सावित्री बाई फुले की फाइल फोटो. (फेस​बुक)
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नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव के ठीक पहले उत्तर प्रदेश में भाजपा को झटका लगा है. पार्टी की सांसद सावित्री बाई फुले ने भाजपा पर गरीबों का पैसा लूटने का आरोप लगाकर पार्टी छोड़ दी है. दूसरी तरफ, केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी (रालोसपा) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने भी गुरुवार को पार्टी के चिंतन शिविर के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा पर जमकर निशाना साधा.

उत्तर प्रदेश के बहराइच लोकसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सांसद साध्वी सावित्री बाई फुले ने गुरुवार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर सीधे प्रधानमंत्री पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि ‘चौकीदार की नाक के नीचे गरीबों का पैसा लूटा जा रहा है. भाजपा और आरएसएस समाज को बांटने व संविधान को खत्म करने की कोशिश कर रही है.’

साध्वी सावित्री बाई ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफे देने की घोषणा की. इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा और आरएसएस पर जमकर हमला बोला.

चौकीदार की नाक के नीचे लूटा जा रहा गरीबों का पैसा

सांसद ने कहा, ‘चौकीदार की नाक के नीचे गरीबों का पैसा लूटा जा रहा है। भाजपा और आरएसएस के लोग समाज को बांटने के काम में लगे हैं और बाबा साहेब के लिखे संविधान के साथ छेड़छाड़ कर उसे खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं. विकास पर ध्यान न देकर मूर्तियां बनवाई जा रही हैं और अल्पसंख्यक व अनुसूचित वर्ग को धोखा दिया जा रहा है. इसलिए वह बाबा साहेब के परिनिर्वाण दिवस के अवसर पर भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रही हूं. लेकिन सांसद बनी रहूंगी.’

साध्वी सावित्री बाई फुले भाजपा के उन दलित सांसदों में शामिल हैं, जो भाजपा व केंद्र और राज्य सरकार पर अनदेखी करने का आरोप लगाती रही हैं. अभी हाल ही में मुख्यमंत्री योगी द्वारा हनुमान को दलित बताए जाने पर उन्होंने भगवान राम पर विवादित टिप्पणी करते हुए कहा था, ‘राम मनुवादी और शक्तिहीन थे. अगर शक्तिहीन न होते तो अब तक मंदिर बन गया होता. हनुमान दलित थे, इसीलिए उन्हें इंसान से बंदर बना दिया गया और मुंह पर कालिख पोती गई व पूंछ लगा दी गई थी.’

मंदिर, मस्जिद बनवाना पार्टी का काम नहीं

केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी (रालोसपा) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से अलग होंगे या नहीं, यह तो अभी भविष्य के गर्त में है, लेकिन उन्होंने गुरुवार को पार्टी के चिंतन शिविर के बाद यहां खुले अधिवेशन में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर जमकर निशाना साधा.

उन्होंने भाजपा को लोकसभा चुनाव से पहले अयोध्या में राम मंदिर बनाने का मुद्दा उठाने पर आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मंदिर, मस्जिद बनवाना राजनीतिक दलों का काम नहीं है. उन्होंने बिहार में कथित ‘नीतीश मॉडल’ पर तंज कसते हुए कहा कि नीतीश मॉडल से बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर का सपना पूरा नहीं हो सकता.

रालोसपा के वाल्मीकिनगर में दो दिवसीय राजनीतिक चिंतन शिविर के बाद गुरुवार को मोतिहारी में खुला अधिवेशन में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि शिक्षा के बिना विकास की बात करना बेमानी है. उन्होंने नीतीश सरकार को निकम्मी सरकार बताते हुए कहा कि बिहार में आज जो कानून व्यवस्था की हालत है, वह पूर्ववर्ती लालू सरकार से भी बदतर हो गई है.

उन्होंने कहा कि पार्टी के चिंतन शिविर में वर्तमान सरकार को उखाड़ फेंकने का संकल्प लिया गया है, जिसमें रालोसपा के कार्यकर्ता आज से जुट गए हैं.

कुशवाहा ने बिहार में शिक्षा व्यवस्था की बदतर हालत पर चिंता जाहिर करते हुए इसके लिए व्यवस्था को दोषी बताया और आरोप लगाया कि बिहार के स्कूलों में अभी ऐसे शिक्षकों की बहाली की गई है जो सही ढंग से आवेदन भी नहीं लिख सकते.

उन्होंने बिहार भाजपा इकाई को नीतीश की ‘बी’ टीम बताते हुए कहा कि बिहार भाजपा नीतीश के सामने दंडवत हो गई है. नीतीश कुमार कुछ दिनों पहले जिस भाजपा हो ‘भारतीय जुमला पार्टी’ कहते थे, बिहार भाजपा की आज वही स्थिति है.

रालोसपा प्रमुख ने एक बार फिर लोकसभा चुनाव के लिए सीट बंटवारे की चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने इस मामले को लेकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने की कोशिश की थी, लेकिन मिलने का समय नहीं दिया गया.

कुशवाहा ने इससे पहले कहा था कि चिंतन शिविर के बाद छह दिसंबर को वह घोषणा करेंगे कि राजग में ही रहना है या इससे निकल जाना है, मगर पूरा दिन बीत जाने के बाद भी उन्होंने कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की. दीगर बात है कि उन्होंने अपने संबोधन में यह जरूर कहा कि वह अभी भी केंद्र सरकार में मंत्री हैं.

(समाचार एजेंसी आईएएनएस से इनपुट के साथ)


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