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Saturday, 31 January, 2026
होमराजनीति'अब सब ठीक है': वोटर लिस्ट विवाद में फंसे पद्मश्री वादक, कांग्रेस ने लगाया 'साजिश रचने' का आरोप

‘अब सब ठीक है’: वोटर लिस्ट विवाद में फंसे पद्मश्री वादक, कांग्रेस ने लगाया ‘साजिश रचने’ का आरोप

गुजरात के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दौरान दायर एक आपत्ति ने पद्म श्री अवॉर्ड पाने वाले मीर हाजी कासम के वोटर स्टेटस पर कुछ समय के लिए सवाल उठाया, लेकिन बाद में इसे सुलझा लिया गया. लेकिन कांग्रेस आपराधिक शिकायत की मांग कर रही है.

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नई दिल्ली: भारत के 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या गुजरात के ढोलक वादक मीर हाजी कासम उर्फ हाजी रमकडू के लिए खास थी. उन्हें दुनिया भर में गुजराती लोक संगीत को लोकप्रिय बनाने के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया जाना था.

लेकिन इसमें एक अड़चन आ गई. उनके गृह जिले जूनागढ़ में मतदाता सूची में उनके नाम को शामिल किए जाने को लेकर एक शिकायत दर्ज की गई थी. हालांकि, अधिकारियों ने तेजी से कार्रवाई की और “अब सब कुछ ठीक हो गया है,” कासम ने दिप्रिंट से कहा.

हालांकि मामला अब शांत हो गया है, लेकिन कांग्रेस इसे भाजपा पर हमला करने के मौके के तौर पर इस्तेमाल कर रही है. आपत्ति दर्ज कराने के पीछे साजिश का आरोप लगाते हुए गुजरात कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. पार्थिवराजसिंह काठवाड़िया ने कहा, “झूठी जानकारी देकर असली मतदाताओं के अधिकार छीनने की कोशिश करने वालों (जिन्होंने आपत्ति दर्ज की) के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज होनी चाहिए.”

यह आपत्ति भाजपा के जूनागढ़ नगर निगम सदस्य संजय मनवर ने 13 जनवरी को दर्ज कराई थी, जबकि कासम को इस पुरस्कार के लिए नामित किए जाने के कई महीने बाद यह कदम उठाया गया.

गुजरात में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) अभियान के दौरान यह आपत्ति फॉर्म 7 के जरिए दर्ज की गई थी. फॉर्म 7 के तहत किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाने पर आपत्ति की जा सकती है या “मृत्यु/स्थान परिवर्तन” के आधार पर नाम हटाने की मांग की जा सकती है. कासम के मामले में यह आपत्ति इस आधार पर दर्ज की गई थी कि वह “अनुपस्थित/स्थायी रूप से स्थानांतरित” हो गए हैं. द प्रिंट ने यह फॉर्म देखा है.

द प्रिंट ने मनवर से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

कासम ने फोन पर द प्रिंट से कहा, “एक दस्तावेज में मेरा नाम थोड़ा अलग था, इसलिए कुछ भ्रम हो गया था, लेकिन अब उसे ठीक कर दिया गया है.”

उन्होंने कहा, “हमें किसी दफ्तर जाने की जरूरत नहीं पड़ी… सुबह करीब 8 या 9 बजे 2-3 अधिकारी घर आए… इस पूरे मामले में सभी बहुत सहयोगी थे.”

लेकिन कांग्रेस के लिए यह विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है. काठवाड़िया ने कहा, “गुजरात में भाजपा की ओर से संगठित तरीके से लोगों के अधिकार छीनने की साजिश चल रही है. पद्म श्री पुरस्कार पाने वाले गुजरात के एक प्रतिष्ठित नागरिक हैं, जिन्होंने गुजरात का गौरव बढ़ाया है. उन्हें भी निशाना बनाया गया और उनके अधिकार छीनने की कोशिश की गई.”

उन्होंने यह भी बताया कि फॉर्म 7 के साथ एक घोषणा जुड़ी होती है. इस घोषणा में आवेदक को यह कहना होता है कि उसे फॉर्म में दी गई जानकारी सही लगती है और अगर कोई झूठा बयान दिया जाता है, तो वह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत दंडनीय है.

धारा 31 के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति मतदाता सूची की तैयारी, संशोधन या सुधार के संबंध में, या मतदाता सूची में किसी नाम को शामिल करने या हटाने के सिलसिले में लिखित रूप में “कोई ऐसा बयान देता है, जो झूठा हो और जिसे वह जानता हो या मानता हो कि वह झूठा है, या जिसे वह सच नहीं मानता,” तो ऐसे व्यक्ति को एक साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है.”

काठवाड़िया ने कहा, “तो अब अगर पद्म श्री हाजीभाई के खिलाफ फॉर्म 7 दाखिल किया गया है… तो असली मतदाताओं के अधिकार छीनने के लिए झूठी जानकारी देने वालों के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज होनी चाहिए.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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