नई दिल्ली: वेनेजुएला में संयुक्त राज्य अमेरिका की सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो तथा उनकी पत्नी को “पकड़े जाने” की वैधता पर सवाल उठ रहे हैं. खास तौर पर अमेरिका की डेमोक्रेटिक पार्टी ने इसकी कानूनी स्थिति पर आपत्ति जताई है. हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने किसी मौजूदा विदेशी नेता को ड्रग आरोपों में अपनी अदालतों में पेश करने के लिए सैन्य बल का इस्तेमाल किया हो.
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने शनिवार को फॉक्स न्यूज़ को दिए एक इंटरव्यू में इसकी वैधता पर उठे सवालों को खारिज कर दिया. उन्होंने डेमोक्रेट्स को “कमज़ोर, बेवकूफ लोग” कहा और कहा कि उन्हें इसके बजाय “शानदार काम” कहना चाहिए. मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस इस समय यूएसएस इवो जिमा जहाज़ पर अमेरिका ले जाए जा रहे हैं.
इस ऑपरेशन के समर्थन में रिपब्लिकन पार्टी की ओर से कम से कम दो तर्क दिए गए हैं. यूटा से अमेरिकी सीनेटर माइक ली ने कहा कि यह कार्रवाई “[अमेरिकी] संविधान के अनुच्छेद II के तहत राष्ट्रपति के अंतर्निहित अधिकारों के दायरे में आती है”.
ली ने X पर एक बयान में लिखा, “यह कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद II के तहत राष्ट्रपति के उस अंतर्निहित अधिकार के भीतर आती है, जिसके तहत वह अमेरिकी कर्मियों को किसी वास्तविक या आसन्न हमले से बचा सकते हैं”.
Just got off the phone with @SecRubio
He informed me that Nicolás Maduro has been arrested by U.S. personnel to stand trial on criminal charges in the United States, and that the kinetic action we saw tonight was deployed to protect and defend those executing the arrest warrant… https://t.co/lXCxhPoKSZ
— Mike Lee (@BasedMikeLee) January 3, 2026
ली ने आगे कहा कि मादुरो को अमेरिका में “आपराधिक आरोपों” पर मुकदमे का सामना करने के लिए “गिरफ्तार” किया गया है, और सैन्य कार्रवाई उन लोगों की रक्षा के लिए की गई थी जो वेनेजुएला के राष्ट्रपति की गिरफ्तारी को अंजाम दे रहे थे.
उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस भी ऑपरेशन के बचाव में सामने आए और अमेरिका में मादुरो के खिलाफ “नार्को-टेररिज्म” के आरोपों का ज़िक्र किया.
वेंस ने X पर लिखा, “मादुरो पर संयुक्त राज्य अमेरिका में नार्को-टेररिज्म के कई आरोप हैं. आप कराकस के किसी महल में रहकर अमेरिका में ड्रग तस्करी के लिए न्याय से नहीं बच सकते”.
डेमोक्रेट्स ने कांग्रेस की मंज़ूरी के बिना की गई इस सैन्य कार्रवाई को असंवैधानिक बताया है. वर्जीनिया से सीनेटर मार्क वॉर्नर ने X पर लिखा, “सत्ता परिवर्तन के लिए सैन्य बल का इस्तेमाल सबसे कड़ी जांच की मांग करता है, क्योंकि इसके नतीजे शुरुआती हमले तक सीमित नहीं रहते”.
उन्होंने आगे कहा, “अगर संयुक्त राज्य अमेरिका यह अधिकार जताता है कि वह किसी विदेशी नेता को आपराधिक आरोपों में पकड़ने के लिए सैन्य बल का इस्तेमाल कर सकता है, तो चीन को ताइवान के नेतृत्व के खिलाफ ऐसा ही दावा करने से कौन रोकेगा. व्लादिमीर पुतिन को यूक्रेन के राष्ट्रपति को अगवा करने के लिए इसी तरह का तर्क देने से क्या रोकेगा. एक बार यह रेखा पार हो गई, तो वैश्विक अराजकता को रोकने वाले नियम ढहने लगते हैं, और सबसे पहले तानाशाही शासन इसका फायदा उठाएंगे”.
हालांकि, संयुक्त राष्ट्र (UN) का चार्टर साफ तौर पर कहता है कि कोई भी सदस्य देश किसी अन्य देश की “क्षेत्रीय अखंडता” या “राजनीतिक स्वतंत्रता” के खिलाफ “बल प्रयोग या उसकी धमकी” नहीं दे सकता. इसके बावजूद, वॉशिंगटन ने पहले भी ऐसे कदम उठाए हैं. 1989 में अमेरिका ने पनामा के सैन्य तानाशाह मैनुअल नोरिएगा के खिलाफ कार्रवाई कर उन्हें ड्रग तस्करी के आरोपों में अमेरिका लाकर अदालत में पेश किया था.
मादुरो के मामले में भी अमेरिका ने इसी तरह की कार्रवाई की है. मादुरो पर 2020 में नार्को-टेररिज्म से जुड़े आरोप लगाए गए थे. उस समय अमेरिकी न्याय विभाग ने उनकी गिरफ्तारी पर 1.5 करोड़ डॉलर का इनाम घोषित किया था, जिसे पिछले साल ट्रंप के सत्ता में लौटने के बाद बढ़ाकर 5 करोड़ डॉलर कर दिया गया.
