नई दिल्ली: यूनियन बजट 2026-27 में लगभग एक दशक में पहली बार चाबहार पोर्ट के लिए कोई आवंटन नहीं किया गया है. इसे ईरान के इस बंदरगाह में भारत के ऑपरेशन समेटने की दिशा में एक और संकेत माना जा रहा है.
अमेरिका ईरान में निवेश कम करने के लिए देशों पर “मैक्सिमम प्रेशर” अभियान चला रहा है. इस साल के बजट में विदेश मंत्रालय के खर्च प्रावधान में चाबहार पोर्ट के लिए किसी खास राशि का कोई जिक्र नहीं है. पिछले कई वर्षों में इस पोर्ट को 100 करोड़ रुपये से लेकर 400 करोड़ रुपये तक का आवंटन मिलता रहा था.
वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान में ईरान के इस बंदरगाह के लिए 400 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था, जिसका भारत के लिए रणनीतिक महत्व है. हालांकि, इस साल की शुरुआत में खबर आई थी कि भारतीय सरकार ने इस परियोजना से बाहर निकलने का फैसला किया है. इससे पहले भारत ने इस परियोजना से जुड़ी अपनी वित्तीय जिम्मेदारियां पूरी करने के लिए ईरान सरकार को करीब 120 मिलियन डॉलर ट्रांसफर किए थे.
चाबहार भारत को पाकिस्तान के रास्ते वाली पारंपरिक जमीनी मार्ग को छोड़कर मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक पहुंच देता है. इसे भारत के लिए एक रणनीतिक आउटलेट माना जाता है. यह बंदरगाह भारत के पश्चिमी तटों को यूरोप और आगे के इलाकों से जोड़ने वाले परिवहन गलियारों को विकसित करने की योजना का हिस्सा रहा है.
इसे इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर यानी आईएनएसटीसी का एक संभावित मार्ग भी माना गया था. यह एक व्यापार मार्ग है, जो समुद्री और रेल मार्ग जैसे बहु-माध्यम परिवहन के जरिए भारत को रूस से जोड़ता है.
हालांकि, चाबहार परियोजना को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा, जिनका मुख्य कारण ईरान की घरेलू कानूनी प्रक्रियाएं रहीं. 2024 में भारत ने आखिरकार इस बंदरगाह के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल को 10 साल तक चलाने के लिए एक दीर्घकालिक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे.
2018 में राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ संयुक्त व्यापक कार्य योजना यानी जेसीपीओए समझौते से अमेरिका के बाहर निकलने के बाद, अमेरिका ने तेहरान पर कड़े प्रतिबंध दोबारा लगा दिए थे. इससे चाबहार में निवेश जोखिम भरा हो गया था.
हालांकि, अफगानिस्तान के साथ संभावित व्यापार मार्ग को देखते हुए अमेरिका ने भारत को चाबहार पोर्ट चलाने के लिए प्रतिबंधों से छूट दी थी.
लेकिन 2025 में व्हाइट हाउस में दोबारा सत्ता में आने के बाद, ट्रंप प्रशासन ने शुरुआत में भारत को दी गई यह छूट आगे नहीं बढ़ाई. अक्टूबर 2025 में अमेरिका ने आखिरकार भारत को अप्रैल 2026 तक के लिए छह महीने की राहत दी. ट्रंप ने पिछले महीने यह भी घोषणा की थी कि जो भी देश ईरान के साथ व्यापार जारी रखेगा, उस पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा.
पिछले महीने विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नियमित प्रेस ब्रीफिंग में कहा था कि चाबहार में ऑपरेशन जारी रखने की व्यवस्था पर भारत अमेरिका के साथ संपर्क में बना हुआ है और इस पर “काम” कर रहा है.
हाल के दिनों में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ा है. अमेरिका ने ईरान के पास के क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी काफी बढ़ा दी है. ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत की मेज पर नहीं आता है, तो उस पर सैन्य हमले किए जा सकते हैं.
ईरान में दिसंबर के अंत से कुछ हफ्तों तक घरेलू विरोध प्रदर्शन भी हुए. ये प्रदर्शन देश की खराब आर्थिक स्थिति को लेकर थे.
पश्चिमी देशों ने ईरानी सरकार पर इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए दमनकारी तरीकों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है. इन प्रदर्शनों में हजारों लोगों की मौत होने की बात कही गई है. यूरोपीय संघ ने हाल ही में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी को आतंकवादी संगठन के रूप में प्रतिबंधित करने का फैसला किया है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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