Saturday, 2 July, 2022
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सत्यपाल मलिक ने कहा- MoS अजय मिश्रा को लखीमपुर भाषण के तुरंत बाद बर्ख़ास्त कर देना चाहिए था

दिप्रिंट को दिए एक इंटरव्यू में मेघालय राज्यपाल ने लखीमपुर खीरी घटना, कृषि क़ानून वापस लेने के मोदी सरकार के फैसले के असर और धारा 370 रद्द किए जाने पर बात की.

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शिलांग: मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा है कि केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा ‘टेनी’ को बहुत पहले बर्ख़ास्त कर दिया जाना चाहिए था और उनके नरेंद्र मोदी सरकार में बने रहने से उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों पर निश्चित रूप से असर पड़ेगा.

गुपुवार को राजभवन में दिप्रिंट को दिए एक इंटरव्यू में मलिक ने कहा, ‘केंद्रीय गृह राज्यमंत्री बहुत सक्रिय हैं लेकिन कभी कभी लोगों को लगता है कि वो बुरे लोगों का बचाव करते हैं. मिश्रा को उनके भाषण के तुरंत बाद बर्ख़ास्त कर देना चाहिए था… ‘मैं तुम्हें ठीक कर दूंगा…तुम मुझे जानते नहीं हो…’ कोई ऐसे बात करता है?’

सत्यपाल मलिक अजय मिश्रा की किसानों को कथित धमकी देने के बारे में बात कर रहे थे- व्यापक रूप से चल रहे एक वीडियो में, जिसके झूठा होने का दावा अजय ने कभी नहीं किया- कि वो ‘उन्हें दो मिनट में ठीक कर देंगे’. इस धमकी ने कथित तौर पर किसानों को भड़का दिया और उन्हें मंत्री से टकराव के रास्ते पर डाल दिया. इसके अंत में 3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी में आठ लोगों की मौत हुई.

अजय मिश्रा का बेटा आशीष मिश्रा कथित रूप से उस क़ाफिले का हिस्सा था जिसकी गाड़ियों ने उस दिन प्रदर्शनकारी किसानों को टक्कर मारी थी.

केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे की मांग का मेघालय राज्यपाल ने ऐसे समय समर्थन किया है जब किसान संगठन मोदी सरकार पर मिश्रा को बर्ख़ास्त करने का दबाव बढ़ा रहे हैं.

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J&K का बटवारा

मलिक, जो धारा 370 हटाए जाने के समय जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल थे उन्होंने कहा कि राज्य को दो केंद्र-शासित क्षेत्रों में बांटने से ‘बचा जा सकता था’ लेकिन वो इसलिए किया गया कि केंद्र-शासित क्षेत्रों में पुलिस सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत आ गई.

मलिक ने कहा, ‘मेरी सहमति या असहमति का कोई सवाल ही नहीं था… जिन्हें इसे करना था (दो केंद्र-शासित क्षेत्रों में बांटना) उन्होंने कर दिया. अगर मेरे बस में होता, तो मैं ऐसा न करता’.

उस दिन को याद करते हुए जब धारा 370 को अमान्य किया गया (5 अगस्त 2019), मलिक ने कहा कि मुख्य सचिव बीवीआर सुब्राह्मण्यम ने उनसे कहा, ‘साहब, एक हज़ार आदमी मारना पड़ेगा’.

‘मैंने कहा, ‘एक चिड़िया भी नहीं मारनी पड़ेगी…200 नौजवान दुनिया की दूसरे नंबर की ताक़त से नहीं लड़ सकते…मुझे अपनी सुरक्षा से जम्मू एंड कश्मीर पुलिस को हटाने की सलाह दी गई लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया’.

मलिक ने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें एक आदेश दिया था कि कोई सियासत मत कीजिए, लोगों का भरोसा जीतिए.


