कोलकाता: प्रधानमंत्री तारीक रहमान के नेतृत्व में बने नए कैबिनेट में एकमात्र हिंदू मंत्री के रूप में निताई रॉय चौधरी के सामने बड़ी जिम्मेदारी है. उन्हें बांग्लादेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दोबारा मजबूत करना है.
78 साल के चौधरी ने कहा कि बांग्लादेश को दुनिया में भीड़ हिंसा और सांप्रदायिक झड़पों के लिए नहीं, बल्कि अपने गीत-संगीत, नृत्य, फिल्मों और साहित्य के लिए जाना जाना चाहिए.
उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “सिर्फ ढाका के मशहूर सांस्कृतिक केंद्र ही नहीं. अगर आप गांवों में जाएंगे तो देखेंगे कि हमारी सांस्कृतिक विरासत कितनी समृद्ध है. हमारी अपनी बंगाली परंपराएं हैं, जिन पर इस्लामी, हिंदू, बौद्ध और जनजातीय प्रभावों की गहरी छाप है.”
उन्होंने कहा, “चाहे देश के अंदरूनी इलाकों की जामदानी बुनाई हो, या ढाका की सड़कों पर रंग-बिरंगी रिक्शा पेंटिंग, हमारे बाउल गीत हों या हमारे ओटीटी प्लेटफॉर्म की पेशकश, हमें अपने भीतर की सबसे अच्छी चीज दुनिया के सामने रखनी चाहिए.”
चौधरी ने माना कि हाल के दिनों में चुनाव से पहले देश की स्थिति को लेकर काफी नकारात्मक खबरें आई हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि वह “उस दिन इस विषय पर बात नहीं करना चाहते जब बांग्लादेश एक नई सुबह के साथ जागा है.”
डेली स्टार की कॉलम लेखिका तसनीम तैय्यब ने लिखा कि अगर 2025 में बांग्लादेश के नागरिक जीवन में कोई एक परेशान करने वाली बात लगातार दिखी, तो वह सिर्फ अस्थिर राजनीति, भीड़ की घटनाओं या आर्थिक परेशानियों तक सीमित नहीं थी.
उन्होंने दिसंबर 2025 में लिखा, “यह हमारी सांस्कृतिक दुनिया में भी चलता है — और कई बार हिंसक रूप में. तोड़े गए संगीत मंचों, चुप करा दिए गए लोक गायकों, रद्द किए गए त्योहारों और जलाई गई संस्थाओं के जरिए लोग धीरे-धीरे यह सीख रहे हैं कि संस्कृति भी हिंसा और डर की जगह बन सकती है.”
उन्होंने लिखा कि अगर 2025 में सांस्कृतिक क्षेत्र सिमटता हुआ दिखा, तो 2026 यह परखेगा कि क्या बांग्लादेशी लोगों में इतना संयम और इच्छा है कि इस सिमटने को स्थायी होने से रोका जा सके.
चौधरी ने कहा, “यह सरकार कला और संस्कृति को सक्रिय रूप से बढ़ावा देगी और यह सुनिश्चित करेगी कि हमारी प्रतिभाशाली महिलाएं सार्वजनिक और सांस्कृतिक स्थानों से दूर न हों. हम समाज के हर वर्ग से रचनात्मकता को प्रोत्साहित और बढ़ावा देंगे.”
अन्य अल्पसंख्यक नेता
चौधरी एक अनुभवी राजनेता और बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील हैं. वह बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के उपाध्यक्ष हैं.
वह 1988 में पहली बार मगुरा-2 सीट से जातिया संसद के लिए चुने गए थे. 12 फरवरी के चुनाव में उन्होंने जमात-ए-इस्लामी के मुस्तरशिद बिल्लाह को स्पष्ट अंतर से हराया. चौधरी 1990 में हुसैन मुहम्मद इरशाद के तहत युवा और खेल मंत्री रह चुके हैं, उसके बाद वह बीएनपी में शामिल हुए.
अल्पसंख्यक समुदायों से तीन अन्य उम्मीदवार भी चुनाव जीते. सभी बीएनपी से हैं. गोयेस्वर चंद्र रॉय, जो बीएनपी की सबसे ऊंची नीति-निर्माण स्थायी समिति के सदस्य हैं. साचिंग प्रू, जो बीएनपी के वरिष्ठ नेता और बौद्ध धर्म का पालन करने वाले हैं, और चकमा जनजातीय समुदाय से आने वाले दिपेन देवान भी हाल ही में बने कैबिनेट का हिस्सा हैं.
चौधरी ने कहा कि रहमान ने खुद को सभी धार्मिक और जातीय समूहों के लिए समावेशी और सुरक्षित बांग्लादेश के समर्थक के रूप में पेश किया है.
उन्होंने कहा, “वह अक्सर कहते हैं कि धर्म व्यक्तिगत है, लेकिन राज्य सबका है. वह मार्टिन लूथर किंग जूनियर के ‘आई हैव अ ड्रीम’ की भावना को ‘आई हैव अ प्लान’ कहकर आगे बढ़ाते हैं. और वह योजना एक समावेशी और प्रगतिशील बांग्लादेश की है.”
उन्होंने आगे कहा, “बीएनपी धार्मिक अल्पसंख्यक या बहुसंख्यक की सोच को नहीं मानती. हम बांग्लादेश में सभी के लिए समान अधिकारों में विश्वास करते हैं. एक मुस्लिम के अधिकार किसी हिंदू से अलग नहीं हैं.”
चौधरी ने कहा कि भारत के साथ संबंध बहुत महत्वपूर्ण होंगे. “भारत और बांग्लादेश के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्ते हैं. हालांकि हमारी सरकार का एजेंडा बांग्लादेश फर्स्ट है. हम उसी पर कायम रहेंगे.”
चौधरी के अनुसार 2026 के चुनाव ने दिखाया कि भाषा और संस्कृति बांग्लादेशियों को धर्म से ज्यादा जोड़ती है.
उन्होंने कहा, “लोगों को डर था कि बांग्लादेश धार्मिक कट्टरता की ओर मुड़ जाएगा. लेकिन लोगों ने एक निर्णायक और प्रगतिशील सरकार को वोट दिया है. बांग्लादेश का जन्म ही इसलिए हुआ था क्योंकि हमने भाषा और संस्कृति के लिए कट्टरता को ठुकराया था. हम उसी को कायम रखेंगे.”
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