शनिवार को अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा सार्वजनिक किए गए नए अभियोग में मादुरो के साथ उनकी पत्नी फ्लोरेस को भी नार्को-टेररिज्म और कई साजिशों के आरोपों में शामिल किया गया है. ये आरोप 2020 में लगाए गए मूल अभियोग जैसे ही हैं.
ऑपरेशन और अमेरिकी कानून
हालांकि किसी विदेशी देश के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गलत माना जाता है, जैसा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर में कहा गया है, लेकिन अमेरिकी घरेलू कानून व्यक्तियों के खिलाफ न्यायिक कार्रवाई की अनुमति देता है, भले ही उन्हें पकड़ने की प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध क्यों न हो. मादुरो को एक विदेशी सरकार के प्रमुख के रूप में राजनयिक छूट मिलती है या नहीं, यह फैसला अमेरिकी अदालतें करेंगी. यह भी ध्यान देने वाली बात है कि वॉशिंगटन मादुरो की सरकार को मान्यता नहीं देता.
नवंबर 2024 में अमेरिका ने उस साल हुए चुनावों के बाद विपक्षी उम्मीदवार एडमूंडो गोंजालेज़ को वेनेजुएला का “निर्वाचित राष्ट्रपति” घोषित किया था और मादुरो की जीत के दावों को खारिज कर दिया था. इससे पहले 2019 में अमेरिका ने जुआन गुआइदो को वेनेजुएला का कार्यवाहक राष्ट्रपति माना था. हालांकि 2019 से 2024 के बीच मादुरो को सत्ता से हटाने की कोशिशें नाकाम रहीं.
अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा शनिवार को सार्वजनिक किए गए नए अभियोग में कहा गया है, “लगभग 2018 में, मादुरो मोरोस ने वेनेजुएला में हुए एक विवादित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा किए गए राष्ट्रपति चुनाव में जीत की घोषणा की. लगभग 2019 में, वेनेजुएला की नेशनल असेंबली ने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि [निकोलस] मादुरो मोरोस ने सत्ता पर कब्जा कर लिया है और वह वेनेजुएला के वैध राष्ट्रपति नहीं हैं”.
“इसके बावजूद, मादुरो मोरोस राष्ट्रपति पद की शक्तियों का इस्तेमाल करते रहे, जिसके कारण संयुक्त राज्य अमेरिका सहित 50 से अधिक देशों ने उन्हें वेनेजुएला का राष्ट्राध्यक्ष मानने से इनकार कर दिया. लगभग 2024 में वेनेजुएला में फिर राष्ट्रपति चुनाव हुए, जिनकी अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने कड़ी आलोचना की, और इसके बावजूद मादुरो मोरोस ने खुद को विजेता घोषित किया”.
अमेरिकी घरेलू कानून उन अभियानों को स्पष्ट रूप से अनुमति देता है जिनके तहत आतंकवादियों, नार्को-आतंकवादियों और कार्टेल नेताओं जैसे वांछित लोगों को विदेशी धरती से “पकड़कर” लाया जाता है. ऐसे अभियानों के ज़रिये लाए गए लोगों को अदालत में मुकदमे से नहीं बचाया जा सकता. अमेरिकी न्याय प्रणाली ने केअर-फ्रिस्बी सिद्धांत विकसित किया है, जिसके तहत किसी भगोड़े को, भले ही प्रत्यर्पण संधि जैसे कानूनी तरीकों के बिना लाया गया हो, फिर भी उस पर मुकदमा चलाया जा सकता है.
अमेरिकी न्याय विभाग ने अपनी वेबसाइट पर बताया है, “जो भगोड़े औपचारिक प्रत्यर्पण आदेश के बिना अमेरिका लाए जाते हैं, वे अक्सर दावा करते हैं कि उन्हें (अमेरिकी या विदेशी एजेंटों द्वारा) अगवा किया गया और अवैध रूप से लाया गया. अदालतें आमतौर पर केअर-फ्रिस्बी सिद्धांत के तहत इन दलीलों को खारिज कर देती हैं और मानती हैं कि किसी संघीय आपराधिक मुकदमे में आरोपी अदालत के अधिकार क्षेत्र को इस आधार पर चुनौती नहीं दे सकता कि उसे अवैध तरीके से अदालत के सामने लाया गया”.
हालांकि, इस सिद्धांत का एक अपवाद भी है. यदि किसी भगोड़े को “ऐसे तरीके से पकड़ा गया हो जो अदालत की अंतरात्मा को झकझोर दे”, जैसे यातना के ज़रिये, तो अदालत उस व्यक्ति के खिलाफ मामला सुनने से इनकार कर सकती है. यह अपवाद यूनाइटेड स्टेट्स बनाम टोस्कानिनो (1974) मामले में सामने आया था. हालांकि अब तक इस आधार पर कोई मामला खारिज नहीं हुआ है.
यह भी ध्यान देने योग्य है कि पनामा के पूर्व सैन्य तानाशाह मैनुअल नोरिएगा को 1990 में अमेरिका लाया गया था और उन्होंने 2007 में अपनी मृत्यु तक 17 साल जेल में बिताए. इसके अलावा, अमेरिकी सेना को आपराधिक संदिग्धों को गिरफ्तार करने से रोकने वाला जो एकमात्र कानून है, वह पॉसी कॉमिटाटस एक्ट है. अमेरिकी न्याय विभाग की 1990 की राय के अनुसार, यह कानून अमेरिका की सीमाओं के बाहर लागू नहीं होता, जैसा कि द न्यूयॉर्क टाइम्स ने रिपोर्ट किया था.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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