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Thursday, 8 January, 2026
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योगी सरकार का विज़न: ग्रीन एनर्जी से संचालित होगी लखनऊ की एआई सिटी

एआई सिटी के विकास में ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट को अनिवार्य किया जाएगा. भवन निर्माण में ऊर्जा-कुशल सामग्री, प्राकृतिक रोशनी का अधिकतम उपयोग और जल संरक्षण से जुड़ी प्रणालियों को शामिल किया जाएगा.

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लखनऊ: लखनऊ में प्रस्तावित एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) सिटी को पूरी तरह ग्रीन एनर्जी आधारित मॉडल पर विकसित किया जाएगा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना में ऊर्जा आपूर्ति के लिए सोलर और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे स्वच्छ स्रोतों को अनिवार्य किया जाएगा. सरकार का उद्देश्य एआई और डेटा आधारित तकनीकों के विस्तार के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी समान प्राथमिकता देना है.

प्रदेश सरकार के अनुसार, एआई सिटी में स्थापित होने वाले डेटा सेंटर्स और हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की ऊर्जा जरूरतें पारंपरिक ईंधनों पर निर्भर नहीं होंगी. इसके लिए सौर ऊर्जा आधारित सिस्टम विकसित किए जाएंगे, जिससे न केवल कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी बल्कि ऊर्जा लागत भी नियंत्रित रहेगी. यह मॉडल भविष्य की तकनीकी परियोजनाओं के लिए एक मानक के रूप में काम करेगा.

एआई सिटी परियोजना में ग्रीन हाइड्रोजन को भी अहम स्थान दिया जाएगा. उत्तर प्रदेश सरकार की योजना एआई सिटी के ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम, औद्योगिक संचालन और स्मार्ट सुविधाओं में ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग की है. इससे उत्तर प्रदेश उन अग्रणी राज्यों में शामिल होगा, जो हाइड्रोजन आधारित स्वच्छ ऊर्जा को व्यवहारिक स्तर पर अपनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश को एक लीडर स्टेट के रूप में देखा जा रहा है.

एआई सिटी में बनने वाले डेटा सेंटर्स को वैश्विक पर्यावरण और ऊर्जा दक्षता मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा. ग्रीन एनर्जी आधारित डेटा सेंटर्स से प्रदेश को वैश्विक तकनीकी कंपनियों का भरोसा मिलेगा. प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशक अब उन्हीं स्थानों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जहां पर्यावरणीय उत्तरदायित्व का स्पष्ट रोडमैप मौजूद हो, और उत्तर प्रदेश इसी दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है.

एआई सिटी के विकास में ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट को अनिवार्य किया जाएगा. भवन निर्माण में ऊर्जा-कुशल सामग्री, प्राकृतिक रोशनी का अधिकतम उपयोग और जल संरक्षण से जुड़ी प्रणालियों को शामिल किया जाएगा.

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