पटना: भारतीय नृत्य कला मंदिर परिसर शुक्रवार को कला, संस्कृति और सृजनात्मक ऊर्जा से सराबोर नजर आया, जब कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित ‘वसंतोत्सव’ का भव्य शुभारंभ हुआ. यह आयोजन केवल ऋतुराज वसंत के स्वागत का उत्सव नहीं था, बल्कि कला के पुनर्जीवन और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रतीक भी बना.
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि कला एवं संस्कृति मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने दीप प्रज्वलन कर किया. इस अवसर पर विभागीय सचिव प्रणव कुमार (भा.प्र.से.) विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे.
अपने संबोधन में मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने कहा, “आज का दिन एक दिव्य संयोग है. एक ओर माँ सरस्वती की आराधना हो रही है, वहीं दूसरी ओर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती मनाई जा रही है. वसंत प्रकृति का नवजीवन और संस्कृति का उल्लास है.”
उन्होंने कलाकारों से मुख्यमंत्री कलाकार पेंशन योजना का लाभ उठाने की अपील की और कहा कि पुनर्जीवित मुक्ताकाश मंच आने वाले समय में कला-साधना का प्रमुख केंद्र बनेगा.
विभागीय सचिव प्रणव कुमार ने कहा कि मुक्ताकाश मंच का जीर्णोद्धार विभाग का एक संकल्प था, जो आज साकार हुआ है.
उन्होंने कला-प्रेमियों से सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और आगे बढ़ाने का आह्वान किया.
सांस्कृतिक कार्य निदेशालय की निदेशक रूबी ने वसंतोत्सव और सरस्वती पूजा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व नवजीवन और नवसृजन का प्रतीक है तथा खुला मंच कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अनूठा अवसर देगा.
स्वागत भाषण में भारतीय नृत्य कला मंदिर की प्रशासी पदाधिकारी कहकशां ने बताया कि लगभग एक दशक बाद मुक्ताकाश मंच को पुनः कला-प्रेमियों को समर्पित किया गया है, जो मंत्री और विभागीय सचिव के मार्गदर्शन से संभव हो सका.
कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. मुंबई से आए कलाकार देवेश मिरदानी की फ्यूजन नृत्य प्रस्तुति में परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम दिखा, जबकि गायक आलोक चौबे के सुरों ने समां बांध दिया. उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत ‘फूलों की होली’ और ‘मयूर नृत्य’ ने मंच पर ब्रज संस्कृति का रंग बिखेर दिया.
कुल मिलाकर, वसंतोत्सव की यह शाम पटना के सांस्कृतिक जीवन में उल्लास, सौंदर्य और सृजन की नई ऊर्जा भरती नजर आई.
