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प्रधानमंत्री रेन्द्र मोदी के साथ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की फाइल फोटो | गेटी इमेज
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नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को अफगानिस्तान की एक लाइब्रेरी को फंड देने पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ये कहते हुए मज़ाक उड़ाया कि इसका कोई उपयोग नहीं है. उन्होंने पीएम मोदी का मज़ाक एक प्रेस कांफ्रेंस में उड़ाया, जिसमें उन्होंने विदेश में कम निवेश करने को लेकर अपनी कैबिनेट का बचाव किया.

ट्रंप ने कहा, ‘मोदी लगातार मुझे बता रहे थे कि उन्होंने अफगानिस्तान में एक लाइब्रेरी का निर्माण करवाया है. आप जानते हैं यह क्या है? यह उतना है जितना हम पांच घंटे में खर्च कर देते हैं और वे चाहते हैं कि हम कहें लाइब्रेरी के लिए धन्यवाद. मुझे नहीं पता कि इस लाइब्रेरी का कौन इस्तेमाल कर रहा है.

उनके बयान से स्पष्ट नहीं था कि वो किस परियोजना की ओर इशारा कर रहे हैं. सितंबर 11, 2001 के हमले के बाद अमरीकी नेतृत्व वाली सेना ने तालिबान की सत्ता को उखाड़ फेंका था. उसके बाद भारत ने अफगानिस्तान को 3 बिलियन डॉलर की सहायता का वादा किया था.

भारत की सहायता के तहत काबुल के एक एलीट स्कूल के पुनर्निर्माण में मदद की है और 1000 अफगान बच्चों को हर साल छात्रवृत्ति देने का वादा भी किया है.

मोदी ने 2015 में अफगानिस्तान की नई संसद की इमारत का उद्घाटन करने के बाद कहा था कि भारत अफगानिस्तान के ‘युवाओं को आधुनिक शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण दे कर मदद करेंगे.’

भारत अफगानिस्तान की मदद करने वाले देशों में शामिल है और पूर्व तालिबान शासन ने उनके खिलाफ आतंकवाद फैलाया था.

पर अफगानिस्तान में भारत की भूमिका ने पाकिस्तान की चिंता बढ़ाई हैं. माना जाता है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियां अब भी अफगान चरमपंथियों का साथ देती हैं और भारत इसे अपने खिलाफ अभियान के तौर पर देखता है.

ट्रंप प्रशासन ने सीरिया से अपनी 2000 फौज वापस बुला ली है और अफगानिस्तान में अपनी 14,000 की सेना को भी आधे से कम कर दिया है. उनके प्रशासन का कहना है कि वह विदेश में कम खर्च करेंगे.

ट्रंप का कहना था ‘रूस सोवियत यूनियन होता था पर अफगानिस्तान ने उसे रूस बना दिया, क्योंकि वहां लड़ाई लड़ते-लड़ते वह दिवालिया हो गया.’

पर ट्रंप के बयान को भारत को तमगे की तरह लेना चाहिए और उन्हें थैंक क्यू कहना चाहिए. भारत की अफगानिस्तान में सकारात्मक भूमिका रही है और वह उस देश के पुनर्गठन में सक्रिय भूमिका निभा रहा है. भारत जानता है कि अफगानिस्तान का विकास उसके लिए फायदे का सौदा है और सेना की बजाय विकास और जीवन में सुधार लाना ही अफगानिस्तान की असली मदद होगा. साथ ही एक समृद्ध अफगानिस्तान, जो भारत की मदद से सालों के गृह युद्ध से उबर रहा है पाकिस्तान के खिलाफ भारत के एक मज़बूत दोस्त की तरह खड़ा हो सकता है.

अफगानिस्तान का भला लाइब्रेरी, स्कूल और संसद ही करेंगे ऐसा भारत का मानना है और उसे अफगानिस्तान की मदद जारी रखनी चाहिए. चाहे अमरीकी राष्ट्रपति की नज़र में छोटी सी मदद हो, जिसका वह मज़ाक उड़ा रहे हैं, पर इस मदद के बदले भारत को अपने पड़ोस में एक शांतिपूर्ण और सशक्त देश मिलेगा.


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