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कृषि क़ानूनों की वापसी का UP चुनावों पर असर

तीन विवादास्पद कृषि क़ानूनों की वापसी पर बात करते हुए, मलिक ने कहा कि पीएम की घोषणा एक ‘अच्छी शुरुआत’ थी जिसका किसानों पर एक ‘सुखदायक प्रभाव’ पड़ा है.

‘ये (कृषि क़ानून) कोई सुधार नहीं थे, ये किसानों को उनकी ज़मीन से वंचित करने की एक चतुराई भरी कोशिश थी जिसे किसान समझ गए. अगर ये उनके भले के लिए था तो भी (सरकार को) उनसे परामर्श करना चाहिए था’.

उन्होंने कहा कि इस वापसी से मोदी के प्रति किसानों का रवैया थोड़ा नर्म होगा लेकिन जहां तक यूपी चुनावों का सवाल है, उनपर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा. राज्यपाल ने कहा, ‘पिछले पांच सालों में ये अहसास नहीं कराया गया कि (सत्तारूढ़ बीजेपी) किसान-समर्थक है. आज तक गन्ना किसानों का भुगतान नहीं किया गया है…(आगामी असेम्बली चुनावों में) किसान अपनी भड़ास निकालेंगे’.

मलिक ने भविष्यवाणी की कि राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) नेता जयंत चौधरी को जाटों की ‘हमदर्दी’ मिल गई है और उनका एक ‘बड़ा हिस्सा’ सहित मुसलमान, आरएलडी-समाजवादी पार्टी गठबंधन के साथ जाएंगे. उन्होंने आगे कहा, ‘योगी (आदित्यनाथ) को उसका फायदा मिलेगा जो उन्होंने क़ानून व्यवस्था के लिए किया है लेकिन सिर्फ क़ानून व्यवस्था और कुछ नहीं’.

किसानों के पक्ष में बोलने पर हो रही अपनी आलोचना के बारे में गवर्नर ने कहा, ‘मैं प्रधानमंत्री का हितैषी और प्रशंसक हूं. अगर मुझे उनके पैरों के पास कोई बिजली का तार या सांप दिखाई देगा तो क्या में उन्हें सतर्क नहीं करूंगा? ट्विटर ब्रिगेड की संख्या एक लाख हो सकती है लेकिन ऐसे करोड़ों किसान हैं जो मेरे साथ हैं’.

गोवा CM की हरकतें

मलिक की गोवा की बीजेपी सरकार के साथ तकरार हुई थी कथित रूप से इसके नतीजे में उनका तबादला शिलॉन्ग राज भवन कर दिया गया- पटना, श्रीनगर और पणजी के बाद चार सालों में चौथा जिसमें कुछ समय के लिए ओडिशा का अतिरिक्त प्रभार शामिल नहीं है.

उन्होंने कहा, ‘दुर्भाग्यवश जिस दिन गोवा में लॉकडाउन हुआ मुख्यमंत्री (प्रमोद सावंत) ने आवश्यक वस्तुएं सप्लाई करने का ठेका एक ही कंपनी को दे दिया. कोई एक कंपनी हर गोवा वासी के घर दूध और सब्ज़ियां सप्लाई नहीं कर सकती. लोगों को तीन दिन तक दूध नहीं मिला…मैंने पीएम को बताया… मुझे मालूम था कि कौन क्या ले रहा है…पीएम के दख़ल के बाद दुकानें खोली गईं’.

फिर, विधायकों की शिकायतें थीं कि ट्रांसपोर्ट ट्रक्स कोरोनावायरस के कैरियर्स बन रहे थे. राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने सरकार के साथ इस मामले को उठाया लेकिन कुछ नहीं हुआ.

उन्होंने याद किया, ‘जब मैंने पीएम को बताया तो उन्होंने कहा कि उन्हें पता चला है कि ऐसा नहीं हो रहा है. मैंने कहा कि जो लोग ऐसा कर रहे हैं ये वही लोग हैं जो आपको बता रहे हैं…वैसे भी, कुछ दिन बाद मुझे पता चल गया कि मुझे जाना होगा’.

(यह इंटरव्यू अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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