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Saturday, 29 November, 2025
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‘बाहरी लोग’, ओवैसी फैक्टर, ‘दोस्ताना मुकाबले’ — कांग्रेस की बिहार चुनाव समीक्षा में क्या कुछ हुआ

इंदिरा भवन में 10-10 कैंडिडेट्स के बैच वाले ये सेशन शाम करीब 7 बजे तक चले. इसके अलावा, खड़गे और राहुल ने 6 MLA और कैंडिडेट्स से मिलकर उनकी शिकायतें सुनीं.

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नई दिल्ली: बिहार से आए कांग्रेस नेताओं और पार्टी हाईकमान की गुरुवार को हुई बैठक में प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) इंचार्ज कृष्णा अल्लावरू की भूमिका को लेकर गर्मागर्म बहस हुई.

समझा जाता है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अलग-अलग बैचों में छह विधायकों और हारे हुए उम्मीदवारों से मुलाकात की.

इंदिरा भवन, जो पार्टी का नया राष्ट्रीय मुख्यालय है, में बंद कमरे में हुई ये बैठकें दस-दस उम्मीदवारों के समूहों में शाम करीब 7 बजे तक चलीं.

पार्टी सूत्रों ने कहा कि खड़गे और राहुल के आने से पहले, इंतिज़ार के दौरान दो उम्मीदवारों के बीच खास तौर पर तीखी बहस हुई. वैशाली से हार चुके उम्मीदवार इंजीनियर संजीव सिंह ने आरोप लगाया कि राज्य नेतृत्व “बाहरी लोगों” को ला रहा है, जिस पर पूर्णिया के उम्मीदवार जितेंद्र कुमार ने आपत्ति जताई.

कुमार को लोकसभा सांसद पप्पू यादव के करीबी के तौर पर देखा जाता है. पप्पू यादव पूर्णिया से बतौर निर्दलीय जीते हैं और बाद में उन्होंने कांग्रेस को समर्थन दिया है. यादव भी बैठक में मौजूद थे और उन्होंने किसी भी तरह की बहस से इनकार किया.

इंजीनियर संजीव सिंह ने भी इस तरह की घटना से इनकार किया, लेकिन सूत्रों ने पुष्टि की कि खड़गे और राहुल से मिलने से पहले वेटिंग रूम में यह बहस हुई थी.

जब खड़गे और राहुल को इस घटना की जानकारी मिली, तो उन्होंने सिंह को फटकार लगाई और दूसरों को चेतावनी दी कि ऐसा व्यवहार अनुशासनात्मक कार्रवाई का कारण बनेगा. नेतृत्व ने हर उम्मीदवार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी.

एक सांसद ने ‘दिप्रिंट’ को बताया कि उन्होंने बैठक में कहा कि अल्लावरू को चुनाव से पहले जिलों का दौरा करना चाहिए था. चुनाव दो चरणों में 6 और 11 नवंबर को हुए थे. सांसद ने कहा कि अल्लावरू पटना में ही रुके रहे.

उन्होंने राज्य में राजेश राम और कांग्रेस विधायक दल के नेता शकील अहमद खान के तरीके की भी आलोचना की. सांसद के अनुसार, “किसी को तो जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए. इंचार्ज बूथ तक जाने की बात करते थे, लेकिन उन्होंने हर जिला भी नहीं देखा.”

एक विधायक ने कहा कि आरजेडी के साथ गठबंधन में आई दरारों की वजह से कम से कम 11 सीटों पर “कथित दोस्ताना मुकाबले” हुए, जिससे विपक्ष का नुकसान हुआ और वोटरों के बीच गलत संदेश गया.

विधायक ने ‘असदुद्दीन ओवैसी फैक्टर’ का भी ज़िक्र किया. उन्होंने कहा कि ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने भाजपा की ध्रुवीकरण वाली बयानबाज़ी का जवाब देते हुए मुसलमानों को अपने पक्ष में जोड़ लिया, और एक साम्प्रदायिक रूप से चार्ज्ड काउंटर-नैरेटिव खड़ा किया.

इस महीने की शुरुआत में ‘दिप्रिंट’ को दिए इंटरव्यू में, कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने बिहार में AIMIM के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई थी.

अनवर ने कहा था कि AIMIM के पांच उम्मीदवारों की जीत यह दिखाती है कि मुसलमानों के बीच कट्टरपंथियों का असर बढ़ रहा है, जो “हिंदू साम्प्रदायिकता” के बढ़ने की प्रतिक्रिया है. उन्होंने कहा था कि समुदाय का एक हिस्सा मुस्लिम पहचान आधारित पार्टियों की तरफ इसलिए जा रहा है क्योंकि उन्हें लगता है कि कांग्रेस भाजपा का मुकाबला करने में नाकाम है.

पूर्व बिहार कांग्रेस अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने पुष्टि की कि बैठक में सीटवार समीक्षा की गई.

बैठक खत्म होने के बाद, राजेश राम ने पत्रकारों से कहा कि सभी को पूरा मौका देने के कारण बैठक देर शाम तक चली.

हालांकि उन्होंने गरमागरम बहस से जुड़े सवालों से बचते हुए कहा कि “सभी उम्मीदवारों ने एक सुर में कहा कि वोट चोरी करने के लिए चुनाव आयोग के ज़रिये SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) की कानूनी प्रक्रिया का इस्तेमाल किया गया.”

पहले से ही राज्य की राजनीति में कमजोर भूमिका निभा रही कांग्रेस इस बार 61 में से सिर्फ छह सीटें जीत पाई. उसकी कामयाबी की दर सिर्फ 9.8 प्रतिशत रही, जो 2010 के उसके सबसे खराब प्रदर्शन (जब उसने चार सीटें जीती थीं) के बहुत करीब है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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