नई दिल्ली: राज्यसभा जाने की अटकलों पर विराम लगाते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को घोषणा की कि वह “इस बार हो रहे चुनाव में राज्यसभा का सदस्य बनने की इच्छा रखते हैं.”
नीतीश के इस कदम से बिहार में नए मुख्यमंत्री की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है, जो संभवतः सहयोगी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से होगा. हालांकि, नीतीश के मुख्यमंत्री पद छोड़ने और उनके उत्तराधिकारी के शपथ लेने की सही समय-सीमा अभी साफ नहीं है. बीजेपी नेताओं के अनुसार यह अगले कुछ हफ्तों में हो सकता है.
पटना के राजनीतिक हलकों में बुधवार को ही इस बात की चर्चा तेज़ थी कि नीतीश संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में जा सकते हैं ताकि उनके उत्तराधिकारी के लिए रास्ता बन सके.
मुख्यमंत्री ने गुरुवार को एक्स पर लिखा, “दो दशकों से अधिक समय से आपने मुझ पर लगातार भरोसा और समर्थन रखा है. उसी भरोसे की ताकत से हमने बिहार और आप सभी की पूरी समर्पण के साथ सेवा की है. आपके विश्वास और समर्थन की ताकत से ही आज बिहार विकास और गरिमा की नई पहचान पेश कर पा रहा है. इसके लिए मैं पहले भी कई बार आपका आभार व्यक्त कर चुका हूं.”
पिछले दो दशक से भी अधिक समय से आपने अपना विश्वास एवं समर्थन मेरे साथ लगातार बनाए रखा है, तथा उसी के बल पर हमने बिहार की और आप सब लोगों की पूरी निष्ठा से सेवा की है। आपके विश्वास और समर्थन की ही ताकत थी कि बिहार आज विकास और सम्मान का नया आयाम प्रस्तुत कर रहा है। इसके लिए पूर्व में…
— Nitish Kumar (@NitishKumar) March 5, 2026
उन्होंने आगे लिखा, “अपने संसदीय जीवन की शुरुआत से ही मेरे मन में यह इच्छा रही है कि मैं बिहार विधानसभा के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के भी दोनों सदनों का सदस्य बनूं. इसी इच्छा को ध्यान में रखते हुए मैं इस बार होने वाले चुनाव में राज्यसभा का सदस्य बनने की इच्छा रखता हूं.”
नीतीश की पार्टी जेडीयू के एक वरिष्ठ नेता ने दिप्रिंट से कहा, “इसके साथ ही नीतीश, लालू (प्रसाद) और (राम विलास) पासवान का दौर खत्म हो जाएगा.”
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस समय पटना में हैं, जहां बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नामांकन दाखिल करने का कार्यक्रम है. 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए गुरुवार नामांकन की आखिरी तारीख है.
गुरुवार सुबह से ही बड़ी संख्या में जेडीयू कार्यकर्ता और समर्थक उनके घर के बाहर जमा थे और मुख्यमंत्री पद छोड़ने की अटकलों का विरोध कर रहे थे. इस पर नीतीश ने उनकी चिंताओं को शांत करने की कोशिश की.
उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, “मैं पूरी ईमानदारी से आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि भविष्य में भी आपसे मेरा रिश्ता बना रहेगा और विकसित बिहार बनाने के लिए आपके साथ मिलकर काम करने का मेरा संकल्प मजबूत रहेगा. जो नई सरकार बनेगी उसे मेरा पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा.”
नीतीश कुमार अब तक रिकॉर्ड 10 बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं. वह 2005 से इस पद पर हैं, बीच में एक छोटा समय ऐसा रहा जब 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया गया था.
बीजेपी लंबे समय से बिहार में नेतृत्व परिवर्तन चाहती रही है. पिछले साल जब एनडीए ने बिहार चुनाव के लिए सीट बंटवारे का फार्मूला घोषित किया था, तब जेडीयू और बीजेपी ने बराबर सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिससे यह संदेश दिया गया था कि दोनों में से कोई भी “बड़ा भाई” नहीं होगा.
बीजेपी सूत्रों के अनुसार, नीतीश के राज्यसभा जाने के बाद अब पार्टी राज्य में अपना मुख्यमंत्री बना सकेगी. हिंदी पट्टी का बिहार ही ऐसा राज्य है जहां बीजेपी का कभी अपना मुख्यमंत्री नहीं रहा है.
राज्य में नेतृत्व परिवर्तन के लिए बीजेपी के जोर देने के पीछे कई कारण बताए जाते हैं—मुख्यमंत्री की सेहत और शासन को लेकर चिंता, उन्हें सम्मानजनक विदाई देना, और पहली बार राज्य में पार्टी का मुख्यमंत्री बनाने की इच्छा.
विधानसभा चुनाव से पहले ही जेडीयू नेतृत्व लगभग पूरी तरह 75 वर्षीय मुख्यमंत्री तक पहुंच को नियंत्रित कर रहा था. उन्होंने मीडिया को कोई इंटरव्यू नहीं दिया और न ही जेडीयू नेताओं और कुछ नौकरशाहों के छोटे से दायरे से बाहर लोगों से मुलाकात की.
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