नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह, जिन्हें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा बनाए गए संसदीय मित्रता समूहों में विपक्ष के नेताओं में से एक के रूप में अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, का मानना है कि केंद्र उनका मजाक उड़ा रहा है.
उन्होंने बुधवार को मीडिया से कहा, “मैं प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और कानून मंत्री का धन्यवाद करना चाहता हूं कि उन्होंने मुझे समूह का अध्यक्ष बनाया, जबकि उन्हें पता है कि मेरा पासपोर्ट जब्त है. आप मेरा मजाक क्यों उड़ा रहे हैं. मैं संसद सदस्य हूं, और यह मेरा अपमान है.”
सोमवार को इन समूहों के गठन की घोषणा करते हुए लोकसभा सचिवालय ने खास तौर पर कहा था कि 60 से अधिक देशों के साथ संबंध मजबूत करने की इस पहल में विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों को शामिल करने की कोशिश की गई है. आगे और समितियां बनाने की योजना भी है.
लोकसभा सचिवालय के बयान में संजय सिंह का नाम प्रमुखता से था. उन्हें कैरेबियाई देशों के समूह का प्रमुख बनाया गया है.
संजय सिंह को अक्टूबर 2023 में दिल्ली आबकारी नीति मामले में गिरफ्तार किया गया था. अप्रैल 2024 में दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें जमानत दी. लेकिन उन्हें 2 लाख रुपये का जमानती बॉन्ड भरने के अलावा अपना पासपोर्ट अदालत में जमा कराना पड़ा.
आप के संस्थापक सदस्यों में से एक और राज्यसभा में दूसरे कार्यकाल में सेवा दे रहे सिंह ने कहा कि वह इस मुद्दे को लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन के सामने भी उठाएंगे.
उन्होंने कहा, “आपने मेरे खिलाफ कई मामले दर्ज किए और मुझे जेल भी भेजा. मेरा पासपोर्ट अदालत के पास है, और प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और पूरा देश यह जानता है. किसी सांसद का इस तरह अपमान करना ठीक नहीं है. कम से कम मुझे समूह का अध्यक्ष बनाने से पहले प्रवर्तन निदेशालय से मेरा पासपोर्ट लौटाने के लिए आवेदन तो करवा सकते थे.”
संजय सिंह के अलावा कांग्रेस के शशि थरूर, पी. चिदंबरम और गौरव गोगोई, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव और राम गोपाल यादव, डीएमके की के. कनिमोझी, टीएमसी के डेरेक ओ ब्रायन और अभिषेक बनर्जी, और एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी जैसे प्रमुख विपक्षी नेता भी इन संसदीय समूहों के अध्यक्ष होंगे. हर समूह में 11 सदस्य होंगे.
लोकसभा सचिवालय ने कहा कि इस पहल का मकसद सांसदों को विदेशों में अपने समकक्षों से सीधे बातचीत का मौका देना, विधायी अनुभव साझा करना, नियमित संवाद के जरिए भरोसा बनाना और बेहतर तरीकों का आदान-प्रदान करना है, ताकि द्विपक्षीय संबंध मजबूत हों और आपसी समझ बढ़े.
सोमवार के बयान में कहा गया, “यह याद रखना जरूरी है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न देशों में भारत का पक्ष रखने के लिए बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजने की पहल की थी. अलग-अलग राजनीतिक दलों और विचारधाराओं के नेताओं को एक साथ लाकर वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने से यह पहल दलगत सीमाओं से ऊपर उठी और एक मजबूत संदेश दिया कि जब देश की सुरक्षा और हितों की बात आती है, तो भारत एकजुट खड़ा है.”
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