नई दिल्ली: मॉरीशस के विदेश, क्षेत्रीय एकीकरण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग मंत्री धनंजय ऋतिश रामफुल ने द प्रिंट को दिए एक विशेष इंटरव्यू में शनिवार को कहा कि चागोस द्वीपसमूह मॉरीशस को सौंपे जाने में अब “कुछ दिन” या ज्यादा से ज्यादा “कुछ हफ्ते” लग सकते हैं.
रामफुल ने कहा, “इस समय हम चागोस द्वीप मॉरीशस को सौंपने को लेकर ब्रिटेन के साथ बातचीत के बीच में हैं. यह कुछ दिनों का सवाल है… कुछ हफ्तों का सवाल है… असल में यह रैटिफिकेशन का मामला है, क्योंकि हमने ब्रिटेन के साथ पहले ही एक समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं और अब उस समझौते को मंजूरी मिलनी बाकी है.”
चागोस के भविष्य को लेकर यह मुद्दा तब चर्चा में आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच हुए उस समझौते की आलोचना की, जिसके तहत द्वीपसमूह की संप्रभुता पोर्ट लुई को सौंपी जानी है.
ट्रंप ने इस समझौते को “बहुत बड़ी मूर्खता” बताया, क्योंकि यहां डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डा है जो अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है. 2025 में लंदन और पोर्ट लुई इस बात पर सहमत हुए थे कि द्वीपसमूह मॉरीशस के नियंत्रण में जाएगा, लेकिन डिएगो गार्सिया को ब्रिटेन 99 साल की लीज पर अपने पास रखेगा.
रामफुल को यह निश्चित जानकारी नहीं थी कि मौजूदा ईरान और अमेरिका-इजराइल संघर्ष में डिएगो गार्सिया अड्डे का इस्तेमाल हुआ है या नहीं. हालांकि इसका इस्तेमाल पहले भी 2024 में यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ हमलों और गाजा में मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए किया गया था.
मॉरीशस के विदेश मंत्री ने हिंद महासागर क्षेत्र के देशों से अपील की कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच समुद्री सुरक्षा के मुद्दे पर आपस में सहयोग करें और समाधान तलाशें. इसी हफ्ते अमेरिका ने हिंद महासागर में ईरान के जहाज आईआरआईएस डेना को डुबो दिया था. यह जहाज विशाखापत्तनम में आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में हिस्सा लेने के बाद भारत से लौट रहा था.
रामफुल ने आईआरआईएस डेना घटना पर कहा, “यह दिखाता है कि हमारे महासागर कितने असुरक्षित हैं. इसलिए मैंने कहा कि क्षेत्र के देशों को साथ मिलकर काम करना चाहिए, समुद्री सुरक्षा पर परियोजनाएं बनानी चाहिए और समाधान निकालने चाहिए. भारत के आईओआरए यानी इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन की अध्यक्षता संभालने से यह एक महत्वपूर्ण कदम होगा. भारत समुद्री सुरक्षा से जुड़ी तकनीक और अनुभव साझा कर सकता है, जिससे यह क्षेत्र और सुरक्षित बन सके.”
चागोस द्वीपसमूह भारतीय उपमहाद्वीप से लगभग 1,600 किलोमीटर दूर स्थित है और हिंद महासागर के विशाल क्षेत्र में रणनीतिक महत्व रखता है. इसके छह मुख्य एटोल में लगभग 600 द्वीप शामिल हैं.
1960 के दशक में ब्रिटेन ने लगभग 2,000 चागोसवासियों को जबरन वहां से हटा दिया था. इसके बाद 1965 में मॉरीशस की स्वतंत्रता से पहले ब्रिटेन ने इस द्वीपसमूह को अपनी कॉलोनी मॉरीशस से अलग कर दिया था. मॉरीशस को 1968 में लंदन से स्वतंत्रता मिली थी.
2025 के समझौते के तहत ब्रिटेन डिएगो गार्सिया पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए मॉरीशस को हर साल 101 मिलियन पाउंड देगा. अगले 99 वर्षों में यह राशि लगभग 3.4 अरब पाउंड होगी. ट्रंप ने पिछले साल फरवरी में इस समझौते का समर्थन किया था.
भारत ने इस समझौते का समर्थन किया है और लगातार चागोस द्वीपसमूह पर मॉरीशस के दावे का समर्थन करता रहा है. भारत ने लंदन के साथ बातचीत में पोर्ट लुई की मदद भी की थी.
2019 में इंटरनेशनल कोर्ट ने एक गैर-बाध्यकारी सलाह जारी करते हुए कहा था कि ब्रिटेन को यह द्वीपसमूह मॉरीशस को सौंप देना चाहिए.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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