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Sunday, 4 January, 2026
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पुणे नगर निगम चुनाव में विरोध के बाद महायुति की उम्मीदवार सूची से हटाई गई पूजा मोरे-जाधव कौन हैं

टिकट कटने के बाद एक भावुक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूजा ने कहा कि वह बीड के एक किसान परिवार से हैं और पिछले 10-12 सालों से राजनीति में अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रही थीं.

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मुंबई: इस हफ्ते मीडिया से बातचीत के दौरान पूजा मोरे-जाधव ने पुणे नगर निगम चुनाव के लिए महायुति की उम्मीदवार सूची से हटाए जाने को “एक छोटी सी गलती की सज़ा” बताया. जिन लोगों को उनकी सोशल मीडिया मौजूदगी की जानकारी है, उनके लिए यह इशारा पहलगाम हमले के बाद पोस्ट किए गए एक वीडियो की ओर था.

हालांकि, पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय पदाधिकारियों के बीच नाराज़गी सिर्फ उस वीडियो को लेकर नहीं थी. भाजपा द्वारा उन्हें वार्ड नंबर 2, फुलेनगर-नागपुरचॉल से रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के कोटे से टिकट दिए जाने के बाद उनके अन्य विवादित वीडियो भी सोशल मीडिया पर फिर से सामने आ गए. इसी दबाव के चलते भाजपा को उनकी उम्मीदवारी वापस लेनी पड़ी.

पूजा मोरे-जाधव ने 2017 में मराठा आंदोलन में हिस्सा लिया था. उस समय का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह कथित तौर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उनकी पत्नी की आलोचना करती दिखती हैं. उस वीडियो में टिप्पणी थी, “देवेंद्र फडणवीस जी, मैं मराठा आरक्षण मांग रही हूं, आपकी पत्नी को नहीं.”

इसके अलावा 2022 की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ पूजा मोरे-जाधव की एक तस्वीर भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है.

केंद्रीय मंत्री और पूर्व पुणे मेयर मुरलीधर मोहोल ने मीडिया से कहा, “पार्टी कार्यकर्ता उन्हें टिकट दिए जाने से नाराज़ थे. उनका कहना था कि टिकट वफादार कार्यकर्ताओं को मिलना चाहिए, उन्हें नहीं. इसलिए उनसे नाम वापस लेने को कहा गया और पार्टी ने उनकी जगह एक अन्य निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थन करने का फैसला किया.”

उम्मीदवारी वापस लेने के तुरंत बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूजा मोरे-जाधव भावुक हो गईं और उन्होंने अपनी ज़िंदगी की कहानी सुनाई और अपने विवादों पर सफाई दी.

उन्होंने कहा, “राजनीति करते समय हम भावनात्मक रूप से भी सोचते हैं, क्योंकि हमारा कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं है. इसी वजह से मैंने अपनी उम्मीदवारी वापस लेने का फैसला किया.”

पूजा मोरे-जाधव कौन हैं

पूजा के सोशल मीडिया प्रोफाइल के अनुसार, उनके पास कानून की डिग्री है. 2024 में उन्होंने बीड जिले की गेवराई विधानसभा सीट से युवराज संभाजी छत्रपति के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र स्वराज्य पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था. हालांकि उन्हें सिर्फ 1,710 वोट मिले थे.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोरे-जाधव ने कहा कि वह बीड के एक गरीब किसान परिवार से आती हैं और पिछले 10 से 12 साल से राजनीति में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही हैं.

उन्होंने कहा, “मेरा कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं है. लेकिन मैं बीड में किसानों के लिए काम कर रही थी और इसी वजह से 21 साल की उम्र में पंचायत समिति के लिए चुनी गई.”

उन्होंने यह भी बताया कि महाराष्ट्र स्वराज्य पार्टी में काम करने के दौरान उनकी मुलाकात अपने पति धनंजय जाधव से हुई थी और करीब आठ महीने पहले दोनों की शादी हुई.

उनके इंस्टाग्राम प्रोफाइल के अनुसार, शादी में भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस, आशीष शेलार, मुरलीधर मोहोल और शरद पवार के भतीजे रोहित पवार भी शामिल हुए थे.

शादी के बाद पूजा मोरे-जाधव पुणे आ गईं. वह और उनके पति धनंजय जाधव फाउंडेशन के ज़रिए महाराष्ट्र में आरक्षण की वकालत करते हैं. इस फाउंडेशन ने पिछले साल जुलाई में ‘अखाड़ा संडे’ के मौके पर पुणे में 5,000 किलो चिकन बांटा था.

वह एनसीपी एसपी से भी जुड़ी रही हैं और लोकसभा चुनाव 2024 में बीड से पार्टी के उम्मीदवार बजरंग सोनावणे के लिए प्रचार भी किया था.

विवादों पर बात करते हुए उन्होंने यह आरोप खारिज किया कि उन्होंने कभी देवेंद्र फडणवीस की आलोचना की थी. उनका कहना था कि वह बयान मराठा क्रांति मोर्चा की किसी “और लड़की” ने दिया था, लेकिन सोशल मीडिया पर वह टिप्पणी उन्हीं से जोड़ी जा रही है.

पहलगाम हमले के बाद अपने वीडियो में उन्होंने कहा था, “मैं हिंदू हूं और सुबह से कश्मीर में हूं. मैं आपको बता दूं, यहां के मुसलमान हमारे साथ हैं. वे कंधे से कंधा मिलाकर हमारे साथ खड़े हैं. किसी ने मुझसे मेरा धर्म नहीं पूछा. किसी ने हमें धमकी नहीं दी. हमलावर लोगों को कश्मीर से डराना चाहते हैं. लेकिन कश्मीर के लोग, चाहे हिंदू हों या मुसलमान, हमें यहां चाहते हैं. वे हमारी मदद कर रहे हैं, हमारी सुरक्षा कर रहे हैं. यहां कोई हिंदू-मुसलमान नहीं है. हम सब इंसान हैं. इंसानियत ज़िंदा रहने दें. इस खूबसूरत ज़मीन को नफरत से न बांटें.”

बाद में अपने वीडियो को लेकर सफाई देते हुए उन्होंने कहा, “मैं यह संदेश देना चाहती थी कि आतंकी हमारी आपसी सद्भावना को तोड़ना चाहते हैं, इसलिए मैंने वैसी प्रतिक्रिया दी. लेकिन जब घायलों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं, तो मुझे पूरी तस्वीर समझ आई. इसके बाद मैं सोशल मीडिया ट्रोलिंग का शिकार हो गई. मैंने बाद में अपना बयान बदला भी था, लेकिन वह वायरल नहीं हुआ.”

उन्होंने पहलगाम हमले के बाद अपने बयान को गलती मानते हुए कहा, “कई बड़े लोग भी गलतियां करते हैं, लेकिन उन्हें ट्रोल नहीं किया जाता. आम लोगों को ही ट्रोल किया जाता है.”

(इस  रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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