नई दिल्ली: मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के लगभग एक साल बाद, केंद्र सरकार ने बुधवार को इसे हटा लिया. यह जानकारी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा जारी एक अधिसूचना में दी गई.
अधिसूचना में कहा गया है, “संविधान के अनुच्छेद 356 की उपधारा (2) के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए, मैं, द्रौपदी मुर्मू, भारत की राष्ट्रपति, मणिपुर राज्य के संबंध में 13 फरवरी 2025 को इसी अनुच्छेद के तहत मेरे द्वारा जारी की गई घोषणा को 4 फरवरी 2026 से रद्द करती हूं.”
मंगलवार को 62 वर्षीय मैतेई भाजपा विधायक युमनाम खेमचंद सिंह को मणिपुर का मुख्यमंत्री घोषित किया गया. भाजपा विधायक दल के नेता वाई. खेमचंद सिंह बुधवार शाम 6 बजे लोक भवन में मणिपुर के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.
खेमचंद सिंह, जो बीरेन सिंह के विरोधी गुट से आते हैं, 2017 से 2022 के बीच भाजपा सरकार के पहले कार्यकाल में मणिपुर विधानसभा के अध्यक्ष रह चुके हैं. बीरेन सिंह के दूसरे कार्यकाल में उनके पास नगर प्रशासन और आवास विकास, ग्रामीण विकास और पंचायती राज और शिक्षा विभागों की जिम्मेदारी थी.

मणिपुर मई 2023 से तनाव में है और राज्य जातीय आधार पर बंट गया है. मैतेई समुदाय के लोग ज़्यादातर घाटी क्षेत्रों में सिमट गए हैं, जबकि कुकी-जो समुदाय पहाड़ी इलाकों में. इस हिंसा में अब तक 250 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 50,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं.
एन. बीरेन सिंह ने फरवरी 2025 में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था. उनकी सरकार पर मई 2023 में शुरू हुई मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा को संभालने में नाकामी के आरोप लगे थे. इसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया. इसके बाद प्रशासन की जिम्मेदारी अजय कुमार भल्ला ने संभाली, जो पूर्व केंद्रीय गृह सचिव रहे हैं और संकट प्रबंधन का लंबा अनुभव रखते हैं.
भल्ला 1984 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं और असम-मेघालय कैडर से हैं. उन्हें पिछले साल दिसंबर में मणिपुर का राज्यपाल नियुक्त किया गया था.
60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा में भाजपा के पास अब भी बहुमत है. फिलहाल विधानसभा में 59 विधायक हैं, क्योंकि नेशनल पीपुल्स पार्टी के विधायक एन. कयिसी की पिछले साल जनवरी में मौत हो गई थी. भाजपा के पास कुल 32 विधायक हैं, जिनमें कुकी-जो समुदाय के सात विधायक भी शामिल हैं. 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद जनता दल यूनाइटेड के पांच विधायक भी भाजपा में शामिल हो गए थे, जिससे पार्टी की प्रभावी संख्या 37 हो गई.
हालांकि राज्य में कुछ समय के लिए शांति भी देखने को मिली है, लेकिन कुल मिलाकर हालात अब भी अशांत बने हुए हैं. दोनों पक्ष समय-समय पर हिंसा का सहारा लेते रहे हैं.
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