scorecardresearch
Monday, 22 July, 2024
होमराजनीतिRSS कार्यकर्ता, खट्टर के वफादार और पहली बार के विधायक, कौन है हरियाणा में BJP के अध्यक्ष मोहन लाल बडौली

RSS कार्यकर्ता, खट्टर के वफादार और पहली बार के विधायक, कौन है हरियाणा में BJP के अध्यक्ष मोहन लाल बडौली

बडौली ने सोनीपत से 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन वे असफल रहे. हरियाणा भाजपा प्रमुख के रूप में उनकी नियुक्ति पार्टी द्वारा जातिगत समीकरणों का ‘सही संयोजन’ हासिल करने का प्रयास है.

Text Size:

चंडीगढ़: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राय से हरियाणा विधानसभा के सदस्य मोहन लाल बडौली को पार्टी की हरियाणा इकाई का अध्यक्ष घोषित किया है.

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने मंगलवार को जेपी नड्डा द्वारा पद के लिए उनके नाम को मंजूरी दिए जाने के बाद बडौली की नियुक्ति का पत्र जारी किया. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नड्डा का विस्तारित कार्यकाल 30 जून को समाप्त हो गया था.

बडौली नायब सैनी का स्थान लेंगे, जो इस साल 12 मार्च को मनोहर लाल खट्टर के सीएम बनने के बाद से मुख्यमंत्री और राज्य भाजपा अध्यक्ष का दोहरा प्रभार संभाल रहे थे. खट्टर अब केंद्रीय मंत्रिमंडल में मंत्री हैं.

हरियाणा में भाजपा के ब्राह्मण चेहरे बडौली ने 2024 का लोकसभा चुनाव सोनीपत सीट से लड़ा था, लेकिन ब्राह्मण समुदाय से ही कांग्रेस के सतपाल ब्रह्मचारी से 21,816 मतों के अंतर से हार गए थे.

बडौली 2021 से पार्टी में प्रदेश महासचिव (प्रदेश महामंत्री) के तौर पर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. इससे पहले वे 2020 से 2021 तक सोनीपत में भाजपा के जिला अध्यक्ष थे.


यह भी पढ़ें: लोकसभा में मिली हार का मुख्य कारण BJP की रिपोर्ट में अग्निपथ, कार्यकर्ताओं ने की समीक्षा की मांग


कौन हैं मोहन लाल बडौली?

बडौली (61) ने 1989 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की और बाद में भाजपा के सदस्य बन गए. इंडियन नेशनल लोकदल (आईएनएलडी) प्रशासन के दौरान, वे 2000 में मुरथल से जिला परिषद चुनाव जीतने वाले भाजपा के पहले उम्मीदवार बने.

2019 के विधानसभा चुनावों में उन्हें सोनीपत के राई विधानसभा निर्वाचन से मैदान में उतारा गया, जिसे कांग्रेस का गढ़ माना जाता है और उन्होंने वहां से जीत हासिल की. ​​उन्हें 2020 में सोनीपत के लिए भाजपा का जिला अध्यक्ष और अगले साल हरियाणा भाजपा का महासचिव नियुक्त किया गया.

इस साल की शुरुआत में उन्हें दूसरी बार महासचिव नियुक्त किया गया. 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले, उन्हें पार्टी की हरियाणा राज्य चुनाव समिति में शामिल किया गया.

सोनीपत से दो बार के भाजपा सांसद रमेश कौशिक की कथित तौर पर एक स्पष्ट वीडियो ने चुनावों से पहले एक राजनीतिक विवाद को जन्म दिया था, जिसके कारण इस बार कौशिक के बजाय बडौली को सोनीपत लोकसभा सीट से टिकट मिला. उन्हें 5,26,866 वोट मिले, लेकिन वे 21,816 वोटों के अंतर से हार गए.

हरियाणा भाजपा के नए अध्यक्ष का जन्म 1963 में सोनीपत जिले की राई विधानसभा निर्वाचन के बडौली गांव में हुआ था. उनके पिता काली राम कौशिक कवि थे और सोनीपत के जौंती के प्रसिद्ध कवि पंडित लख्मीचंद के प्रशंसक थे. बडौली एक किसान और व्यवसायी हैं.

उन्होंने सोनीपत के खेवड़ा के एक सरकारी स्कूल में कक्षा 10 तक पढ़ाई की, जिसके बाद उन्होंने बहालगढ़ चौक के पास कपड़े की मार्केट में एक दुकान चलाई.

‘कोई हैरानी नहीं’

राजनीतिक विश्लेषक हेमंत अत्री के लिए हरियाणा भाजपा अध्यक्ष के पद पर बडौली की नियुक्ति कोई हैरान कर देने वाली बात नहीं थी.

अत्री ने कहा, “भाजपा हरियाणा में मतदाताओं को जाटों और गैर-जाटों में विभाजित करने के प्रयास में गैर-जाट कार्ड खेल रही है. पार्टी ने इस रणनीति को सबसे पहले 2019 के विधानसभा चुनावों में अपनाया और इस साल संसदीय चुनावों में इसे दोहराया.”

उन्होंने कहा कि भाजपा ने एक “सही संयोजन” हासिल करने की कोशिश की है – अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय से एक मुख्यमंत्री, एक ब्राह्मण राज्य अध्यक्ष और एक जाट राज्य प्रभारी (सतीश पूनिया).

अत्री ने दिप्रिंट से कहा, “लेकिन चूकिए मत, भाजपा इस बार गैर-जाट कार्ड खेलने जा रही है और यह संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर गंभीर है.”

उन्होंने कहा कि ओबीसी की आबादी 30 प्रतिशत है और ब्राह्मणों की आबादी छह-सात प्रतिशत है अगर गैर-जाट बहुमत में उन्हें वोट देते हैं तो भाजपा एक मजबूत संयोजन बनाने की उम्मीद कर सकती है.

एक अन्य विश्लेषक महाबीर जगलान ने दिप्रिंट को बताया कि सीएम सैनी को हरियाणा में पार्टी के अभियान की कमान पहले ही सौंप दी गई है, इसलिए भाजपा ने प्रतिनिधित्व के मामले में ओबीसी और उच्च जातियों के संतुलित मिश्रण का लक्ष्य रखने की कोशिश की है.

उनके अनुसार, आरएसएस पृष्ठभूमि वाले खट्टर के वफादार बडौली की नियुक्ति ने इस अटकल को और मजबूत कर दिया है कि हरियाणा में भाजपा सरकार और पार्टी संगठन द्वारा लिए गए निर्णयों पर खट्टर की मुहर है.

जगलान ने कहा कि बडौली की नियुक्ति से यह भी पता चलता है कि पार्टी “वही पुराना गैर-जाट कार्ड” खेलने का इरादा रखती है, जो वे 2019 के चुनावों के बाद से हरियाणा में खेल रही है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


यह भी पढ़ें: TMC का ताजमुल बंगाल में शासन-सत्ता न होने का प्रतीक है, गांव वाले तालिबानी कोर्ट से खुश भी हैं और डरते भी हैं


 

share & View comments