पटना: बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए राज्य की कला, संस्कृति और विरासत को बढ़ावा देने के लिए कई अहम घोषणाएं की हैं. सरकार ने कलाकारों को आर्थिक सुरक्षा देने, सांस्कृतिक ढांचे को मजबूत करने और बिहार की पहचान को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने का लक्ष्य रखा है.
मुख्यमंत्री कलाकार पेंशन योजना के तहत जरूरतमंद कलाकारों को हर महीने 3,000 रुपये दिए जा रहे हैं. पहले चरण में 85 कलाकारों को इसका लाभ मिला है. वहीं बिहार कला सम्मान के तहत 52 कलाकारों को 27 लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी गई. अब तक 5,000 से ज्यादा कलाकार आर्टिस्ट रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर पंजीकरण करा चुके हैं.
राज्य में दरभंगा, पूर्णिया, गया, सारण और बेगूसराय में अटल कला भवन बनाए गए हैं, जबकि बेतिया, मोतिहारी और मुजफ्फरपुर में बड़े प्रेक्षागृह बन रहे हैं. गुरु-शिष्य परंपरा योजना के तहत पारंपरिक कलाओं को बचाने के लिए कलाकारों और युवाओं को आर्थिक सहायता दी जा रही है.
फिल्म क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए बिहार फिल्म प्रोत्साहन नीति लागू की गई है और 38 से ज्यादा फिल्मों और वेब सीरीज की शूटिंग को मंजूरी मिली है. राज्य में फिल्म सिटी और फिल्म संस्थान खोलने की भी तैयारी है.
सरकार छठ पूजा को UNESCO की विश्व अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कराने की कोशिश कर रही है. इसके अलावा संग्रहालयों के आधुनिकीकरण, ऐतिहासिक स्थलों के विकास और ‘म्यूजियम ऑन व्हील्स’ जैसी योजनाएं भी शुरू की जाएंगी.
कला एवं संस्कृति मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने कहा कि 400 करोड़ रुपये के प्रावधान वाला यह बजट बिहार की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करेगा और कला के माध्यम से रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा देगा.
