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Monday, 9 March, 2026
होमरिपोर्टईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई: पिता के भरोसेमंद, गेटकीपर और पावर ब्रोकर

ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई: पिता के भरोसेमंद, गेटकीपर और पावर ब्रोकर

मोजतबा की नियुक्ति को पश्चिम एशिया से आगे भी एक रणनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि पहले उनका रुख काफी सख्त रहा है.

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नई दिल्ली: ईरान के आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की इज़रायल-अमेरिका के संयुक्त ऑपरेशन में हत्या के 12 दिन बाद, असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने उनके बेटे सैयद मोजतबा होसेनी ख़ामेनेई को इस्लामिक रिपब्लिक का तीसरा सुप्रीम लीडर चुन लिया है.

तेहरान समय के अनुसार आधी रात के तुरंत बाद जारी बयान में, 88-सदस्यों वाली मौलवियों की इस संस्था ने इस बदलाव की पुष्टि की, जो यह संकेत देता है कि सख्त रुख वाला गुट अभी भी नियंत्रण में है. बयान में कहा गया, “निर्णायक मतदान के बाद, असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने आयतुल्लाह सैयद मोजतबा होसेनी खामेनेई को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की पाक व्यवस्था का तीसरा नेता नियुक्त किया है.”

इससे 56-वर्षीय सैयद मोजतबा अब सभी सैन्य और सरकारी मामलों में अंतिम अधिकार बन गए हैं.

यह बदलाव उनके पिता और पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के दो हफ्ते से भी कम समय बाद हुआ. 28 फरवरी को इज़रायली वायुसेना ने अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर शुरुआती हमले में उन्हें मार दिया था.

इस बदलाव के दौरान तेहरान में भारी बमबारी देखी गई, जिसमें खास तौर पर ईंधन डिपो और सैन्य ढांचे, जैसे मिसाइल सिस्टम, को निशाना बनाया गया. इसके कारण राजधानी के ऊपर घने धुएं का गुबार छा गया था.

सैयद मोजतबा खामेनेई कौन हैं?

1969 में ईरान के उत्तर-पूर्व में स्थित तीर्थ शहर मशहद में जन्मे मोजतबा का पालन-पोषण एक धार्मिक माहौल में हुआ. उस समय उनके पिता ईरान के शासक शाह वंश के खिलाफ सक्रिय क्रांतिकारी थे, जो 1979 तक देश के शासक थे.

ईरान-इराक युद्ध के दौरान जब उन्होंने अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड की एक यूनिट हबीब इब्न मज़ाहिर बटालियन के तहत सेवा दी, तब उनकी राजनीतिक ओहदेदारी काफी बढ़ी.

अपनी सेवा के दौरान उन्होंने कई ऐसे अधिकारियों से संपर्क बनाए, जो बाद में इस्लामिक रिपब्लिक की सुरक्षा व्यवस्था में ऊंचे पदों तक पहुंचे.

मोजतबा ने हमेशा अपनी सार्वजनिक छवि को सीमित रखा है, क्योंकि उन्होंने कभी किसी राजनीतिक पद पर काम नहीं किया. सार्वजनिक रूप से उन्हें क़ुम की मदरसों से व्यापक धार्मिक शिक्षा पाने वाले एक मौलवी के रूप में देखा जाता है.

उनका प्रभाव तब काफी बढ़ गया जब 1989 में उनके पिता अली खामेनेई सुप्रीम लीडर बने. उस समय वे उनके भरोसेमंद, गेटकीपर और पावर ब्रोकर की तरह काम करते थे. इससे उन्हें एक बड़ा कारोबारी नेटवर्क बनाने और सुरक्षा व्यवस्था के भीतर गहरे संबंध बनाए रखने में भी मदद मिली.

सत्ता और रणनीतिक प्रभाव

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) में उनकी ताकत काफी बढ़ गई, क्योंकि उनके पिता अपने कार्यकाल के दौरान लगातार इस बल का समर्थन करते रहे. कुद्स फोर्स और बसीज के कमांडरों के साथ नज़दीकी काम करने से मोजतबा के संबंध और मजबूत हो गए.

ईरानी व्यवस्था में उनकी पहुंच काफी मजबूत मानी जाती है. 2000 के दशक के आखिर में प्रकाशित अमेरिकी कूटनीतिक केबल्स में बताया गया था कि वे अपने पिता के “मुख्य गेटकीपर” थे और उन्होंने सिस्टम के भीतर अपनी अलग ताकत भी बना ली थी.

यह भी माना जाता है कि अधिकारियों के साथ नजदीकी संबंधों की वजह से उन्हें अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के महत्वपूर्ण भंडारों तक पहुंच है.

नागरिक सरकार पर उनके प्रभाव का भी ज़िक्र मिलता है. इसमें सख्त रुख वाले राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के दोबारा चुनाव में उनका समर्थन भी शामिल है. उनके इसी व्यवहार के कारण 2019 में अमेरिकी ट्रेजरी ने मोजतबा पर प्रतिबंध लगा दिया था.

पश्चिम के लिए एक रणनीतिक संकेत

मोजतबा की नियुक्ति को पश्चिम एशिया से बाहर भी एक रणनीतिक संकेत माना जा रहा है, क्योंकि पहले उनका रुख काफी सख्त रहा है. उन्हें चुनकर असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने नरमी की मांगों को खारिज कर दिया है.

उनकी नियुक्ति पर पश्चिमी देशों, खासकर इज़रायल, ने कड़ी आलोचना की है. इजरायल ने तो असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स की बैठक को बाधित करने की भी चेतावनी दी थी.

इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) ने एक्स पर पोस्ट कर चेतावनी देते हुए कहा, “तानाशाह खामेनेई को इनेक्टिव करने के बाद, ईरान का आतंकवादी शासन खुद को फिर से खड़ा करने और नया लीडर चुनने की कोशिश कर रहा है.”

IDF ने आगे कहा, “हम आपको बताना चाहते हैं कि इजरायल स्टेट का हाथ हर उस उत्तराधिकारी और हर उस व्यक्ति तक पहुंचेगा जो किसी उत्तराधिकारी को नियुक्त करने की कोशिश करेगा. हम उन सभी लोगों को चेतावनी देते हैं जो उत्तराधिकारी चुनने की बैठक में हिस्सा लेना चाहते हैं कि हम आपको निशाना बनाने में भी हिचकिचाएंगे नहीं. यह एक चेतावनी है!”

पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने मोजतबा को “कमजोर” और “अस्वीकार्य” बताया था और कहा था कि अमेरिका को भी चयन प्रक्रिया में अपनी राय देनी चाहिए. ट्रंप ने पत्रकारों से कहा था, “अगर उसे हमारी मंजूरी नहीं मिलती है, तो वह ज्यादा समय तक टिक नहीं पाएगा.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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