नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने शुक्रवार को पहली बार अपनी ही पार्टी के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बात की. उन्होंने एक भावुक वीडियो जारी किया, जिसमें पूछा कि उन्हें राज्यसभा के डिप्टी लीडर के पद से क्यों हटाया गया और कहा कि संसद में “आम आदमी” के मुद्दे उठाने की सज़ा उन्हें दी गई है.
‘खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं हूं’ नाम के वीडियो में चड्ढा—जो संसद के बाहर खड़े नज़र आ रहे हैं, ने सीधे समर्थकों से बात की और पूछा कि उन्होंने ऐसा क्या किया कि उनके खिलाफ यह कार्रवाई की गई.
सांसद, जिन्हें कभी AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल का करीबी माना जाता था, ने कहा, “मैं ऐसे मुद्दे उठाता हूं जिन पर आमतौर पर संसद में चर्चा नहीं होती, मैं लोगों की चिंताओं की बात करता हूं, लेकिन क्या जनता के मुद्दे उठाना, लोगों के लिए बोलना, अपराध है? क्या मैंने कुछ गलत किया?”
गुरुवार को AAP ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर पंजाब से पार्टी के सांसद अशोक मित्तल को चड्ढा की जगह नया डिप्टी लीडर नामित किया था.
चड्ढा ने कहा कि वह समझ नहीं पा रहे हैं कि जिन मुद्दों को उठाने के लिए पार्टी बनी थी, उन्हीं मुद्दों को उठाने पर उन्हें क्यों चुप कराया जा रहा है.
उन्होंने पूछा, “आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय से कहा है कि मुझे संसद में बोलने की अनुमति नहीं दी जाए, लेकिन कोई मुझे चुप क्यों कराना चाहेगा? मैं ‘आम आदमी’ के लिए बोलता हूं. मैंने डिलीवरी वर्कर्स, एयरपोर्ट पर महंगे खाने, टोल प्लाजा की ‘लूट’ जैसे मुद्दे उठाए. जब मैंने ये मुद्दे उठाए तो आम आदमी को फायदा हुआ, तो पार्टी को इससे क्या नुकसान हो रहा था.”
अपने समर्थकों से साथ बनाए रखने की अपील करते हुए उन्होंने कहा: “मैं आपसे और आपके लिए हूं–मेरा हाथ और साथ मत छोड़िए.”
Silenced, not defeated
My message to the ‘aam aadmi’
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खामोश करवाया गया हूँ, हारा नहीं हूँ'आम आदमी’ को मेरे संदेश pic.twitter.com/poUwxsu0S3
— Raghav Chadha (@raghav_chadha) April 3, 2026
उन्होंने राजनीतिक वापसी का संकेत भी दिया और पार्टी को चेतावनी दी कि उनकी चुप्पी को कमजोरी न समझा जाए. उन्होंने कहा, “मेरी चुप्पी को हार मत समझना, मैं उस नदी की तरह हूं जो समय आने पर बाढ़ बन जाती है.”
अपने एक्स अकाउंट पर उन्होंने संसद में दिए गए अपने भाषणों का एक वीडियो पोस्ट किया, जिसके साथ सिर्फ एक कैप्शन—एक नज़र वाला इमोजी, लिखा था.
चड्ढा को पद से हटाए जाने की खबर ऐसे समय आई है जब उनके और केजरीवाल के बीच मतभेद की लगातार चर्चा हो रही है. चड्ढा कई अहम AAP सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर नहीं आए और जब पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन शामिल हैं—को भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल भेजा गया था, तब पार्टी के सड़क विरोध प्रदर्शनों में भी उन्होंने हिस्सा नहीं लिया. जमानत मिलने के बाद हुए जश्न से भी वह दूर रहे.
चड्ढा, जो पार्टी की शुरुआत से AAP से जुड़े रहे हैं, तेज़ी से आगे बढ़े: 26 साल की उम्र में राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बने, फिर 2020 दिल्ली विधानसभा चुनाव जीता और बाद में AAP के उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा पहुंचे. उन्हें केजरीवाल का खास माना जाता था, पार्टी के संसदीय समूह के सबसे युवा सांसद थे और सबसे प्रमुख प्रवक्ताओं में से एक थे.
उनकी जगह आए मित्तल ने इस बदलाव को ज्यादा महत्व नहीं दिया और इसे सामान्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया बताया. उन्होंने कहा कि पार्टी में सब ठीक है. उन्होंने कहा, “राघव से पहले एन.डी गुप्ता उपनेता थे. हमारी पार्टी लोकतांत्रिक है और यह एक सामान्य बदलाव है.”
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