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Saturday, 21 March, 2026
होमरिपोर्टराष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मथुरा के दानघाटी मंदिर में पूजा की, गोवर्धन परिक्रमा की

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मथुरा के दानघाटी मंदिर में पूजा की, गोवर्धन परिक्रमा की

अंतरराष्ट्रीय वन दिवस पर मानस गंगा में पूजा और पौधारोपण भी किया, वृंदावन में प्रेमानंद महाराज से की मुलाकात.

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मथुरा (उत्तर प्रदेश): राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को मथुरा के दानघाटी मंदिर में पूजा-अर्चना की और पवित्र गोवर्धन परिक्रमा की.

राष्ट्रपति मुर्मू ने मानस गंगा सरोवर में भी पूजा की और अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर एक पौधा लगाया.

राष्ट्रपति भवन की ओर से एक्स पर पोस्ट में कहा गया, “राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मथुरा के दानघाटी मंदिर में दर्शन और आरती की तथा पवित्र गोवर्धन परिक्रमा की. परिक्रमा के दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर एक पौधा भी लगाया. राष्ट्रपति ने पवित्र सरोवर मानस गंगा में भी पूजा-अर्चना की.”

शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उत्तर प्रदेश के वृंदावन में श्री हित राधा केली कुंज आश्रम में पूज्य संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की.

भजन मार्ग ने एक्स पर पोस्ट में लिखा, “भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पूज्य महाराज जी से मिलने पहुंचीं. भजन मार्ग | पूज्य वृंदावन रसिक संत श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण महाराज, हित राधा केली कुंज, वराह घाट, वृंदावन धाम.”

प्रेमानंद महाराज से मुलाकात के अलावा राष्ट्रपति मुर्मू ने वृंदावन में बाबा नीम करोली जी की पवित्र समाधि स्थल पर भी जाकर पूजा-अर्चना की.

इस दौरान उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी राष्ट्रपति के साथ मौजूद रहीं.

जन भवन उत्तर प्रदेश ने एक्स पर पोस्ट में इस दौरे की जानकारी दी.

पोस्ट में कहा गया, “माननीय द्रौपदी मुर्मू और राज्य की माननीय आनंदीबेन पटेल आज वृंदावन में बाबा नीम करोली की पवित्र समाधि स्थल पर पहुंचीं और श्रद्धा भाव से दर्शन-पूजन किया.”

इससे पहले गुरुवार को राष्ट्रपति मुर्मू ने अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर का दौरा किया और रामलला के दर्शन किए. उन्होंने मंदिर परिसर के विभिन्न स्थानों पर दर्शन और आरती की तथा श्री राम यंत्र स्थापना और पूजन भी किया.

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि प्रभु श्री राम की जन्मस्थली अयोध्या की पवित्र धूल को स्पर्श करना उनके लिए सर्वोच्च सौभाग्य है. उन्होंने इसे एक विशेष अवसर बताया, क्योंकि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से संवत्सर 2083 की शुरुआत और नवरात्रि का पहला दिन भी था.

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