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Monday, 16 February, 2026
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‘राजीवियन, न कि राहुलियन’: कांग्रेस पर मणि शंकर अय्यर के हमले की क्या है वजह

केरल विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में अय्यर ने रविवार को मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और लेफ्ट फ्रंट की तारीफ करके माहौल गरमा दिया.

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नई दिल्ली: मणिशंकर अय्यर ने अपनी आत्मकथा ‘ए मेवरिक इन पॉलिटिक्स’ के दूसरे वॉल्यूम में लिखा है कि उनके जीवन को नियंत्रित करने वाले विरोधाभासों में से एक है उनका ‘शब्दों के साथ सहज व्यवहार.’

एक तरफ यह उनके करियर को आगे बढ़ाने वाली चीज बनी, दूसरी तरफ इसने “मुझे नुकसान भी पहुंचाया”, अय्यर ने ‘म्यूजिंग्स एंड रिफ्लेक्शंस ऑन अ लॉन्ग लाइफ’ अध्याय में लिखा. उन्होंने कहा कि उनके “पक्के विचार”, जिन्हें वे “कभी अपने तक नहीं रख पाए”, उनकी “हाशिये पर पहुंचने” में भी वजह बने.

2024 में जगरनॉट प्रकाशन से आई इस किताब में अय्यर ने एक और खुली स्वीकारोक्ति की है. उन्होंने अपनी “जन्मजात घमंड, जो तब बाहर आ जाता है जब मेरी नापसंदगी तानों में बदल जाती है” का जिक्र किया है.

पिछले दो दिनों में वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने एक बार फिर इन स्वभावों को सार्वजनिक रूप से दिखाया है, जिससे उनकी पार्टी असहज हुई और राजनीतिक विरोधियों को मौका मिला.

अय्यर ने रविवार को केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और वाम मोर्चे की तारीफ कर चिंगारी जलाई, वह भी केरल विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले.

उन्होंने कहा, “यह विडंबना है कि भारत में जिस एक राज्य में गांधीजी की दिशा में प्रगति हुई है, वह वही है जहां भारत की मार्क्सवादी-लेनिनवादी पार्टी की सरकार है… इसलिए मुख्यमंत्री की मौजूदगी में, जो मुझे यकीन है कि अगली बार भी मुख्यमंत्री होंगे, मैं अपनी अपील दोहराता हूं कि केरल को देश का सबसे अच्छा पंचायती राज राज्य बनाने के लिए राज्य का कानून हमारे अनुभव के आधार पर बदला जाना चाहिए… मुझे डर है कि देश में अब पंचायती राज का कोई चैंपियन नहीं बचा है. इसलिए मुझे आपके चरणों में गिरना पड़ रहा है, मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, और कहना पड़ रहा है कि कृपया, सर, वह जिम्मेदारी उठाइए जिसे कांग्रेस ने छोड़ दिया है.”

उन्होंने यह बातें तिरुवनंतपुरम में ‘विजन 2031: डेवलपमेंट एंड डेमोक्रेसी’ सेमिनार में कहीं.

अगर इन टिप्पणियों ने अय्यर के “शब्दों की धार” और “पक्के विचार” को दिखाया, तो कांग्रेस की प्रतिक्रिया पर उनका जवाब उनके दूसरे स्वभाव को भी दिखाता है, यानी नापसंदगी का तानों में बदल जाना.

सोमवार को अय्यर ने कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा को खारिज कर दिया. खेड़ा ने एक्स पर लिखा था कि पूर्व कांग्रेस सांसद का पिछले कुछ सालों से कांग्रेस से कोई संबंध नहीं है और वे जो भी बोलते या लिखते हैं वह निजी है. अय्यर ने उन्हें “कठपुतली” और “जोकर” कहा.

अय्यर ने कांग्रेस के शक्तिशाली महासचिव संगठन के.सी. वेणुगोपाल, जो राहुल गांधी के करीबी माने जाते हैं, को भी “गुंडा” कहा.

सबसे अहम बात यह रही कि उन्होंने कहा, “मैं गांधीवादी हूं, मैं नेहरूवादी हूं, मैं राजीववादी हूं, लेकिन मैं राहुलवादी नहीं हूं.” इसे राहुल गांधी के प्रति खुली असहमति माना गया.

उन्होंने एएनआई से तिरुवनंतपुरम में कहा, “एक कांग्रेसी के तौर पर मैं चाहता हूं कि यूडीएफ सत्ता में आए. एक गांधीवादी के तौर पर मैं सच कह रहा हूं कि शानदार उपलब्धियों के बाद वामपंथी फिर सत्ता में आएंगे… कौन उस पार्टी को वोट देगा जिसके नेता आपस में ही लड़ रहे हैं? क्या आपको लगता है कि केरल के लोग नहीं जानते कि कांग्रेस नेतृत्व में क्या हो रहा है? कम से कम पिनराई की सरकार में अनुशासन है.”

