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Friday, 27 February, 2026
होमरिपोर्टअलीराजपुर में चंद्रशेखर आजाद की 95वीं पुण्यतिथि पर सीएम मोहन यादव ने दी श्रद्धांजलि

अलीराजपुर में चंद्रशेखर आजाद की 95वीं पुण्यतिथि पर सीएम मोहन यादव ने दी श्रद्धांजलि

सीएम यादव ने जिले के चंद्रशेखर आजाद नगर में स्थित आजाद की कुटिया ‘आजाद स्मृति मंदिर’ का भी दौरा किया और वहां लगी उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया.

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अलीराजपुर (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव शुक्रवार को अलीराजपुर जिले में स्थित स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद के जन्मस्थान पहुंचे. उनकी 95वीं पुण्यतिथि पर सीएम ने आजाद की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी.

सीएम यादव ने जिले के चंद्रशेखर आजाद नगर में स्थित आजाद की कुटिया ‘आजाद स्मृति मंदिर’ का भी दौरा किया और वहां लगी उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. इस दौरान उन्होंने स्थल पर लगाई गई प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया, जिसमें स्वतंत्रता सेनानी के जीवन और योगदान को प्रदर्शित किया गया था.

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए आजाद के बलिदान को याद किया और उन्हें मध्य प्रदेश का गौरव पुत्र बताया.

सीएम यादव ने कहा, “आज मैं हमारे स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद के जन्मस्थान पर आया और उनके गुणों तथा बलिदान को याद किया. वे एक साहसी क्रांतिकारी थे, जिन्होंने विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाई. मुझे खुशी है कि हमारे आदिवासी क्षेत्र के वीरों ने अंग्रेजों के खिलाफ देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी. उनका योगदान अतुलनीय है. मैं उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं.”

चंद्रशेखर आजाद एक क्रांतिकारी थे, जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में युवाओं का एक समूह बनाया और उसका नेतृत्व किया. अपने अधिकांश साथियों के शहीद होने या जेल जाने के बाद उन्होंने हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) का पुनर्गठन किया. संगठन के संस्थापक राम प्रसाद बिस्मिल को 1927 में अंग्रेजों ने फांसी दे दी थी, जिसके बाद आजाद ने इसकी कमान संभाली.

ब्रिटिश सरकार के खिलाफ अपने जोश और साहस के लिए प्रसिद्ध आजाद ने अगस्त 1925 में शाहजहांपुर से लखनऊ जा रही ट्रेन की चेन खींचकर सरकारी खजाना लूटा था.

23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश में जन्मे चंद्रशेखर आजाद का 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद में निधन हुआ. वे बचपन से ही देशभक्ति की भावना से प्रेरित थे और मात्र 15 वर्ष की उम्र में असहयोग आंदोलन में शामिल हो गए थे. उनका प्रसिद्ध नारा था, “हम दुश्मन की गोलियों का सामना करेंगे, हम आजाद थे और आजाद ही रहेंगे.”

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