Wednesday, 7 December, 2022
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पाकिस्तान के खेतों और शहरों में बाढ़ का पानी भरने से देश के सामने आया गंभीर खाद्य संकट

रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते बाढ़ से पहले ही खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों की वजह से देश संघर्ष से गुजर रहा था. अब अफगानिस्तान को जाने वाली UN खाद्य सहायता, जो पाकिस्तान से होकर जाती थी, प्रभावित हो सकती है.

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नई दिल्ली: पाकिस्तान में खेतों में आई भारी बाढ़, फसलों की तबाही और पशुधन की मौत ने खासतौर से सर्दियों की आहट के साथ, देश की खाद्य सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं.

पहले से ही बढ़ती खाद्य क़ीमतों की मार झेल रहे पाकिस्तान में, करीब 170,000 वर्ग किलोमीटर इलाका कथित रूप से पानी में डूबा हुआ है, जिसमें 57 ज़िलों में बोई गई फसलों के 78,000 वर्ग किलोमीटर इलाक़े में बाढ़ का पानी भरा है.

ये भी अनुमान लगाया गया है कि देश की खाद्य टोकरी का लगभग 65 हिस्सा- ख़ासकर चावल, कपास, गेहूं, और प्याज़- बाढ़ के पानी में बह गया है.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने इसी हफ्ते सीजीटीएन को दिए एक इंटरव्यू में और गंभीर तस्वीर पेश करते हुए कहा कि देश की ‘करीब 80 से 90 प्रतिशत फसलें’ बाढ़ से क्षतिग्रस्त हो गई हैं.

सिंध के हिस्सों में मिर्च, गन्ना और खजूर के पेड़ भी प्रभावित हुए हैं. कृषि पर सिंध सीएम के सलाहकार मंज़ूर वासन ने डॉन को बताया कि बारिश-प्रभावित इलाकों में इस साल खरीफ की फसल के दौरान उत्पादकों को दिए गए कृषि ऋणों को फिर से निर्धारित किया जा सकता है, और कर्ज़ पर ब्याज माफ किया जा सकता है.

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बाढ़ से पहले ही पाकिस्तान यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद, बढ़ती खाद्य क़ीमतों और महंगाई की मार से जूझ रहा था. लेकिन अब संघीय सरकार का अनुमान है कि बाढ़ से हुआ आर्थिक नुकसान कम से कम 10 बिलियन डॉलर हो सकता है, जो कि देश की जीडीपी का करीब 3 प्रतिशत बैठता है.

हालांकि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने अपने बेलआउट प्रोग्राम के तहत, जो 2019 में शुरू हुआ था, सोमवार को 1.1 बिलियन डॉलर की राशि जारी किए जाने को मंज़ूरी दे दी लेकिन देश की खेती को हुए नुक़सान का अनुमान क़रीब 20 बिलियन डॉलर लगाया जा रहा है.

पाकिस्तान बिज़नेस फोरम के वाइस प्रेसिडेंट अहमद जवाद ने, जो गेहूं, मक्का, साइट्रस और गन्ना उगाते हैं, ब्लूमबर्ग से कहा, ‘कृषि क्षेत्र में उथल-पुथल मची है. बहुत से प्रमुख क्षेत्रों में कपास और सब्ज़ियों की फसल पूरी तरह से साफ हो गई है. तूफानी मौसम थमने का नाम ही नहीं ले रहा. पहले गर्मी की लहर और अब बाढ़’.

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मौजूदा सैलाब उस बाढ़ से बड़ा है, जो 1973 और 1976 में सिंधु नदी में आई थी.

‘पाकिस्तान संकट अफगानिस्तान को प्रभावित कर सकता है’

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के किसानों ने चिंता ज़ाहिर की है कि अगर अगले महीने तक खेतों से पानी बाहर नहीं निकाला गया तो वो सर्दियों की गेहूं की फसल नहीं बो पाएंगे.

सिंध प्रांत के एक किसान ने, जिसकी 2,500 एकड़ की कपास और गन्ने की फसल बाढ़ में साफ हो गई है, एएफपी से कहा, ‘हमारे पास एक महीना है. इस अवधि में अगर पानी बाहर नहीं निकाला गया, तो कोई गेहूं नहीं होगा’.

पशुधन के भारी नुक़सान के बीच, पाकिस्तान के मवेशी और डेयरी किसान संघ के अध्यक्ष ने शनिवार को प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ को पत्र लिखा, जिसमें चेतावनी दी गई कि चारे और पशुधन की कमी के चलते दूध, मीट, और अंडों के दामों में उछाल आ जाएगा.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने बार बार अंतर्राष्ट्रीय मदद के लिए गुहार लगाई है, जिसके जवाब में चीन, सऊदी अरब, क़तर, और टर्की जैसे देश आगे आए हैं.

भारत के मामले में, बृहस्पतिवार को पाकिस्तान के विदेश ऑफिस ने कहा,कि नई दिल्ली से सब्ज़ियों के आयात की अनुमति देने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है. इससे पांच दिन पहले पाकिस्तान के वित्त मंत्री मिफ्ताह इस्माइल ने खाद्य की बढ़ती क़ीमतों को देखते हुए ये विचार पेश किया था.

ये भी डर है कि पाकिस्तान के संकट का अफगानिस्तान पर भी असर पड़ सकता है, जो पहले ही पिछले साल से खाद्य संकट से जूझ रहा है, जब तालिबान के सत्ता क़ब्ज़ाने के बाद देश के नेतृत्व पर आर्थिक पाबंदियां लगा दी गई थीं

शनिवार को, यूएन विश्व खाद्य कार्यक्रम ने कहा कि अधिकतर खाद्यान्न जो वो अफगानिस्तान को भेजता है, पाकिस्तान से होकर सड़क के रास्ते भेजा जाता है, और अफगानिस्तान का ये ‘महत्वपूर्ण आपूर्ति मार्ग’ बुरी तरह प्रभावित हो सकता है.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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