नई दिल्ली: बांग्लादेश में एक छात्र नेता की हत्या को लेकर जारी हिंसा के बीच सोमवार को खुलना में एक और छात्र नेता को अज्ञात हमलावरों ने सिर में गोली मार दी.
मोहम्मद मोतालेब सिकदेर खुलना में नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के केंद्रीय आयोजक हैं. यह संगठन स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन से निकला है, जिसने 2024 में प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाने में अहम भूमिका निभाई थी. स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सिकदेर की हालत अब खतरे से बाहर है.
इससे पहले बांग्लादेश में छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी को गोली मारी गई थी. उनकी हत्या चुनाव आयोग द्वारा यह घोषणा किए जाने के एक दिन बाद हुई कि अगले साल 12 फरवरी को संसदीय चुनाव होंगे.
हादी की मौत की खबर सामने आने के बाद गुरुवार देर रात ढाका और बांग्लादेश के कई अन्य हिस्सों में हिंसा भड़क उठी. हादी सिंगापुर में इलाज करा रहे थे, जहां उनकी मौत हो गई.
दो प्रमुख मीडिया संस्थानों, द डेली स्टार और प्रोथोम आलो, के दफ्तरों में आग लगा दी गई. इसके अलावा धनमंडी 32 स्थित शेख मुजीबुर रहमान के आवास पर फिर से हमला किया गया. राजशाही और चटगांव में भारतीय राजनयिक मिशनों के पास भी विरोध मार्च की खबरें सामने आईं.
कट्टरपंथी मंच इंकिलाब मंचो के प्रमुख चेहरा रहे हादी को वह व्यक्ति माना जाता था जो जिसे वह “भारतीय वर्चस्व” कहते थे, उसकी तीखी आलोचना करता था. प्रदर्शनकारी नेताओं ने आरोप लगाया कि गोलीबारी के बाद हमलावर भारत भाग गए, हालांकि अब तक अधिकारियों ने इसका कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया है.
अशांति फैलने के बीच कम से कम एक सांप्रदायिक घटना की भी सूचना मिली. पुलिस ने पुष्टि की कि मायमनसिंह में एक हिंदू व्यक्ति, दीपु चंद्र दास, को कथित ईशनिंदा के आरोप में भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला.
बांग्लादेश के अंतरिम मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने शुक्रवार को हादी की मौत के बाद एक दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की और देशभर में विशेष प्रार्थनाओं के आदेश दिए. हादी का अंतिम संस्कार शनिवार को ढाका विश्वविद्यालय में किया गया.
ढाका, राजशाही और अन्य शहरों में प्रदर्शन और तेज हो गए. प्रदर्शनकारियों ने भारतीय राजनयिक परिसरों की ओर मार्च करने की कोशिश की और पूर्व सत्तारूढ़ अवामी लीग से जुड़ी संपत्तियों पर हमले किए.
राजशाही में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को भारतीय मिशन तक पहुंचने से रोक दिया. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में भारत के सहायक उच्चायोग के पास पथराव की घटनाएं दिखाई दीं. शाहबाग में प्रदर्शनकारियों ने ‘दिल्ली ना ढाका? ढाका, ढाका’ जैसे नारे लगाए और भारतीय दूतावास को घेरने की मांग की.
इस हफ्ते की शुरुआत में ढाका में पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल कर भीड़ को तितर-बितर किया, जो भारत के उप उच्चायुक्त सहित भारतीय राजनयिक आवासों के बाहर जुटने की कोशिश कर रही थी. NCP के सदस्य भी इन प्रदर्शनों में शामिल हुए. उन्होंने भारत विरोधी नारे लगाए और हादी के कथित हत्यारों के प्रत्यर्पण की मांग की.
रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अतिरिक्त आईजीपी ने कहा कि हादी के हत्यारे के ठिकाने के बारे में कोई खास जानकारी नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस बात की “कोई भरोसेमंद जानकारी” नहीं मिली है कि हमलावर देश छोड़कर चला गया है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
यह भी पढ़ें: पंजाब में आपराधिक हिंसा का नया और खतरनाक दौर — ‘गैंग और आतंकवाद का मेल’
