिन नाममात्र का मुखिया था और इसलिए उसके पास कुछ ज्यादा वास्तविक शक्तियां या प्रभाव नहीं था. वह 1946 में रिटायर हुए और उसी साल उनकी मृत्यु हो गई.

1945 तक यह क्षेत्र जर्मन शहर कोनिग्सबर्ग के नाम से जाना जाता रहा था. इसे एक बार पूर्वी प्रशिया की राजधानी भी बनाया गया. जर्मन दार्शनिक इमैनुएल कांट का जन्म वहीं हुआ था. उस समय यह शहर जर्मन के कब्जे में था. इस क्षेत्र में जर्मन विरासत के निशान अभी भी हैं जैसा कि ब्रैंडेनबर्ग गेट में देखा जा सकता है, जिसे 1657 में क्षेत्र के किलेबंदी के हिस्से के रूप में बनाया गया था.

1843 में इसकी बहाली का काम हुआ और प्रमुख प्रशिया सैन्य अधिकारियों की मूर्तियां लगाई गईं.

हालांकि दूसरे विश्व युद्ध के बाद जर्मनी ने इसे सोवियत संघ को सौंप दिया. कैलिनिनग्राद सोवियत नियंत्रण के तहत सबसे अधिक सैन्यीकृत और क्लोज्ड-ऑफ हिस्सा था.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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