जब उनसे पूछा गया कि वे उस पार्टी में क्यों बने हुए हैं जिसने उन्हें लगभग अलग कर दिया है, तो अय्यर ने कहा, “डॉ. आंबेडकर की एक जीवनी है—ए पार्ट अपार्ट.”

2023 में प्रकाशित ए पार्ट अपार्ट: द लाइफ एंड थॉट ऑफ बी.आर. आंबेडकर, अशोक गोपाल ने लिखी है.

अय्यर के परिवार के लोग भी उनसे पूछ चुके हैं कि जब कांग्रेस साफ कर चुकी है कि अब उन्हें संगठन में न तो महत्व दिया जा रहा है और न ही चाहा जा रहा है, तो वे अपनी उपलब्धियों पर संतोष करके क्यों नहीं बैठ जाते.

अपनी किताब में अय्यर ने लिखा है कि राजनीति उनके लिए एक लत है.

अय्यर लिखते हैं कि उन्हें यह भी अच्छी तरह पता है कि कांग्रेस में नेहरू-गांधी धारा से अलग होने वाला कोई भी नेता लंबे समय तक टिक नहीं पाया, सिवाय थोड़े समय के.

उन्होंने लिखा, “कुछ लोगों ने कहा कि कांग्रेस बहुत पहले अपने वैचारिक रास्ते से भटक चुकी है. मैंने जवाब दिया कि यही वजह है कि बाहर से भौंकने के बजाय पार्टी के अंदर से उसे मूल विचारों पर लौटाया जाए. इसका सीधा जवाब यह था कि पार्टी के अंदर बहस के लिए कोई मंच ही नहीं है.”

उन्होंने आगे लिखा, “इसके अलावा, टीवी और अपने लेखों के जरिए मैं लगातार विपक्षी एकता की बात करता रहा हूं ताकि भाजपा का मुकाबला किया जा सके. ऐसे में पहले से भरी हुई राजनीतिक जगह में एक और छोटा समूह जोड़कर विपक्ष की एकता को तोड़ना बेवकूफी होती.”

उन्होंने लिखा, “कांग्रेस और गांधी परिवार में चाहे जितनी भी कमियां हों, और वे बहुत थीं, कांग्रेस सिर्फ गांधी परिवार के साथ ही टिक सकती है, क्योंकि गांधी परिवार पार्टी के डीएनए में लिखा हुआ है. और कांग्रेस का बचना ही देश को संघ परिवार के हिंदुत्व के गड्ढे से बचाने की आखिरी उम्मीद है.”

निलंबन

अय्यर को 7 दिसंबर 2017 को कांग्रेस से निलंबित कर दिया गया था, जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “नीच किस्म का आदमी” कहा था और इस पर भारी विवाद हुआ था. एक साल बाद उनका निलंबन हटा लिया गया.

अपनी आत्मकथा में अय्यर ने लिखा है कि मोदी पर उनकी “नीच किस्म का आदमी” वाली टिप्पणी उनके लंबे राजनीतिक करियर की जैसे समाधि-लेख बन गई, जो राजीव गांधी के समय शुरू हुआ था और जिसमें कई उतार-चढ़ाव आए.

हालांकि गांधी परिवार से उनका टकराव 15 अप्रैल 2010 से शुरू हुआ था, ऐसा अय्यर ने लिखा है.

उस समय दिग्विजय सिंह ने माओवाद से निपटने के तरीके को लेकर तत्कालीन गृहमंत्री पी. चिदंबरम की सार्वजनिक रूप से आलोचना की थी और उन्हें “घमंडी और सलाह न सुनने वाला” कहा था.

अय्यर ने भी इस मुद्दे पर मीडिया से बात की थी और ऐसी टिप्पणियां की थीं जो चिदंबरम पर सिंह की राय का समर्थन करती दिखती थीं.

15 अप्रैल को जब अय्यर राज्यसभा के नए नामित सदस्य के रूप में शपथ लेने जा रहे थे, तभी उन्हें तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का फोन आया, जिन्होंने “मुझे बहुत डांटा.”

फिर भी अय्यर का दावा है कि सोनिया 2024 लोकसभा चुनाव में तमिलनाडु की मयिलादुथुरै सीट से उन्हें उम्मीदवार बनाने के विचार के प्रति तैयार थीं, जहां से वे पहले तीन बार सांसद रह चुके हैं. लेकिन उन्होंने जोड़ा कि राहुल ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया.

अय्यर ने लिखा, “मुझे सोनिया गांधी के सबसे करीबी सहयोगी ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर राहुल की राय अलग हुई तो उनकी मां उनकी बात मान लेंगी. वही हुआ. अब मैं ‘राजनीति से बाहर एक मैवरिक’ था.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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